अलवर की लाल प्याज के भाव पर टिकी नजर, आवक बढ़ने पर बदल सकता है बाजार का रुख
अलवर। राजस्थान के अलवर जिले की लाल प्याज की मांग देश के कई राज्यों में रहती है। दिवाली के साथ ही अलवर की प्याज मंडी में नई फसल की आवक शुरू हो गई है। फिलहाल थोक में प्याज के भाव 35 से 40 रुपये प्रति किलो बताए जा रहे हैं। पंचायत चुनाव के चलते मंडी में आवक प्रभावित होने की बात सामने आई है। दूसरे चरण का मतदान संपन्न होने के बाद आवक बढ़ने की उम्मीद है। व्यापारियों के अनुसार, दिवाली के बाद मंडी में प्रतिदिन करीब एक लाख कट्टे प्याज पहुंच सकते हैं। ऐसे में किसानों और उपभोक्ताओं की नजर अब कीमतों के अगले रुख पर है।
दिवाली के बाद मंडी में बढ़ सकती है प्याज की आवक
अलवर की प्याज मंडी में दिवाली के आसपास नई लाल प्याज पहुंचने लगती है। इस बार भी फसल की आवक शुरू हो गई है। हालांकि, पंचायत चुनाव के दौरान किसानों की व्यस्तता के कारण मंडी में प्याज की आवक अपेक्षाकृत कम रहने की जानकारी सामने आई है।अब दूसरे चरण का मतदान पूरा होने के बाद मंडी में गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। व्यापारियों का अनुमान है कि दिवाली के बाद रोजाना करीब एक लाख कट्टे प्याज की आवक हो सकती है। यदि ऐसा होता है, तो बाजार में कारोबार तेज होने के साथ कीमतों में बदलाव भी देखने को मिल सकता है।
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और यूपी तक जाती है अलवर की प्याज
मंडी व्यापारी सौरभ कालरा के अनुसार, अलवर की लाल प्याज की मांग कई राज्यों में रहती है। यहां से प्याज पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बाजारों में भेजी जाती है। इसके अलावा बिहार और पश्चिम बंगाल तक भी इसकी आपूर्ति होती है।व्यापारियों को उम्मीद है कि आवक बढ़ने के साथ दूसरे राज्यों के खरीदारों की मांग भी बाजार को प्रभावित करेगी। मंडी में कीमतों का रुख फसल की उपलब्धता, मांग और परिवहन जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल 35 से 40 रुपये किलो बिक रही प्याज
मंडी में मौजूद किसानों के मुताबिक, फिलहाल लाल प्याज थोक में 35 से 40 रुपये प्रति किलो बिक रही है। मौजूदा भाव से किसानों को बेहतर आमदनी की उम्मीद है।हालांकि, केवल बाजार भाव से मुनाफे का आकलन नहीं किया जा सकता। खेती की लागत, उत्पादन, कटाई, छंटाई और परिवहन पर होने वाला खर्च भी कमाई को प्रभावित करता है। किसानों के अनुसार, एक बीघा में प्याज की खेती पर करीब 40 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। ऐसे में लागत निकालने और मुनाफा कमाने के लिए उचित भाव मिलना जरूरी है।
पिछले साल कम भाव मिलने से किसानों को हुआ नुकसान
किसानों के मुताबिक, पिछले साल प्याज के कम भाव मिलने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था। इसका असर इस बार की खेती पर भी पड़ा है। बताया जा रहा है कि कुछ किसानों ने प्याज की खेती से दूरी बना ली।इस वर्ष अलवर जिले में करीब 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लाल प्याज की बुवाई की गई है। ऐसे में फसल का उत्पादन और मंडी में उसकी आवक आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करने वाले अहम कारक होंगे। हालांकि, वास्तविक उत्पादन और बाजार में उपलब्धता के आंकड़े सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
आवक बढ़ी तो गिर सकते हैं भाव, कमी हुई तो तेजी संभव
बाजार के जानकारों के अनुसार, मंडी में प्याज की आवक बढ़ने पर कीमतों में गिरावट की संभावना रहती है। वहीं, मौसम की मार से फसल खराब होने या बाजार में आपूर्ति कम होने पर भाव बढ़ सकते हैं।इस स्थिति में किसानों और उपभोक्ताओं के हित अलग-अलग दिशाओं में प्रभावित हो सकते हैं। किसानों को बेहतर भाव मिलने से लागत निकालने और मुनाफा कमाने में मदद मिलती है। दूसरी ओर, कीमतें बढ़ने पर आम उपभोक्ताओं का घरेलू बजट प्रभावित हो सकता है।फिलहाल अलवर मंडी में प्याज की आवक शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में उत्पादन, आपूर्ति और मांग के आधार पर बाजार का रुख स्पष्ट होगा।
किसानों और उपभोक्ताओं दोनों की नजर कीमतों पर
अलवर की लाल प्याज किसानों की आय और उपभोक्ताओं के घरेलू खर्च, दोनों से जुड़ी है। किसानों के लिए उचित मूल्य मिलना जरूरी है, जबकि उपभोक्ता चाहते हैं कि प्याज सस्ती दरों पर उपलब्ध रहे।दिवाली के बाद मंडी में आवक बढ़ने का अनुमान है। अब देखना होगा कि नई फसल की उपलब्धता से कीमतों में गिरावट आती है या बाजार में मांग और आपूर्ति के कारण भाव ऊंचे बने रहते हैं।