राजस्थान बोर्ड का बड़ा बदलाव: 10वीं-12वीं में AI पढ़ने की तैयारी, 2027-28 से लागू हो सकता है नया सिलेबस
अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 10वीं और 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। नए शैक्षणिक सत्र 2027-28 से कंप्यूटर साइंस और आईटी विषयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत स्कूली विद्यार्थियों को AI, कोडिंग, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस की शुरुआती जानकारी देने की योजना है। बोर्ड के सचिव कैलाश चंद्र शर्मा के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप पाठ्यक्रम में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, AI को अलग विषय, नया अध्याय या अलग प्रश्नपत्र के रूप में शामिल किया जाएगा, इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
राजस्थान बोर्ड के सिलेबस में बदलाव की तैयारी
राजस्थान बोर्ड अब स्कूली शिक्षा में तकनीकी विषयों को अधिक महत्व देने की दिशा में काम कर रहा है। इसी कड़ी में 10वीं और 12वीं के कंप्यूटर से जुड़े विषयों के पाठ्यक्रम में संशोधन की तैयारी की जा रही है।प्रस्ताव के अनुसार, 10वीं के कंप्यूटर साइंस और 12वीं के आईटी व कंप्यूटर साइंस विषयों में AI से जुड़ी पढ़ाई को शामिल किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की बुनियादी समझ स्कूल स्तर पर ही मिल सकेगी।बोर्ड की ओर से पाठ्यक्रम संशोधन के लिए विषय विशेषज्ञों की समितियां और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में नए पाठ्यक्रम के स्वरूप और विषयवस्तु पर काम किया जा रहा है।यदि योजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो नया पाठ्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2027-28 से लागू हो सकता है।
10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को क्या पढ़ाया जा सकता है?
AI को कंप्यूटर और आईटी विषयों में शामिल करने के बाद विद्यार्थियों को तकनीक से जुड़े कई नए विषय पढ़ने का अवसर मिल सकता है।
संभावित पाठ्यक्रम में इन विषयों को जगह मिल सकती है:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: AI क्या है और इसका इस्तेमाल कहां होता है?
- मशीन लर्निंग: कंप्यूटर डेटा से कैसे सीखते हैं?
- कोडिंग: प्रोग्रामिंग की शुरुआती जानकारी।
- डेटा साइंस: डेटा को समझने और उसका विश्लेषण करने की बुनियादी तकनीक।
- AI टूल्स: डिजिटल टूल्स के उपयोग और उनकी सीमाओं की जानकारी।
हालांकि, ये संभावित विषय हैं। राजस्थान बोर्ड के अंतिम पाठ्यक्रम में कौन-कौन से अध्याय शामिल होंगे, इसकी आधिकारिक सूची अभी सामने आना बाकी है।
अभी कंप्यूटर की पढ़ाई में भी होगा बदलाव
मौजूदा कंप्यूटर शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 10वीं के कंप्यूटर विषय में फिलहाल एमएस वर्ड और एक्सेल जैसे सॉफ्टवेयर से संबंधित पढ़ाई शामिल है।AI के शुरुआती कॉन्सेप्ट जोड़ने से विद्यार्थियों को केवल कंप्यूटर चलाने तक सीमित रहने के बजाय तकनीक की कार्यप्रणाली समझने का अवसर मिल सकता है।12वीं के विद्यार्थियों के लिए भी आईटी और कंप्यूटर साइंस विषयों में बदलाव की योजना है। इससे उच्च शिक्षा में कंप्यूटर, इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने वाले छात्रों को आधारभूत जानकारी मिल सकती है।
NEP-2020 के तहत तकनीकी शिक्षा पर जोर
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्कूली शिक्षा को अधिक कौशल आधारित और व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया है। इसी दिशा में कोडिंग, डिजिटल शिक्षा और उभरती तकनीकों की समझ को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) भी AI से जुड़े पाठ्यक्रम और कौशल आधारित विषयों को स्कूल स्तर पर शामिल कर चुका है।राजस्थान बोर्ड भी इसी तरह के बदलावों की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।हालांकि, दूसरे बोर्डों के पाठ्यक्रम की तरह ही राजस्थान में भी विषयों की पढ़ाई के लिए उपयुक्त पाठ्यसामग्री, शिक्षक प्रशिक्षण और संसाधनों की उपलब्धता जरूरी होगी।
सरकारी स्कूलों के लाखों विद्यार्थियों को मिल सकता है फायदा
