राजस्थान में IAS शिखर अग्रवाल APO, परिवार की 40 विला-कॉटेज खरीदने की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
जयपुर। राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी और उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से APO (अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर्स) कर दिया है। कार्मिक विभाग ने बुधवार देर रात आदेश जारी कर उन्हें आगामी आदेशों तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा है। यह घटनाक्रम उनके और परिवार के सदस्यों की संपत्ति खरीद को लेकर सामने आई एक खोजी मीडिया रिपोर्ट के बाद चर्चा में आया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परिवार ने करीब ढाई साल में एक ही रियल एस्टेट कंपनी से लगभग 40 विला और कॉटेज खरीदे। हालांकि, सरकार के आदेश में APO की वजह प्रशासनिक बताई गई है। संपत्ति खरीद से जुड़े आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और जांच की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
देर रात कार्मिक विभाग ने जारी किया आदेश
कार्मिक विभाग की ओर से बुधवार देर रात जारी आदेश में कहा गया कि प्रशासनिक कारणों से शिखर अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से APO किया जाता है। उन्हें अगले आदेश तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है। आदेश पर शासन के संयुक्त सचिव धीरज कुमार सिंह के हस्ताक्षर बताए गए हैं।शिखर अग्रवाल 1993 बैच के IAS अधिकारी हैं। APO किए जाने से पहले वे उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
इन अहम पदों पर संभाल रहे थे जिम्मेदारी
APO किए जाने से पहले शिखर अग्रवाल के पास उद्योग और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण पद थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी जिम्मेदारियों में ये पद शामिल थे:
- उद्योग एवं MSME विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव।
- दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) से जुड़ी जिम्मेदारी।
- निवेश और ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन (BIP) से संबंधित कार्य।
- प्रवासी राजस्थानी मामलों से जुड़ा विभाग।
- RIICO के चेयरमैन।
- RAJSICO के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक।
उनके APO होने के बाद इन विभागों और संस्थाओं की जिम्मेदारियों को लेकर नए प्रशासनिक आदेशों का इंतजार रहेगा।
मीडिया रिपोर्ट में 40 विला और कॉटेज खरीदने का दावा
एक खोजी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी, दो बेटों और ससुराल पक्ष के सदस्यों ने करीब ढाई साल के भीतर एक ही रियल एस्टेट कंपनी से लगभग 40 विला और कॉटेज खरीदे।रिपोर्ट में संपत्तियों की खरीद और परिवार के सदस्यों के नाम से हुए लेन-देन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद की रकम, भुगतान के स्रोत और लेन-देन की परिस्थितियों से जुड़ी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।केवल संपत्ति खरीद की संख्या या मूल्य के आधार पर किसी अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
APO आदेश में संपत्ति विवाद का उल्लेख नहीं
शिखर अग्रवाल को APO किए जाने का घटनाक्रम संपत्ति खरीद से जुड़ी रिपोर्ट के बाद सामने आया है। हालांकि, कार्मिक विभाग के आदेश में कार्रवाई के पीछे प्रशासनिक कारण बताए गए हैं। आदेश में संपत्ति विवाद को APO का कारण नहीं बताया गया है।इसलिए दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करना अभी उचित नहीं होगा। संपत्ति खरीद से जुड़े दावों और किसी संभावित प्रशासनिक जांच की स्थिति पर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
जांच और सरकार के अगले कदम पर नजर
शिखर अग्रवाल को APO किए जाने के बाद अब उनके पदस्थापन और संपत्ति खरीद से जुड़े दावों को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है। यदि संबंधित दस्तावेजों या लेन-देन की जांच होती है, तो उसके निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।फिलहाल सरकार के आदेश में प्रशासनिक कारणों का उल्लेख है, जबकि 40 विला और कॉटेज खरीदने का दावा मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है। इन दोनों पहलुओं को अलग-अलग समझना जरूरी है। संबंधित अधिकारियों और परिवार का पक्ष तथा आधिकारिक जांच का विवरण सामने आने के बाद ही मामले के सभी तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।