राजस्थान में अवैध खनन पर बड़ा खुलासा: 5 साल में 53,707 मामले दर्ज, ₹501 करोड़ का जुर्माना वसूला
जयपुर। राजस्थान में अवैध खनन, खनिज परिवहन और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई के बावजूद यह समस्या लगातार चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2026-27 के शुरुआती छह महीनों तक 53,707 मामले दर्ज किए गए। इस दौरान 501.31 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया और 52,989 वाहन व मशीनें जब्त की गईं। वहीं, 6,158 एफआईआर के मुकाबले 3,412 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। आंकड़े कार्रवाई के व्यापक स्तर को दिखाते हैं, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी और मामलों के निपटारे की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठाते हैं।
पांच साल में 53 हजार से ज्यादा मामले दर्ज
राजस्थान में अवैध खनन के खिलाफ खान विभाग और संबंधित एजेंसियों की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक अवैध खनन, परिवहन और भंडारण से जुड़े मामलों की संख्या लगातार ऊंची रही। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले छह महीनों में भी 5,799 मामले दर्ज किए गए।कुल 53,707 मामलों में कार्रवाई के दौरान 52,989 वाहन और मशीनें जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें खनन या खनिजों के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहन और मशीनें शामिल हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए बड़ी संख्या में कार्रवाई की गई, लेकिन समस्या पर प्रभावी रोक लगाने की चुनौती बनी हुई है।
501.31 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, संबंधित अवधि में अवैध खनन से जुड़े मामलों में कुल 501.31 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सबसे अधिक 110.96 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई। वहीं, 2023-24 में 108.32 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया था।हालांकि, जुर्माने की राशि वसूलना और अवैध खनन नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना अलग-अलग पहलू हैं। इसके लिए यह भी देखना जरूरी है कि जब्त वाहनों और मशीनों के मामलों में आगे क्या कार्रवाई हुई, दोबारा उल्लंघन करने वालों की पहचान हुई या नहीं और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई किस स्तर तक की गई।
एफआईआर के मुकाबले गिरफ्तारियों का आंकड़ा कम
पिछले वर्षों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 6,158 एफआईआर दर्ज हुईं, जबकि गिरफ्तारियों की संख्या 3,412 रही। इन दोनों आंकड़ों के बीच अंतर जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रगति पर सवाल उठाता है।हालांकि, एफआईआर और गिरफ्तारी के आंकड़ों की सीधी तुलना से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बाकी सभी मामलों में मुख्य आरोपी फरार हैं। एक एफआईआर में कई आरोपी हो सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में जांच जारी रह सकती है। इसलिए आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी और मामलों के निस्तारण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विस्तृत आधिकारिक रिकॉर्ड जरूरी है।
2025-26 में सबसे ज्यादा मामले दर्ज
उपलब्ध वर्षवार आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में अवैध खनन से जुड़े 10,569 मामले दर्ज किए गए। यह दी गई सूची में किसी एक वित्तीय वर्ष का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इसी अवधि में 1,167 एफआईआर दर्ज हुईं, 10,403 वाहन और मशीनें जब्त की गईं तथा 734 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं।इस वर्ष 110.96 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया। यह भी उपलब्ध सूची में किसी एक वित्तीय वर्ष की सबसे अधिक जुर्माना वसूली है। आंकड़े बताते हैं कि इस अवधि में कार्रवाई का स्तर बढ़ा, लेकिन केवल कार्रवाई की संख्या से अवैध खनन पर नियंत्रण की सफलता का आकलन नहीं किया जा सकता।
2026-27 के पहले छह महीनों में 5,799 मामले
वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से 30 सितंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, 5,799 मामले दर्ज किए गए। इस दौरान 832 एफआईआर दर्ज हुईं, 5,757 वाहन और मशीनें जब्त की गईं तथा 568 गिरफ्तारियां हुईं। इसी अवधि में 44.33 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया।यह आंकड़ा केवल छह महीनों का है, इसलिए इसकी तुलना पूरे वित्तीय वर्ष के आंकड़ों से सावधानीपूर्वक करनी चाहिए। आगे के महीनों में कार्रवाई और वसूली के आंकड़े बदल सकते हैं।
वर्षवार कार्रवाई के आंकड़े
उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार, अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:
| वित्तीय वर्ष | दर्ज मामले | एफआईआर | जब्त वाहन व मशीनें | जुर्माना (करोड़ रुपये) | गिरफ्तारियां |
|---|---|---|---|---|---|
| 2021-22 | 9,073 | 1,070 | 9,092 | 88.84 | 719 |
| 2022-23 | 9,372 | 1,069 | 9,362 | 81.81 | 432 |
| 2023-24 | 9,563 | 1,219 | 9,033 | 108.32 | 562 |
| 2024-25 | 9,331 | 801 | 9,342 | 67.05 | 397 |
| 2025-26 | 10,569 | 1,167 | 10,403 | 110.96 | 734 |
| 2026-27* | 5,799 | 832 | 5,757 | 44.33 | 568 |
| कुल | 53,707 | 6,158 | 52,989 | 501.31 | 3,412 |
अरावली और नदी घाटियों में खनन पर चिंता
राजस्थान में अरावली क्षेत्र और बनास, चंबल व लूनी जैसी नदी घाटियों में रेत, बजरी तथा अन्य खनिजों का खनन पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण मुद्दा है। अनियंत्रित खनन से भूमि, नदी तंत्र और भूजल पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
ऐसे क्षेत्रों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, खनन स्थलों की निगरानी और अवैध परिवहन पर कार्रवाई जरूरी है। ड्रोन, GIS तकनीक और डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल निगरानी को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, तकनीक के साथ समयबद्ध कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी अहम है।
अवैध खनन पर रोक के लिए आगे क्या जरूरी?
अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल जुर्माना वसूलना या वाहन जब्त करना पर्याप्त नहीं है। मामलों की जांच, आरोपियों की पहचान, दोबारा उल्लंघन रोकने और पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई पर भी ध्यान देना होगा।विभागीय आंकड़े कार्रवाई के बड़े पैमाने को दिखाते हैं। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि इन कार्रवाइयों से अवैध खनन में कितनी कमी आती है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया कितनी प्रभावी रहती है। इन पहलुओं की स्पष्ट जानकारी मिलने पर ही कार्रवाई के वास्तविक परिणामों का आकलन किया जा सकेगा।