जयपुर कांग्रेस में नई जंग—कौन संभालेगा शहर नेतृत्व ?
जयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर पार्टी में जबरदस्त खींचतान जारी है। 36 घंटे बाद भी नाम तय नहीं हो पाया है और मुकाबला अब दो चेहरों से बढ़कर कई दावेदारों तक पहुंच गया है। संगठन के भीतर तेज लॉबिंग, नेताओं की सक्रियता और गुटीय समीकरण पूरी प्रक्रिया को और उलझा रहे हैं।
🔷 जयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष पर सस्पेंस बरकरार
जयपुर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष के चयन को लेकर पार्टी में भूचाल जैसी स्थिति बनी हुई है। संगठन की बैठकों और वरिष्ठ नेताओं के मंथन के बावजूद अब तक किसी एक नाम को अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है। स्थिति यह है कि 36 घंटे बीत जाने के बाद भी घोषणा को टालना पड़ा है।
🔷 पुष्पेंद्र भारद्वाज और सुनील शर्मा—दोनों की टक्कर से बढ़ी चुनौतियां
पैनल में शुरू से आगे माने जा रहे दो नाम—पुष्पेंद्र भारद्वाज और सुनील शर्मा—की अंतर्कलह ने समीकरणों को उलझा दिया है।
पुष्पेंद्र भारद्वाज: सांगानेर से पूर्व प्रत्याशी, संगठनात्मक रूप से लंबे समय से सक्रिय, जमीनी नेता, विरोध-प्रदर्शनों में निरंतर उपस्थिति, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के करीबी माने जाते हैं।
सुनील शर्मा: दिवंगत कांग्रेस नेता सुरेश शर्मा के भाई, राजनीतिक सक्रियता सीमित लेकिन पार्टी कार्यक्रमों में लगातार मौजूदगी।
दोनों के समर्थकों के सोशल मीडिया पर सक्रिय होने से माहौल और गर्म हुआ है।
🔷 दो के बीच संघर्ष से तीसरे नाम के उभरने की संभावनाएं बढ़ीं
पुष्पेंद्र और सुनील के बीच खींचतान बढ़ने से अब तीसरे विकल्प पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि यदि दोनों में सहमति नहीं बनी तो एक नया नाम जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में बढ़त बना सकता है।
🔷 दो नए दावेदार मैदान में—समीकरण हुए और जटिल
मौजूदा स्थिति में दो और नेताओं का नाम तेजी से उभर कर सामने आया है:
>गिर्राज गर्ग – पीसीसी के पूर्व महामंत्री, एआईसीसी सदस्य
>दीपक डंडोरिया – प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी
>डंडोरिया ने संगठन सर्जन अभियान के दौरान पर्यवेक्षक रुद्धराजू से मुलाकात कर चर्चा को और दिलचस्प बना दिया है।
🔷 कार्यकर्ताओं की राय—जमीनी नेता को मिलनी चाहिए कमान
कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी इस पर तीखी बहस चल रही है। अधिकांश कार्यकर्ता ऐसे नेता की वकालत कर रहे हैं जिसकी जनसंपर्क क्षमता मजबूत हो, जो हमेशा मैदान में मौजूद रहे और संगठन को सक्रिय कर सके। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर तुलना और समर्थन का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है।
🔷 जयपुर कांग्रेस की कमान किसके हाथ?
जयपुर शहर कांग्रेस के नए अध्यक्ष का नाम घोषित होने में देरी ने इस पद को लेकर उत्सुकता और सियासी खींचतान दोनों को बढ़ाया है। दो दावेदारों की सीधी जंग अब बहुकोणीय मुकाबले में बदल चुकी है। आलाकमान के निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हैं।