बीकानेर जिला परिषद चुनाव: 66 साल में पांचवीं बार महिला बनेगी जिला प्रमुख, इन उम्मीदवारों पर नजर
राजस्थान के बीकानेर जिला परिषद चुनाव में इस बार महिला नेतृत्व की नई कड़ी जुड़ने जा रही है। जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने के कारण किसी भी वर्ग की महिला इस पद पर चुनी जा सकती है। जिला परिषद के करीब 66 साल के इतिहास में अब तक तीन महिला जनप्रतिनिधि चार कार्यकालों में जिला प्रमुख रह चुकी हैं। इस बार पांचवीं बार यह जिम्मेदारी महिला को मिलने का रास्ता साफ है। वहीं, वार्ड 13, 18 और 26 के मुकाबले राजनीतिक रूप से खास चर्चा में हैं।
बीकानेर में पहले भी महिलाएं संभाल चुकी हैं जिला प्रमुख की जिम्मेदारी
बीकानेर जिला परिषद के इतिहास में अब तक कांता खतूरिया, सुनीता तर्ड और सुशीला सींवर जिला प्रमुख रह चुकी हैं। कांता खतूरिया ने दो बार इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी।कांता खतूरिया पहली बार 1980 से 1985 तक जिला प्रमुख रहीं। इसके बाद 1985 से 1987 तक उन्होंने दोबारा यह जिम्मेदारी निभाई। इस तरह वह दो कार्यकाल पूरे करने वाली पहली महिला जिला प्रमुख के रूप में जानी जाती हैं।सुनीता तर्ड ने वर्ष 2000 से 2005 तक जिला प्रमुख के रूप में काम किया। इसके बाद सुशीला सींवर ने 2015 से 2020 तक यह जिम्मेदारी संभाली। अब नए चुनाव के बाद महिला जिला प्रमुख का पांचवां कार्यकाल शुरू होने की संभावना है।
अब तक महिला जिला प्रमुखों के कार्यकाल
| जिला प्रमुख | कार्यकाल |
|---|---|
| कांता खतूरिया | 1980–1985 |
| कांता खतूरिया | 1985–1987 |
| सुनीता तर्ड | 2000–2005 |
| सुशीला सींवर | 2015–2020 |
वार्ड 13: डूडी परिवार की बहू निकिता के सामने भाजपा और RLP की चुनौती
बीकानेर जिला परिषद का वार्ड 13 इस बार प्रमुख मुकाबलों में शामिल है। यहां कांग्रेस ने स्वर्गीय रामेश्वर डूडी की पुत्रवधू निकिता कड़वासरा को टिकट दिया है। भाजपा ने कमला देवी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने संजू को उम्मीदवार बनाया है।नाम वापसी के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार, इस वार्ड में तीन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला तय हुआ है। निकिता की उम्मीदवारी के साथ डूडी परिवार की राजनीतिक विरासत भी चर्चा में है। वहीं, भाजपा और RLP के उम्मीदवार भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।हालांकि, किसी प्रत्याशी को आगे बताने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। मुकाबले की वास्तविक स्थिति मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी।
वार्ड 18: इंदू तर्ड के सामने माया देवी और द्रोपदी देवी
वार्ड 18 में भाजपा ने पूर्व उप जिला प्रमुख इंदू तर्ड को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की ओर से माया देवी और RLP की ओर से द्रोपदी देवी चुनाव मैदान में हैं।इंदू तर्ड के पास पहले स्थानीय निकाय में जिम्मेदारी निभाने का अनुभव है। दूसरी ओर, कांग्रेस और RLP के प्रत्याशी भी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।इस वार्ड में तीनों उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा। परिणाम पर स्थानीय जनाधार, प्रचार और क्षेत्रीय मुद्दों का असर पड़ सकता है। फिलहाल किसी एक प्रत्याशी को बढ़त मिलने का निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आधार उपलब्ध नहीं है।
वार्ड 26: सरिता चौहान की उम्मीदवारी भी चर्चा में
वार्ड 26 में कांग्रेस ने सरिता चौहान को टिकट दिया है। भाजपा की ओर से निर्मला देवी और RLP की ओर से माया उम्मीदवार हैं।सरिता चौहान की उम्मीदवारी पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल के परिवार से जुड़ाव के कारण भी चर्चा में है। हालांकि, चुनाव में पारिवारिक पहचान के साथ स्थानीय मुद्दे, मतदाताओं से संपर्क और उम्मीदवार की अपनी पकड़ भी महत्वपूर्ण हो सकती है।इस वार्ड में तीनों दलों के प्रत्याशी मैदान में हैं। इसलिए मुकाबले का नतीजा केवल किसी एक राजनीतिक परिवार की प्रतिष्ठा से तय मानना उचित नहीं होगा।
जिला प्रमुख की कुर्सी पर किसकी नजर?
बीकानेर जिला परिषद के सभी 41 वार्डों में चुनावी गतिविधियां तेज हैं। जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने से जिला परिषद में चुनी जाने वाली महिला सदस्यों में से ही अगला प्रमुख चुना जाएगा।वार्ड 13, 18 और 26 के उम्मीदवारों पर विशेष चर्चा है, लेकिन जिला प्रमुख बनने की संभावना केवल इन तीन सीटों तक सीमित नहीं है। अंतिम फैसला जिला परिषद में चुने जाने वाले सदस्यों और आगे होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।इस बार महिला जिला प्रमुख बनने की संभावना तय है, लेकिन कौन उम्मीदवार इस पद तक पहुंचेगी, यह चुनाव परिणाम और उसके बाद होने वाली राजनीतिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।
महिला नेतृत्व के लिहाज से अहम चुनाव
बीकानेर जिला परिषद में महिला जिला प्रमुख का पद फिर महिला प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चा में है। पहले कांता खतूरिया, सुनीता तर्ड और सुशीला सींवर इस जिम्मेदारी को संभाल चुकी हैं।अब चुनाव के बाद जिला परिषद को पांचवीं बार महिला नेतृत्व मिलने जा रहा है। नए जिला प्रमुख के सामने ग्रामीण विकास, पेयजल, सड़क, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी।फिलहाल सभी की नजर वार्डवार मतदान, उम्मीदवारों के प्रदर्शन और जिला प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया पर है।