IAS शिखर अग्रवाल पर ACB जांच की मंजूरी, 40 विला खरीद और निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के आरोप
जयपुर। राजस्थान कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को विस्तृत जांच की मंजूरी दे दी है। प्रारंभिक जांच में पद के कथित दुरुपयोग, निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को अनुचित लाभ पहुंचाने और अपने तथा परिजनों के नाम पर अनंता रिसॉर्ट में विला खरीदने से जुड़े आरोप सामने आए हैं। ACB के अनुसार, उदयपुर और अलवर स्थित रिसॉर्ट में कुल 40 विला-कॉटेज की खरीद की जानकारी मिली है। जांच एजेंसी कथित तौर पर कंपनी को दी गई रियायतों, सरकारी आर्थिक पैकेज और संपत्ति खरीद के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल करेगी। फिलहाल ये प्रारंभिक जांच में सामने आए आरोप हैं, जिनकी पुष्टि विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
सरकार ने धारा 17-A के तहत दी विस्तृत जांच की मंजूरी
ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, ब्यूरो ने मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट, उद्योग विभाग से प्राप्त तथ्यात्मक रिपोर्ट और गोपनीय सूत्रों से मिली जानकारी का परीक्षण किया। इसके बाद प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विस्तृत जांच जरूरी मानी गई।राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-A के तहत जांच के लिए पूर्वानुमोदन प्रदान किया है। यह मंजूरी सरकारी पद पर रहते हुए कथित तौर पर लिए गए फैसलों और उनसे जुड़े संभावित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच आगे बढ़ाने के लिए दी गई है।ACB अब शिखर अग्रवाल, गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल करेगी।
पद के दुरुपयोग और निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने का आरोप
ACB की प्रारंभिक जांच के अनुसार, शिखर अग्रवाल ने उदयपुर जिला कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सहित विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए कथित तौर पर अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया।आरोप है कि उन्होंने अनंता ब्रांड के नाम से होटल और रिसॉर्ट संचालित करने वाली गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के साथ मिलीभगत कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया। इसमें रिसॉर्ट निर्माण से जुड़ी शर्तों में कथित छूट, जरूरी प्रमाणपत्रों की जांच के बिना स्वीकृतियां और विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिलाने के आरोप शामिल हैं।ACB का कहना है कि इन फैसलों से राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। हालांकि, सरकारी स्वीकृतियों और कंपनी को दिए गए लाभों की वैधता का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और विस्तृत जांच के आधार पर होगा।
उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में 40 विला-कॉटेज खरीदने का आरोप
ACB की प्रारंभिक जांच में शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों के नाम पर उदयपुर और अलवर स्थित अनंता रिसॉर्ट में संपत्तियां खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, उदयपुर के बुझड़ा स्थित रिसॉर्ट में अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10-10 कॉटेज खरीदे गए। प्रत्येक की कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई है।वहीं, अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर आठ विला खरीदे जाने की जानकारी है। प्रत्येक विला की कीमत करीब 16.5 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा दोनों बेटों के नाम पर चार विला करीब 15-15 लाख रुपये में और सास-ससुर के नाम पर चार विला करीब 16.5-16.5 लाख रुपये में खरीदे जाने का आरोप है।इस तरह जांच में कुल 40 संपत्तियों की खरीद का मामला सामने आया है। ACB का दावा है कि इनकी खरीद कीमत बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम हो सकती है। संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य, भुगतान के स्रोत और खरीद की परिस्थितियों की जांच की जाएगी।
27 मार्च 2026 को आर्थिक पैकेज और विला की रजिस्ट्री
ACB की जांच में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम तारीखों से जुड़ा है। ब्यूरो के अनुसार, वित्त विभाग ने 27 मार्च 2026 को गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया था। इसी तारीख को शिखर अग्रवाल की ओर से 20 विला की रजिस्ट्री कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है।जांच एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि कंपनी को दिए गए आर्थिक पैकेज और उसी दिन हुई संपत्ति की रजिस्ट्री के बीच कोई संबंध था या नहीं। पैकेज की स्वीकृति की प्रक्रिया, संबंधित बैठकों के रिकॉर्ड और विला खरीद के दस्तावेज जांच का हिस्सा होंगे।सिर्फ एक ही तारीख पर दो घटनाएं होने से उनके बीच मिलीभगत साबित नहीं होती। इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बयानों की जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।
आय से अधिक संपत्ति के पहलू की भी होगी जांच
ACB के अनुसार, मामले में शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों के नाम पर कथित तौर पर आय से अधिक संपत्तियां अर्जित किए जाने के पहलू की भी जांच की जाएगी। इसके तहत विला-कॉटेज की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम, आय के स्रोत और संपत्ति के घोषित मूल्य का मिलान किया जाएगा।जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि संपत्तियों का स्वामित्व किसके नाम पर है और खरीद के लिए भुगतान किस माध्यम से किया गया। इसके अलावा, कंपनी के निदेशकों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल होगी।संपत्ति का मूल्य या संयुक्त स्वामित्व अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। आय से अधिक संपत्ति के आरोपों पर निष्कर्ष जांच में सामने आने वाले वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।
ACB की जांच में कंपनी के निदेशकों की भूमिका भी शामिल
ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, विस्तृत जांच में शिखर अग्रवाल के साथ गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी देखी जाएगी।जांच के दौरान रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों, स्वीकृतियों, विशेष आर्थिक पैकेज और संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। साथ ही, कथित सरकारी नुकसान का आकलन भी किया जा सकता है।इस मामले में अभी किसी व्यक्ति का दोष सिद्ध नहीं हुआ है। जांच के निष्कर्ष और आगे की न्यायिक प्रक्रिया ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेंगे।
APO आदेश और ACB जांच को अलग-अलग समझना जरूरी
शिखर अग्रवाल को इससे पहले राजस्थान सरकार ने प्रशासनिक कारणों का उल्लेख करते हुए APO किया था। हालांकि, उस आदेश में संपत्ति विवाद को कार्रवाई का कारण नहीं बताया गया था। अब ACB को विस्तृत जांच की मंजूरी मिलने से मामला अलग प्रशासनिक और कानूनी चरण में पहुंच गया है।दोनों घटनाक्रमों को जोड़कर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। APO एक प्रशासनिक निर्णय है, जबकि धारा 17-A के तहत दी गई मंजूरी भ्रष्टाचार के आरोपों की विस्तृत जांच से संबंधित है।फिलहाल ACB की जांच का फोकस कथित पद के दुरुपयोग, कंपनी को मिले लाभ, सरकारी नुकसान और परिवार के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों के स्रोत पर रहेगा।
जांच के निष्कर्षों पर टिकी नजर
राजस्थान सरकार से जांच की मंजूरी मिलने के बाद ACB अब मामले से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत पड़ताल करेगी। इसमें कंपनी को दिए गए कथित लाभ, विला की खरीद और अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।फिलहाल शिखर अग्रवाल और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकारी फैसलों और संपत्ति खरीद के बीच कोई अनुचित संबंध था या नहीं।