दिल्ली की हवा अब भी जहरीली, नवंबर के दूसरे हफ्ते में भी नहीं मिली राहत…
राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। नवंबर के दूसरे सप्ताह में भी दिल्ली की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। रविवार को राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) करीब 399 दर्ज किया गया, जो ‘रेड जोन’ में आता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्तर बेहद खतरनाक है और इससे सांस की बीमारियों, आंखों में जलन और सिरदर्द जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं।
सीपीसीबी की रिपोर्ट: दिल्ली बनी देश की दूसरी सबसे प्रदूषित राजधानी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, रविवार को 24 घंटे का औसत AQI 361 रहा, जिससे दिल्ली देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया। राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया। वजीरपुर में 420, बुराड़ी में 418 और विवेक विहार में 411 AQI रिकॉर्ड किया गया। इन इलाकों में दृश्यता घटने और धुंध की परत जमने से लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
एनसीआर में भी दमघोंटू हालात, नोएडा और गाजियाबाद में हवा खतरनाक स्तर पर
दिल्ली से सटे एनसीआर क्षेत्र में भी प्रदूषण की स्थिति भयावह बनी हुई है। नोएडा में AQI 354, ग्रेटर नोएडा में 336 और गाजियाबाद में 339 दर्ज किया गया। इन आंकड़ों के मुताबिक, एनसीआर की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में ठंडक बढ़ने और हवाओं की गति कम होने के कारण प्रदूषक कण नीचे जम जाते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता और बिगड़ जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी और सरकार की अपील
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनने, सुबह की सैर से बचने और बच्चों व बुजुर्गों को प्रदूषण से दूर रखने की सलाह दी है। वहीं दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई कदम लागू किए हैं, जिनमें निर्माण कार्यों पर रोक, स्कूलों में अवकाश और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
हवा में जहर, समाधान अब नीति और जनसहयोग पर निर्भर
विश्लेषकों का मानना है कि केवल सरकारी कदम पर्याप्त नहीं हैं। जब तक दिल्ली-एनसीआर के लोग वाहन उपयोग कम नहीं करेंगे और पराली जलाने जैसी गतिविधियों पर सख्ती नहीं होगी, तब तक यह संकट हर सर्दी दोहराया जाता रहेगा। हवा में घुला यह जहर अब केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि लोगों के जीवन का सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।