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अंता उपचुनाव के बाद किरोड़ी का बड़ा बयान: “चेहरों से नहीं, विचारधारा से जीत-हार तय होती है” — नकली खाद-बीज माफिया पर 81 एफआईआर, प्याज पर सरकारी खरीद का रास्ता तलाश…

अंता उपचुनाव के बाद उठी चर्चाओं के बीच अलवर के प्रभारी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शनिवार को सर्किट हाउस में स्पष्ट संदेश दिया कि भाजपा की लड़ाई चेहरों की नहीं, विचारधारा की है। उन्होंने किसानों की समस्याओं पर हुई ताबड़तोड़ कार्रवाई, नकली खाद-बीज रैकेट पर सख्त कदम और प्याज संकट से राहत की तैयारियों पर विस्तृत अपडेट दिया।

“व्यक्ति नहीं… विचारधारा चुनाव तय करती है” — किरोड़ी

अंता उपचुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि उनके आने-जाने से कोई अंतर नहीं पड़ता।

उन्होंने कहा— “हम विचारधारा की लड़ाई लड़ते हैं। किसी एक व्यक्ति से क्या फर्क पड़ेगा? संगठन और विचारधारा की मजबूती ही हमें बिहार में भारी बहुमत दिला पाई।”
नरेश मीणा पर पूछे सवाल पर उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बताया।

“किसानों की असली परेशानी को जमीन पर समझा”
मंत्री ने बताया कि पिछले 5–6 महीनों में उन्होंने खेतों और बाजारों में जाकर किसानों की वास्तविक चुनौतियों को समझा।
उन्होंने कहा— “जमीनी स्थिति देखने के बाद ही कार्रवाई की दिशा बदली। किसानों को राहत देने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।”

नकली खाद-बीज पर कड़ी कार्रवाई, अब तक 81 एफआईआर

डॉ. मीणा ने खुलासा किया कि रासायनिक खाद फैक्ट्रियों पर छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकली खाद मिली।
इसके बाद कई संचालकों पर मुकदमे दर्ज हुए और लाइसेंस रद्द किए गए।
बीज अनियमितता पर भी कठोर कदम उठाए गए, जहां व्यापारी मंडी का अनाज चमकाकर कंपनियों के नाम से बीज बेच रहे थे, जिससे 70 रुपए किलो सरसों किसानों को 1200 रुपए तक खरीदनी पड़ती थी।
इस नेटवर्क पर अब तक 81 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

प्याज संकट पर बड़ी पहल: MSP नहीं, फिर भी मिलेगा सहारा

प्याज का एमएसपी में शामिल न होना किसानों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि राहत के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
राजफेड और मेफेड को सरकारी खरीद की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

किसान-हित और संगठन प्राथमिकता में

किरोड़ी मीणा ने उपचुनाव के राजनीतिक सवालों को विचारधारा और संगठन की मजबूती पर केंद्रित रखा।
नकली खाद-बीज माफिया पर हुई कार्रवाई सरकार की सख्त नीति को दिखाती है, जबकि प्याज संकट समाधान किसानों को राहत की उम्मीद देता है।

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