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Festive Sale में महंगा सामान कैसे खरीदें? Full Payment, Credit Card EMI या No-Cost EMI, जानें किसमें होगी बचत

नई दिल्ली। Festive Sale में स्मार्टफोन, लैपटॉप, टीवी और दूसरे महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान पर आकर्षक डिस्काउंट मिलते हैं। इसके साथ बैंक ऑफर, कैशबैक और EMI की सुविधा भी दी जाती है। ऐसे में सिर्फ डिस्काउंट देखकर खरीदारी करना हमेशा फायदेमंद नहीं होता। असली बचत जानने के लिए यह देखना जरूरी है कि सामान की अंतिम कीमत कितनी पड़ेगी। Full Payment, Credit Card EMI और No-Cost EMI में से सही विकल्प चुनने से पहले ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, GST और मिलने वाली छूट की तुलना करनी चाहिए।

Full Payment: एक साथ भुगतान करना कब फायदेमंद?

अगर आपके पास पर्याप्त बचत है और पूरा भुगतान करने से इमरजेंसी फंड या दूसरे जरूरी खर्च प्रभावित नहीं होते, तो Full Payment एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें EMI की किस्तों और ब्याज की चिंता नहीं रहती।कई बार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या बैंक पूरे भुगतान पर अतिरिक्त डिस्काउंट भी देते हैं। ऐसे में खरीदारी की कुल लागत कम हो सकती है। हालांकि, फुल पेमेंट करने से पहले यह जरूर देखें कि कोई खास बैंक ऑफर या EMI डिस्काउंट दूसरे विकल्प में ज्यादा बचत तो नहीं दे रहा।

ध्यान रखें: महंगा सामान खरीदने के लिए अपनी जरूरी बचत पूरी तरह खर्च करना समझदारी नहीं है। खरीदारी के बाद भी इमरजेंसी जरूरतों के लिए पर्याप्त रकम बची रहनी चाहिए।

Credit Card EMI: कम किस्त के साथ ब्याज का हिसाब जरूरी

Credit Card EMI में सामान की कीमत को तय अवधि की किस्तों में चुकाया जाता है। इससे एक साथ बड़ी रकम खर्च करने का दबाव कम हो सकता है। लेकिन सामान्य EMI में ब्याज और प्रोसेसिंग फीस लग सकती है।लंबी अवधि चुनने पर मासिक किस्त कम दिखाई देती है, लेकिन कुल ब्याज बढ़ सकता है। इसके अलावा प्रोसेसिंग फीस और उस पर लागू GST भी अंतिम खर्च में जुड़ सकते हैं।कुछ बैंक Festive Sale के दौरान विशेष EMI ऑफर या अतिरिक्त डिस्काउंट देते हैं। अगर इन ऑफर्स से मिलने वाली बचत ब्याज और अन्य शुल्क से ज्यादा है, तो सामान्य EMI भी फायदेमंद हो सकती है। इसलिए केवल मासिक किस्त देखकर फैसला न करें।

No-Cost EMI: क्या सच में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होता?

No-Cost EMI में ग्राहक को सामान की कीमत किस्तों में चुकाने की सुविधा मिलती है। इसे अक्सर बिना ब्याज वाली EMI के रूप में प्रचारित किया जाता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थिति में खरीदारी पूरी तरह अतिरिक्त शुल्क से मुक्त होगी।कुछ ऑफर्स में ब्याज के बराबर छूट कीमत से घटाई जाती है। कुछ मामलों में बैंक का ब्याज विक्रेता या ब्रांड की ओर से वहन किया जाता है। फिर भी प्रोसेसिंग फीस, GST या दूसरे लागू शुल्क हो सकते हैं।

इसलिए No-Cost EMI चुनने से पहले ये बातें जांचें:

  • कुल EMI और सभी किस्तों का जोड़ कितना है?
  • क्या प्रोसेसिंग फीस देनी होगी?
  • क्या फीस पर GST लगेगा?
  • क्या EMI लेने पर कैशबैक या दूसरे बैंक ऑफर का लाभ छूट जाएगा?
  • क्या पूरा भुगतान करने पर इससे कम कीमत मिल सकती है?

इन सभी बातों की तुलना करने के बाद ही पता चलेगा कि No-Cost EMI वास्तव में आपके लिए सस्ती है या नहीं।

सामान्य EMI कब महंगी पड़ सकती है?

