RGHS के डिस्चार्ज नियमों में बदलाव, गंभीर मरीजों को पलक झपकाकर सत्यापन से मिलेगी राहत
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत अस्पताल से छुट्टी के समय होने वाले सत्यापन नियमों में बदलाव किया गया है। अब गंभीर मरीज आंखें झपकाकर लाइव सत्यापन नहीं कर पाने पर भी डिस्चार्ज हो सकेंगे। इसके लिए अस्पताल को मरीज की चिकित्सकीय स्थिति और सत्यापन नहीं हो पाने का स्पष्ट कारण दर्ज करना होगा। इससे वास्तविक चिकित्सकीय परिस्थितियों में अस्पतालों के क्लेम अटकने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह छूट सभी मरीजों के लिए नहीं होगी।
पहले डिस्चार्ज के समय जरूरी था लाइव सत्यापन
RGHS के तहत अस्पताल से मरीज को डिस्चार्ज करते समय उसकी लाइव फोटो लेकर आंखें झपकाने के माध्यम से सत्यापन किया जाता था। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपचार प्राप्त करने वाला मरीज वही है, जिसका विवरण योजना के रिकॉर्ड में दर्ज है।सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्पताल के उपचार संबंधी दावे का भुगतान किया जाता है। लेकिन कुछ गंभीर मरीजों के लिए यह प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में अस्पतालों को क्लेम से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता था।
ऑपरेशन और गंभीर बीमारी के मामलों में आती थी परेशानी
ऑपरेशन के बाद बेहोशी की दवा का असर, तेज दर्द, ऑक्सीजन सपोर्ट और चेहरे पर पट्टी जैसी परिस्थितियों में मरीज आंखें झपकाकर सत्यापन नहीं कर पाते। गंभीर हालत में मरीज की शारीरिक स्थिति भी इस प्रक्रिया में बाधा बन सकती है।इन्हीं समस्याओं को देखते हुए नियमों में राहत दी गई है। अब अस्पताल ऐसे मामलों में मरीज की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर सत्यापन नहीं हो पाने का कारण दर्ज कर सकेंगे। इससे गंभीर मरीजों के डिस्चार्ज और अस्पताल के क्लेम की प्रक्रिया में अनावश्यक रुकावट कम करने का प्रयास किया गया है।
अस्पताल को दर्ज करना होगा स्पष्ट चिकित्सकीय कारण
नए निर्देशों के अनुसार, अस्पताल को रिकॉर्ड में बताना होगा कि मरीज किस चिकित्सकीय कारण से आंखें झपकाकर सत्यापन नहीं कर सका। केवल सत्यापन पूरा नहीं होने की जानकारी देना पर्याप्त नहीं होगा।मरीज की स्थिति से संबंधित उचित स्पष्टीकरण उपचार के बिल और क्लेम से जुड़े रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा। इसके आधार पर संबंधित अधिकारी दावे की जांच के समय यह देख सकेंगे कि सत्यापन नहीं हो पाने का कारण वास्तविक और उचित था या नहीं।इस व्यवस्था से अस्पतालों को विशेष परिस्थितियों में राहत मिलेगी। साथ ही, RGHS के तहत क्लेम की जांच और भुगतान की निगरानी भी जारी रहेगी।
सभी मरीजों को नहीं मिलेगी छूट
नियमों में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि अस्पताल सामान्य रूप से सत्यापन प्रक्रिया को छोड़ सकेंगे। यह सुविधा केवल वास्तविक और विशेष चिकित्सकीय परिस्थितियों में लागू होगी।अस्पताल को मरीज की स्थिति के अनुसार उचित कारण दर्ज करना होगा। संबंधित अधिकारी रिकॉर्ड की समीक्षा कर सकेंगे। इससे सत्यापन में छूट का उपयोग केवल जरूरी मामलों में सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
RGHS और अस्पताल संगठनों के बीच चर्चा के बाद फैसला
प्राइवेट हॉस्पिटल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विशेष व्यास के अनुसार, गंभीर मरीज के डिस्चार्ज के समय आंखों की पलक झपकाकर सत्यापन संभव नहीं होने पर उचित चिकित्सकीय स्पष्टीकरण स्वीकार किया जाएगा।बताया गया है कि यह निर्णय RGHS विभाग और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बीच हुई चर्चा के बाद लिया गया। इस बदलाव का उद्देश्य गंभीर मरीजों की उपचार प्रक्रिया को सुगम बनाना और चिकित्सकीय कारणों से अस्पतालों के क्लेम अटकने की समस्या को कम करना है।हालांकि, अस्पतालों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। नए निर्देशों के व्यावहारिक प्रभाव और क्लेम निपटारे में होने वाले बदलावों का आकलन आगे किया जा सकेगा।