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बिहार चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस में घमासान, अखिलेश सिंह ने अल्लावरू पर निशाना साधा…

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कांग्रेस के बेहद खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर ही सियासी तकरार तेज हो गई है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने इस हार के लिए सीधे पार्टी संगठन के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और RJD रणनीतिकार संजय यादव को जिम्मेदार ठहराते हुए बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। हार के कारणों और भविष्य की रणनीति को लेकर पार्टी में गहरी खींचतान नजर आ रही है।

कांग्रेस की करारी हार के बाद सवालों की बौछार

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटें लगभग खत्म होने के बाद नेताओं में असंतोष उभरकर सामने आ गया है। पार्टी को उम्मीद के अनुरूप वोट बैंक नहीं मिला और महागठबंधन के वोट ट्रांसफर में भी कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

अखिलेश प्रसाद सिंह का हमला: ‘जिम्मेदार हैं अल्लावरू और संजय यादव’

चुनाव परिणामों के बाद अखिलेश प्रसाद सिंह ने साफ कहा कि संगठन प्रभारी कृष्णा अल्लावरू के गलत निर्णयों और RJD के संजय यादव की हस्तक्षेपकारी रणनीतियों ने कांग्रेस की स्थिति और खराब कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों के चयन से लेकर गठबंधन तालमेल तक, हर स्तर पर कुप्रबंधन हुआ।

टिकट वितरण में खामियों ने बिगाड़ी स्थिति

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के कई मजबूत स्थानीय चेहरे टिकट से वंचित रह गए, जबकि जमीन पर कमजोर प्रदर्शन वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई। इस गलती ने पार्टी के परंपरागत वोटरों को भी दूर कर दिया और कई सीटों पर सीधा असर दिखा।

गठबंधन में तालमेल की कमी, कांग्रेस को भारी नुकसान

महागठबंधन में उम्मीद के मुताबिक तालमेल नहीं बन पाया। कई सीटों पर RJD और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी साफ नजर आई। इससे विपक्षी वोट बंटे और एनडीए को फायदा मिला। कांग्रेस के भीतर नाराजगी यही है कि नेतृत्व इस असंतोष को पहले से नहीं भांप सका।

ग्राउंड कैम्पेन कमजोर, डिजिटल रणनीति लगभग नदारद

कांग्रेस का बूथ-स्तर नेटवर्क चुनाव के दौरान बिल्कुल कमजोर पड़ा। जहां एनडीए ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक सक्रिय रहा, वहीं कांग्रेस का कैम्पेन धीमा और असंगठित दिखा। सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार में भी पार्टी पिछड़ गई, जिससे युवा वोटरों से जुड़ाव नहीं बन सका।

पार्टी में अब आत्ममंथन की मांग तेज

हार के बाद पार्टी के अंदर गुटबाज़ी और खुलकर सामने आ गई है। कई वरिष्ठ नेता केंद्रीय टीम से संगठनात्मक फैसलों की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। बिहार में कांग्रेस का भविष्य अब बड़े बदलावों और नेतृत्व के पुनर्मूल्यांकन पर निर्भर करता है।

आगे की रणनीति: संगठन और गठबंधन, दोनों में सुधार की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस को बिहार में फिर से खड़ा होने के लिए मजबूत स्थानीय चेहरों को आगे लाना होगा। साथ ही गठबंधन में अपनी भूमिका स्पष्ट करनी होगी ताकि भविष्य में समान गलतियों की पुनरावृत्ति न हो।

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