Rajasthan Farmers Protest: घड़साना में हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में किसानों का हाईवे पर पड़ाव, पानी और खाद को लेकर क्यों बढ़ा आंदोलन?
श्रीगंगानगर। राजस्थान के श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ क्षेत्र में सिंचाई पानी और डीएपी खाद की कमी को लेकर चल रहा किसान आंदोलन तेज हो गया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में किसानों ने शनिवार रात श्रीगंगानगर की ओर कूच किया। इस दौरान 12 एमडी टोल नाके के पास पुलिस बैरिकेडिंग हटाकर किसान आगे बढ़े और पतरोड़ा के पास नेशनल हाईवे-911 पर पड़ाव डाल दिया। रविवार सुबह तक किसान हाईवे पर डटे रहे। आंदोलन के 32वें दिन भी किसानों की मुख्य मांग सिंचाई पानी की स्थायी व्यवस्था, फसल खराबे का मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई रही। प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत की तैयारी भी की गई।
घड़साना की किसान सभा के बाद श्रीगंगानगर कूच
घड़साना और अनूपगढ़ शाखा क्षेत्र में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसान कई सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान पहले उपखंड कार्यालय के बाहर धरना देकर अपनी मांगें उठा रहे थे। शनिवार शाम घड़साना की नई धानमंडी में बड़ी किसान सभा आयोजित हुई, जिसमें हनुमान बेनीवाल भी शामिल हुए।सभा के दौरान प्रशासन को दिया गया अल्टीमेटम पूरा होने के बाद रात करीब 10 बजे किसानों ने श्रीगंगानगर की ओर कूच किया। बेनीवाल ने किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही। इसके बाद प्रशासन ने काफिले को रोकने के लिए 12 एमडी टोल नाके के पास बैरिकेडिंग की।
ट्रैक्टरों से बैरिकेडिंग हटाई, NH-911 पर जाम
किसानों के काफिले को रोकने के लिए टोल नाके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि, आंदोलन के दौरान किसानों ने ट्रैक्टरों की मदद से बैरिकेडिंग हटा दी। इसके बाद टोल नाके के आसपास तनावपूर्ण स्थिति बन गई।देर रात किसान पतरोड़ा के पेट्रोल पंप के पास नेशनल हाईवे-911 पर बैठ गए। इससे सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और वाहनों की कतारें लग गईं। रिपोर्ट के अनुसार, हनुमान बेनीवाल रविवार सुबह करीब 4 बजे तक किसानों के साथ धरनास्थल पर मौजूद रहे।
सिंचाई पानी की स्थायी व्यवस्था की मांग
किसानों का कहना है कि पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसलों की बुवाई और सिंचाई प्रभावित हो रही है। उनकी प्रमुख मांग अनूपगढ़ शाखा में छह महीने का स्थायी सिंचाई रेगुलेशन लागू करने की है।किसान चाहते हैं कि पानी के वितरण की व्यवस्था स्पष्ट और नियमित हो। उनका कहना है कि चार समूहों में से दो समूहों को पर्याप्त सिंचाई पानी मिलना चाहिए, ताकि किसान समय पर फसलों की बिजाई कर सकें। यह मांग क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे पानी के विवाद का प्रमुख हिस्सा है।
डीएपी खाद की किल्लत ने बढ़ाई परेशानी
सिंचाई पानी के साथ रबी सीजन की बुवाई के लिए डीएपी खाद की उपलब्धता भी किसानों की चिंता का विषय है। किसानों को आशंका है कि पानी और खाद की कमी से समय पर बुवाई करना मुश्किल हो सकता है।श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ के कृषि क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था का फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में किसान पानी के वितरण के साथ खाद की उपलब्धता से जुड़े मुद्दों पर भी समाधान चाहते हैं। हनुमान बेनीवाल ने भी खाद की किल्लत को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
अधिकारियों पर कार्रवाई और फसल मुआवजे की मांग
किसानों की मांगें केवल पानी और खाद तक सीमित नहीं हैं। वे सिंचाई विभाग के उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं, जिन पर पानी की आपूर्ति में लापरवाही बरतने का आरोप है।इसके अलावा पानी की कमी और सूखे से प्रभावित फसलों की विशेष गिरदावरी कराने की मांग भी उठाई गई है। किसानों का कहना है कि नुकसान का आकलन कर पात्र किसानों को उचित मुआवजा और बीमा क्लेम दिलाया जाना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि सरकार केवल मौखिक आश्वासन देने के बजाय लिखित समझौता करे।
550 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात
आंदोलन के उग्र होने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, घड़साना क्षेत्र में तीन बटालियन और 550 से अधिक पुलिस व आरएसी जवान तैनात किए गए।रिपोर्ट में घड़साना, रावला, खाजूवाला और मंडी 365 हेड के बाजार बंद रहने की भी जानकारी दी गई है। हाईवे पर पड़ाव के कारण यातायात प्रभावित हुआ। ऐसे में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ यातायात बहाल कराने की चुनौती भी है।
प्रशासन से बातचीत पर टिकी नजर
रविवार सुबह प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत प्रस्तावित थी। NDTV राजस्थान की रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलनकारियों ने कहा कि मांगों पर समाधान नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा। RLP कार्यकर्ताओं ने वार्ता विफल रहने की स्थिति में प्रदेशभर में चक्का जाम और टोल नाकों को रोकने की चेतावनी भी दी।फिलहाल आंदोलन का अगला रुख प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के नतीजे पर निर्भर करेगा। किसानों की मांग है कि सिंचाई पानी, खाद, फसल मुआवजे और अधिकारियों की जवाबदेही पर ठोस लिखित निर्णय लिया जाए। वहीं, प्रशासन के सामने बातचीत के जरिए स्थिति सामान्य करने और सड़क यातायात बहाल कराने की चुनौती है।