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‘राहुल गांधी देश में इमरजेंसी लगाना चाहते हैं’, INDIA गठबंधन के मार्च पर निशिकांत दुबे का हमला

INDIA गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च को लेकर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी दादी इंदिरा गांधी की तरह देश में इमरजेंसी लाना चाहते हैं। दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रियाएं मौजूद हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पर भी सवाल उठाए। वहीं, INDIA गठबंधन की ओर से मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट तक मार्च पर निशिकांत दुबे का बयान

नई दिल्ली। INDIA गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च को लेकर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश में अपनी दादी इंदिरा गांधी की तरह इमरजेंसी लगाना चाहते हैं।दुबे ने सोमवार को मार्च पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री को हटाने के लिए चुनाव और अविश्वास प्रस्ताव जैसे रास्ते मौजूद हैं। उनके अनुसार, राजनीतिक विरोध के लिए संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए।उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब चुनावी प्रक्रिया और मताधिकार से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है।

‘इंदिरा गांधी की तरह इमरजेंसी लाना चाहते हैं राहुल’

निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए आपातकाल का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी उसी तरह की व्यवस्था लाना चाहते हैं, जैसी उनकी दादी इंदिरा गांधी के शासनकाल में इमरजेंसी के दौरान देखी गई थी।दुबे ने कहा कि किसी चुने हुए प्रधानमंत्री को पद से हटाने के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्धारित रास्ते हैं। इनमें चुनाव और अविश्वास प्रस्ताव शामिल हैं।उन्होंने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने के बजाय संबंधित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं का सहारा क्यों नहीं लिया जा रहा। हालांकि, इमरजेंसी लगाने की मंशा से जुड़ा बयान दुबे का राजनीतिक आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन पर भी उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च पर निशिकांत दुबे ने कहा कि अदालत में किसी मामले की सुनवाई के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है। उनके मुताबिक, याचिका दायर की जा सकती है और वकील के माध्यम से पक्ष रखा जा सकता है।दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्यायिक मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।दूसरी ओर, INDIA गठबंधन का मार्च चुनावी प्रक्रिया और मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक विरोध के रूप में सामने आया। इस मामले में दोनों पक्षों के बयानों और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को अलग-अलग समझना जरूरी है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की प्रक्रिया का जिक्र

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी निशिकांत दुबे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया निर्धारित है।दुबे ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के जरिए दबाव बनाने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने महाभियोग प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए इसे संवैधानिक व्यवस्था से जोड़कर देखा।हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सामान्य राजनीतिक पदों से अलग है। इसके लिए संविधान और संबंधित कानूनों में निर्धारित प्रावधान लागू होते हैं।

CJI के इस्तीफे की मांग पर भी दुबे ने कसा तंज

निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त के बाद अब राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का इस्तीफा भी मांगा है।अपने पोस्ट में दुबे ने विभिन्न संवैधानिक पदों पर संभावित नियुक्तियों को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य लोगों के नाम लेकर तंज कसा।यह टिप्पणी दुबे की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा थी। उनके बयान में इस्तेमाल किए गए नाम और संभावित नियुक्तियों का जिक्र व्यंग्य के तौर पर किया गया था, न कि किसी वास्तविक नियुक्ति प्रक्रिया की घोषणा के रूप में।

चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस जारी

INDIA गठबंधन के मार्च और निशिकांत दुबे के बयान के बाद चुनावी प्रक्रिया, मताधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस चर्चा में है।एक ओर विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। वहीं, बीजेपी नेता विरोध दर्ज कराने के तरीकों और संवैधानिक प्रक्रियाओं का हवाला दे रहे हैं।इस पूरे घटनाक्रम में अलग-अलग पक्षों के आरोपों और बयानों को उनके संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है। संबंधित मामलों पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध कानूनी तथ्यों को भी ध्यान में रखना होगा।

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Stv News Rajasthan

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