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डिलीवरी के कुछ ही देर बाद नवजात की मौत, परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा…

अलवर के राजकीय गीतानंद शिशु चिकित्सालय में डिलीवरी के करीब आधे घंटे बाद नवजात शिशु की मौत हो गई। इस घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा कर दिया और स्टाफ व डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। परिजनों की मांग पर नवजात के पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल बोर्ड गठित कराने की प्रक्रिया शुरू की गई और बच्चे के शव को मोर्चरी में शिफ्ट किया गया।

परिजनों का आरोप – “बच्चा ठीक था, फिर 20 मिनट में कैसे मौत हो गई?” छठी मिल झारखेड़ा निवासी रणजीत सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी आरती वर्मा को प्रसव के लिए महिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे सामान्य प्रसव से लड़का हुआ। परिजनों के अनुसार, डिलीवरी के बाद स्टाफ ने बताया कि बच्चे को कुछ परेशानी है और उसे एफबीएनसी वार्ड में भर्ती करना होगा।

परिजन जब रेफर की प्रक्रिया पूरी करने लगे तो अचानक स्टाफ ने बताया कि बच्चे की मौत हो चुकी है। परिजनों ने सवाल उठाते हुए कहा कि–

“सामान्य डिलीवरी के बाद बच्चा हाथ-पैर हिला रहा था, आंखें भी खुली थीं।”


“अगर बच्चा जीवित था तो कुछ ही मिनटों में उसकी हालत इतनी खराब कैसे हो गई?”

परिजनों का आरोप है कि स्टाफ और डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण बच्चे की मौत हुई। विरोध करने पर उन्हें गार्ड बुलाकर बाहर निकाल दिया गया।

डॉक्टरों की सफाई – “बच्चे की हालत जन्म से ही गंभीर थी”

इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर राशि कौशिक ने मामले में बताया कि नवजात को जन्म के तुरंत बाद डॉक्टर लवलेश गोपालिया ने देखा और एफबीएनसी वार्ड में भर्ती किया। बच्चे की हालत जन्म से ही गंभीर थी।

डॉक्टर के मुताबिक—बच्चे के पेट में पानी भरा हुआ था, फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं थे,वह सामान्य रूप से सांस नहीं ले पा रहा था,शरीर जन्म के समय ही नीला पड़ा हुआ था, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है। डॉक्टर राशि कौशिक ने बताया कि जयपुर रेफर करने के लिए 108 एंबुलेंस बुलाई गई, लेकिन उसमें 40–45 मिनट का समय लग गया। इस दौरान डॉक्टरों ने लगातार प्रयास किए, लेकिन बच्चा सर्वाइव नहीं कर पाया।

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