राजस्थान बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल होते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 10वीं में 12 लाख से अधिक और 12वीं में 8.50 लाख से अधिक परीक्षार्थी रहते हैं।ऐसे में पाठ्यक्रम में AI को शामिल करने से प्रदेश के बड़े छात्र वर्ग तक नई तकनीकी शिक्षा पहुंच सकती है।विशेष रूप से ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सकता है। अभी AI की पढ़ाई के अवसर कई जगह निजी संस्थानों, कोचिंग और अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक सीमित हैं।स्कूली पाठ्यक्रम में इसे शामिल करने से तकनीकी शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
AI की पढ़ाई के लिए कंप्यूटर लैब और प्रशिक्षित शिक्षक जरूरी
पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ स्कूलों में जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती होगी। AI जैसे विषय को केवल किताबी जानकारी तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक तरीके से पढ़ाना उपयोगी हो सकता है।
इसके लिए कई स्तरों पर तैयारी जरूरी होगी।
- स्कूलों में कंप्यूटर लैब की उपलब्धता।
- बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी।
- प्रशिक्षित कंप्यूटर और आईटी शिक्षक।
- विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक प्रोजेक्ट।
- AI के जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग की जानकारी।
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में इन सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा। इससे तकनीकी शिक्षा के अवसरों में असमानता कम करने में मदद मिल सकती है।
क्या 12वीं के बाद मिल सकेंगी AI से जुड़ी नौकरियां?
AI की पढ़ाई शुरू होने से विद्यार्थियों को तकनीकी क्षेत्र की शुरुआती समझ मिल सकती है। इससे भविष्य में उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के रास्ते खुल सकते हैं।हालांकि, केवल 10वीं या 12वीं में AI पढ़ लेने से नौकरी मिलने की गारंटी नहीं होगी। डेटा लेबलिंग, AI ऑपरेशंस और तकनीकी सहायता जैसे क्षेत्रों में अवसरों के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण, व्यावहारिक कौशल और संबंधित योग्यता की जरूरत हो सकती है।इसी तरह, JEE, CUET या विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए AI प्रोजेक्ट या सर्टिफिकेट की उपयोगिता संबंधित संस्थानों के नियमों पर निर्भर करेगी। इसे प्रवेश की निश्चित पात्रता या अतिरिक्त लाभ के रूप में अभी नहीं देखा जाना चाहिए।
बोर्ड सचिव कैलाश चंद्र शर्मा ने क्या कहा?
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव कैलाश चंद्र शर्मा के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बोर्ड कक्षाओं के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि नए पाठ्यक्रम को तैयार करने के लिए विषय विशेषज्ञों की विभिन्न स्तरों पर कार्यशालाएं करवाई जा रही हैं। NEP के अनुरूप AI को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।उनके अनुसार, 10वीं और 12वीं के आईटी तथा कंप्यूटर साइंस विषयों में संशोधन कर शुरुआती स्तर पर AI जोड़ा जा सकता है। इसे अलग विषय के रूप में पढ़ाने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।फिलहाल बोर्ड की तैयारी जारी है। पाठ्यक्रम का अंतिम स्वरूप और लागू होने की आधिकारिक घोषणा सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
2027-28 के नए सत्र पर टिकी नजरें
राजस्थान बोर्ड के प्रस्तावित बदलाव से स्कूली शिक्षा में तकनीकी विषयों को नई दिशा मिल सकती है। AI को शामिल करने से विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीक को समझने और नए कौशल सीखने का अवसर मिल सकता है।लेकिन इस योजना की सफलता पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण और स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करेगी।अब विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों की नजर बोर्ड की आगामी घोषणा पर रहेगी। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो शैक्षणिक सत्र 2027-28 से राजस्थान बोर्ड के छात्रों के लिए AI की पढ़ाई का नया अध्याय शुरू हो सकता है।