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सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वरिष्ठ चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक…


राजस्थान में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: मेडिकल कॉलेजों के प्रशासनिक पदों पर तैनात चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक

जयपुर। राजस्थान सरकार ने चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा निर्णय लेते हुए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और उनसे जुड़े अस्पतालों में कार्यरत प्रशासनिक पदों पर तैनात चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी इस आदेश को एम्स मॉडल की तर्ज पर पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

प्रधानाचार्य, अधीक्षक और नियंत्रक अब नहीं कर सकेंगे निजी इलाज

नए आदेश के अनुसार, सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्य, नियंत्रक, अधीक्षक, तथा अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ संभाल रहे डॉक्टर निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज नहीं कर सकेंगे, न ही अपने आवास पर निजी क्लिनिक चला पाएंगे।
सरकार का मानना है कि ऐसे अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी सरकारी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करना है।

एम्स की तर्ज पर कड़ा अनुशासन लागू

इस व्यवस्था से उम्मीद है कि महत्वपूर्ण पदों पर बैठे डॉक्टर पूरी क्षमता के साथ केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अस्पताल प्रबंधन को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा।

सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सेवाओं का लाभ

स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि जब प्रशासनिक जिम्मेदार पदों पर मौजूद चिकित्सक निजी प्रैक्टिस से दूर रहेंगे, तो वे

  • डॉक्टरों की उपलब्धता,
  • अस्पताल प्रबंधन,
  • और मरीजों की समस्याओं के समाधान
    पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे।
    इससे सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार, बेहतर संसाधन प्रबंधन, और मरीजों को समयबद्ध उपचार मिलने की उम्मीद है।

नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

विभाग ने साफ किया है कि नए नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
यदि कोई चिकित्सक निजी प्रैक्टिस करते पाया जाता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय है।
सरकार का दावा है कि इस फैसले से मरीजों को बेहतर सुविधाएँ, अधिक समय और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलेगा।


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Stv News Rajasthan

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