सामान्य EMI में ग्राहक को सामान की कीमत के साथ ब्याज और लागू शुल्क भी चुकाने पड़ सकते हैं। अगर EMI की अवधि लंबी है, तो कुल ब्याज बढ़ सकता है।उदाहरण के लिए, किसी फोन की कीमत 60,000 रुपये है। यदि सामान्य EMI पर ब्याज और फीस मिलाकर अतिरिक्त खर्च जुड़ता है, तो ग्राहक को 60,000 रुपये से ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है। वहीं No-Cost EMI में भी प्रोसेसिंग फीस या दूसरे शुल्क लगने पर कुल खर्च बढ़ सकता है।हालांकि, कुछ बैंक ऑफर्स में सामान्य EMI पर मिलने वाला अतिरिक्त डिस्काउंट उसके ब्याज से ज्यादा हो सकता है। ऐसे में वह No-Cost EMI से भी सस्ती पड़ सकती है। सही विकल्प जानने के लिए अंतिम बिल की तुलना जरूरी है।

EMI से क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है?

Credit Card EMI और No-Cost EMI, दोनों में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल होने पर उपलब्ध क्रेडिट लिमिट का बड़ा हिस्सा खर्च हो सकता है। इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन बढ़ सकता है, जिसका क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ने की संभावना रहती है।उदाहरण के लिए, यदि आपके क्रेडिट कार्ड की लिमिट 2 लाख रुपये है और आप 1.65 लाख रुपये का फोन खरीदते हैं, तो कार्ड की लिमिट का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल हो जाएगा। इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन काफी बढ़ सकता है।किस्तों का समय पर भुगतान करना भी जरूरी है। भुगतान में देरी होने पर ब्याज, लेट फीस और क्रेडिट रिपोर्ट पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ No-Cost EMI होने से क्रेडिट स्कोर बेहतर नहीं हो जाता।

Festive Sale में बचत करने के 7 तरीके

  1. अलग-अलग वेबसाइट पर कीमत जांचें: एक ही प्रोडक्ट की कीमत अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अलग हो सकती है।
  2. बैंक ऑफर की शर्तें पढ़ें: डिस्काउंट की अधिकतम सीमा और पात्र कार्ड की जानकारी जरूर देखें।
  3. कैशबैक का हिसाब लगाएं: इंस्टेंट डिस्काउंट और बाद में मिलने वाले कैशबैक में अंतर समझें।
  4. एक्सचेंज ऑफर की तुलना करें: पुराने फोन की एक्सचेंज वैल्यू को सीधे बेचने पर मिलने वाली कीमत से भी तुलना करें।
  5. EMI के सभी शुल्क जोड़ें: ब्याज, प्रोसेसिंग फीस और GST को अंतिम लागत में शामिल करें।
  6. पुरानी कीमत भी देखें: केवल बड़े डिस्काउंट के दावे पर भरोसा न करें। हाल की कीमतों की तुलना करें।
  7. बजट से बाहर खरीदारी न करें: सीमित समय का ऑफर जरूरी नहीं कि अच्छी डील हो। वही सामान खरीदें जिसकी वास्तव में जरूरत है।

सबसे सस्ता विकल्प कौन-सा है?

Full Payment, Credit Card EMI और No-Cost EMI में कोई एक विकल्प हर खरीदारी के लिए सबसे सस्ता नहीं होता। यह प्रोडक्ट की कीमत, बैंक ऑफर, ब्याज, प्रोसेसिंग फीस, कैशबैक और भुगतान की शर्तों पर निर्भर करता है।अगर फुल पेमेंट पर अच्छी छूट मिल रही है और आपकी बचत सुरक्षित रहती है, तो यह बेहतर विकल्प हो सकता है। यदि एक साथ रकम चुकाना मुश्किल है, तो No-Cost EMI उपयोगी हो सकती है। वहीं सामान्य EMI तभी चुनें, जब उसकी कुल लागत और भुगतान की शर्तें आपके बजट के अनुकूल हों।

आखिरी फैसला करने से पहले तीनों विकल्पों में कुल भुगतान की तुलना करें। केवल कम मासिक किस्त या बड़े डिस्काउंट के बजाय अंतिम कीमत और अपनी आर्थिक स्थिति को प्राथमिकता दें।

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