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अलवर जिला प्रमुख की कुर्सी: 25 साल में सिर्फ बलबीर छिल्लर ने बदली पार्टी, बाकी नेताओं की वफादारी रही कायम

अलवर की राजनीति में पिछले 25 वर्षों के दौरान सरकारें बदलीं, लेकिन जिला प्रमुख बनने वाले नेताओं की पार्टी निष्ठा में बदलाव कम ही देखने को मिला। वर्ष 2000 से अब तक जिला प्रमुख रहे नेताओं में बलबीर सिंह छिल्लर ऐसे नेता बताए गए हैं, जिन्होंने पार्टी बदली। वे वर्ष 2021 में कांग्रेस के टिकट पर जिला प्रमुख बने थे और मार्च 2024 में भाजपा में शामिल हो गए। वहीं, किरण यादव, टीकाराम जूली, सफिया खान और रेखा राजू यादव सहित अन्य जिला प्रमुख अपनी-अपनी पार्टी में बने रहे। जिला परिषद को जिले के विकास कार्यों की अहम कड़ी माना जाता है, इसलिए इस पद का राजनीतिक महत्व भी काफी रहा है।

जिला प्रमुख की कुर्सी क्यों है महत्वपूर्ण?

जिला प्रमुख का पद अलवर की ग्रामीण राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है। जिला परिषद के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं, निर्माण कार्यों और अन्य जनहित से जुड़े कामों की निगरानी की जाती है।इसी वजह से जिला प्रमुख की कुर्सी राजनीतिक प्रतिष्ठा के साथ विकास कार्यों की दिशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाती है। पिछले ढाई दशक में अलवर में अलग-अलग दलों के जिला प्रमुख बने, लेकिन उपलब्ध विवरण के अनुसार, बलबीर सिंह छिल्लर को छोड़कर किसी अन्य जिला प्रमुख ने पार्टी नहीं बदली।

वर्ष 2000 में भाजपा की किरण यादव बनीं जिला प्रमुख

वर्ष 2000 में किरण यादव भाजपा के टिकट पर अलवर जिला प्रमुख बनीं। उस समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी। इसके बावजूद किरण यादव भाजपा में बनी रहीं।वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। इस दौरान जिला प्रमुख की कुर्सी पर काबिज नेता की पार्टी निष्ठा में बदलाव नहीं हुआ। यह अलवर की पंचायत राजनीति के उन उदाहरणों में शामिल है, जहां राज्य में सत्ता बदलने के बावजूद जिला प्रमुख अपनी पार्टी के साथ रहे।

टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार में संभाली जिम्मेदारी

वर्ष 2005 में कांग्रेस के टिकट पर टीकाराम जूली अलवर जिला प्रमुख बने। उस समय राजस्थान में भाजपा की सरकार थी। इसके बावजूद जूली कांग्रेस में बने रहे।वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। जूली का कार्यकाल अलवर की राजनीति में उस दौर का उदाहरण है, जब राज्य और जिला स्तर पर अलग-अलग दलों की राजनीतिक स्थिति के बावजूद जिला प्रमुख ने अपनी पार्टी नहीं बदली।

सफिया खान और रेखा राजू यादव भी पार्टी में बनी रहीं

वर्ष 2010 में कांग्रेस के टिकट पर सफिया खान जिला प्रमुख बनीं। उस समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी। वर्ष 2013 में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी उन्होंने कांग्रेस नहीं छोड़ी।इसके बाद वर्ष 2015 में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान कांग्रेस के टिकट पर रेखा राजू यादव जिला प्रमुख बनीं। वर्ष 2018 तक प्रदेश में भाजपा की सरकार रही, लेकिन रेखा राजू यादव कांग्रेस में ही बनी रहीं।इन दोनों उदाहरणों से पता चलता है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बावजूद जिला प्रमुखों की पार्टी निष्ठा में बदलाव नहीं हुआ।

बलबीर सिंह छिल्लर ने मार्च 2024 में बदली पार्टी

वर्ष 2021 में बलबीर सिंह छिल्लर कांग्रेस के टिकट पर अलवर जिला प्रमुख बने। उस समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी।वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद मार्च 2024 में बलबीर सिंह छिल्लर भाजपा में शामिल हो गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में पार्टी बदलने वाले जिला प्रमुख के रूप में उनका नाम सामने आता है।उनके दल परिवर्तन के बाद अलवर की पंचायत राजनीति में पार्टी निष्ठा को लेकर यह तुलना चर्चा का विषय बनी। हालांकि, नेताओं के पार्टी बदलने के व्यक्तिगत और राजनीतिक कारण अलग-अलग हो सकते हैं।

सरकारें बदलीं, लेकिन जिला प्रमुखों की पार्टी निष्ठा रही कायम

वर्ष 2000 से 2024 तक के उपलब्ध विवरण में अलवर के जिला प्रमुखों का राजनीतिक सफर एक खास तस्वीर प्रस्तुत करता है। किरण यादव, टीकाराम जूली, सफिया खान और रेखा राजू यादव ने राज्य में दूसरी पार्टी की सरकार होने के बावजूद अपनी पार्टी नहीं बदली।इसके विपरीत, बलबीर सिंह छिल्लर कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए। इस तरह अलवर की जिला परिषद राजनीति में सत्ता परिवर्तन और नेताओं की पार्टी निष्ठा के बीच एक उल्लेखनीय अंतर दिखाई देता है।जिला प्रमुख का पद ग्रामीण विकास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसलिए इस पद पर रहने वाले नेताओं का राजनीतिक सफर अलवर की पंचायत राजनीति को समझने का एक अहम पहलू है।

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Stv News Rajasthan

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