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उदयपुर: धुएं और बदबू से परेशान लोगों ने बंद किया बलीचा डंपिंग यार्ड का गेट, 7 दिन का अल्टीमेटम

उदयपुर के बलीचा डंपिंग यार्ड में कचरा जलने से उठने वाले धुएं और बदबू के विरोध में क्षेत्रवासियों ने रविवार सुबह प्रदर्शन किया। लोगों ने यार्ड का गेट बंद कर कचरा गाड़ियों की आवाजाही रोक दी। प्रदर्शनकारियों ने सांस संबंधी परेशानियों और मृत मवेशियों से फैलने वाली बदबू पर चिंता जताई। उपमहापौर दिनेश भट्ट ने अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया। लोगों ने सात दिन में समस्या दूर नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।

कचरे के धुएं और बदबू के विरोध में प्रदर्शन

उदयपुर के बलीचा स्थित डंपिंग यार्ड में कचरा जलने से आसपास के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। रविवार सुबह करीब 8 बजे क्षेत्रवासियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए यार्ड का गेट बंद कर दिया। इसके चलते कचरा परिवहन करने वाले वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यार्ड में आए दिन कचरा जलाया जाता है। इससे निकलने वाला धुआं आसपास की कॉलोनियों तक पहुंचता है। लोगों ने प्रशासन और नगर निगम से समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की।

सांस की बीमारियों और बदबू से परेशान स्थानीय लोग

क्षेत्रवासियों का कहना है कि डंपिंग यार्ड से उठने वाला धुआं उनके स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि आसपास रहने वाले कई लोगों को सांस संबंधी परेशानियां हो रही हैं। अस्थमा से पीड़ित लोगों को भी धुएं के कारण दिक्कत होने की बात कही गई। इसके अलावा, यार्ड में मृत मवेशी डाले जाने से तेज बदबू फैलने का आरोप लगाया गया। लोगों ने मांग की कि कचरा जलाने पर रोक लगाई जाए और मृत पशुओं के निस्तारण की उचित व्यवस्था हो। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों और कचरा जलाने की जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

उपमहापौर ने दिया अधिकारियों के साथ बैठक का आश्वासन

प्रदर्शन की सूचना मिलने पर नगर निगम के उपमहापौर दिनेश भट्ट और सीआई मांगीलाल डांगी मौके पर पहुंचे। उन्होंने क्षेत्रवासियों से बातचीत कर समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। इस दौरान कचरे में आग लगाने को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। नगर निगम कर्मचारियों का कहना है कि कचरा बीनने वाले लोग आग लगा देते हैं। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निगम के कर्मचारी ही कचरे में आग लगाते हैं। उपमहापौर ने स्थानीय प्रतिनिधिमंडल को सोमवार को नगर निगम बुलाया। वहां आयुक्त, महापौर और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान निकालने की बात कही गई।

1100 फ्लैट तक पहुंचता है धुआं, पहले भी उठ चुका है मामला

स्थानीय निवासी आनंद यादव के अनुसार, डंपिंग यार्ड से करीब 200 मीटर की दूरी पर मुख्यमंत्री आवास योजना के लगभग 1100 फ्लैट हैं। उनका कहना है कि कचरा जलने से इन फ्लैटों में रहने वाले लोगों को परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रवासियों ने वर्ष 2021 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका दायर की थी। उनके मुताबिक, इसके बाद करीब दो साल तक यहां कचरा जलाना बंद रहा, लेकिन बाद में यह समस्या फिर शुरू हो गई। उन्होंने मामले को लेकर हाईकोर्ट में भी कार्रवाई होने और नगर निगम अधिकारियों के शपथ पत्र पर सवाल उठाए जाने का दावा किया। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड से होनी बाकी है।

पहले भी नगर निगम से की जा चुकी हैं शिकायतें

क्षेत्रवासियों के अनुसार, डंपिंग यार्ड में कचरे के बड़े ढेर जमा हैं। कचरे का उचित निस्तारण नहीं होने से बदबू और अन्य परेशानियां बनी रहती हैं। लोगों ने पहले भी नगर निगम को कचरा जलाने और दुर्गंध फैलने की शिकायतें दी हैं। कचरा डालने वाले डंपर भी कई बार कचरे के ढेर में फंस जाते हैं। हाल ही में नगर निगम की जेसीबी खराब होने के कारण पूरे दिन कचरा नहीं डाला जा सका था। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी उपायों से समस्या दूर नहीं होगी। इसके लिए कचरे के निस्तारण की व्यवस्थित व्यवस्था जरूरी है।

सात दिन में समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय पार्षद सोहन गमेती के अनुसार, शनिवार रात डंपिंग यार्ड में किसी ने कचरे में आग लगा दी थी। इससे आसपास के लोगों को परेशानी हुई। सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे थे। रविवार सुबह क्षेत्रवासियों ने गेट बंद किया तो फिर लोगों को समझाने का प्रयास किया गया। उपमहापौर ने सोमवार को अधिकारियों के साथ बैठक कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने बातचीत के लिए सहमति जताई। हालांकि, लोगों ने स्पष्ट किया कि सात दिन के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

डंपिंग यार्ड की समस्या का स्थायी समाधान चुनौती

बलीचा डंपिंग यार्ड को लेकर उठे विरोध ने कचरा निस्तारण और आसपास रहने वाले लोगों की परेशानियों का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि कचरा जलाने की घटनाएं रोकी जाएं और दुर्गंध फैलने की समस्या दूर की जाए। अब नगर निगम की बैठक और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर लोगों की नजर रहेगी। सात दिन की समयसीमा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो विवाद बढ़ सकता है।

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Stv News Rajasthan

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