जयपुर में फिर एक ही नगर निगम का युग शुरू…
राजधानी जयपुर में दोनों नगर निगमों का कार्यकाल 9 नवंबर को समाप्त हो गया है। अब 10 नवंबर से शहर की शहरी सरकार पुरानी व्यवस्था पर लौट आएगी। यानी एक बार फिर पूरा जयपुर एक ही नगर निगम के अंतर्गत आएगा। इस फैसले के साथ ही जयपुर नगर निगम (एकीकृत रूप में) दोबारा अस्तित्व में आ जाएगा।
दो निगमों का प्रयोग हुआ असफल साबित
राज्य सरकार द्वारा जयपुर को दो हिस्सों—हैरिटेज और ग्रेटर नगर निगम—में बांटने का जो प्रयोग किया गया था, वह नतीजों के लिहाज से असफल रहा। प्रशासनिक और आर्थिक स्तर पर यह व्यवस्था शहर के विकास के लिए उपयोगी नहीं बन सकी। पांच साल का यह कार्यकाल अब इतिहास के एक प्रयोग के रूप में याद किया जाएगा।
हैरिटेज निगम पर पड़ा 500 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
दो नगर निगम बनाए जाने से हैरिटेज नगर निगम पर हर साल लगभग 100 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आया। पूरे कार्यकाल में यह राशि बढ़कर करीब 500 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। सीमित संसाधनों के बावजूद दोनों निगमों ने मिलकर विकास कार्यों पर करीब 1000 करोड़ रुपए खर्च किए।
पार्षदों की बजट को लेकर रही नाराज़गी
बजट सीमित होने के कारण दोनों निगमों के पार्षदों को लगातार विकास कार्यों के लिए धनराशि की कमी का सामना करना पड़ा। कई बार परिषद बैठकों में पार्षदों ने इस मुद्दे पर अपनी नाराज़गी भी जताई और अतिरिक्त बजट की मांग की।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे प्रशासनिक प्रयोग
यह कोई पहला मौका नहीं है जब जयपुर नगर निगम को प्रशासनिक रूप से नए रूप में देखा गया हो। वर्ष 2009 में कांग्रेस सरकार ने महापौर का चुनाव सीधे जनता से करवाने का निर्णय लिया था। नागरिकों ने अपने वोट से महापौर चुना था, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह निर्णय रद्द कर दिया गया। अब एक बार फिर एक नगर निगम प्रणाली लागू होने जा रही है।