टहला के खोह-दरीबा गांव में बंदरों का आतंक, ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा; 50 बंदर पकड़े
अलवर जिले के टहला क्षेत्र के खोह-दरीबा गांव में बंदरों के बढ़ते आतंक से ग्रामीण परेशान हैं। बंदरों के झुंड लगातार गांव में पहुंच रहे थे। घरों में घुसकर सामान और खाद्य सामग्री उठाने की शिकायतें सामने आईं। बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीण चिंतित थे। लंबे समय से समस्या बनी रहने के बाद ग्रामीणों ने अब खुद पहल की। ग्राम पंचायत स्तर पर बंदर पकड़ने का अभियान शुरू कराया गया। शुक्रवार को अभियान के दौरान करीब 50 बंदरों को पकड़ा गया। इसके बाद उन्हें गांव से दूर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा गया। ग्रामीणों का कहना है कि अभी और बंदरों को पकड़ने का अभियान जारी रहेगा।
घरों में घुसकर सामान उठा ले जाते थे बंदर
ग्रामीणों के अनुसार खोह-दरीबा गांव में पिछले काफी समय से बंदरों की संख्या बढ़ रही थी। बंदरों के झुंड दिनभर गांव में घूमते रहते थे। कई बार वे सीधे लोगों के घरों में घुस जाते थे। घर में रखी खाद्य सामग्री को उठाकर ले जाने की शिकायतें भी सामने आईं। इसके अलावा बंदरों द्वारा घरेलू सामान को नुकसान पहुंचाने की बात भी ग्रामीणों ने कही।बंदरों के लगातार बढ़ते उत्पात से लोगों के लिए रोजमर्रा का जीवन प्रभावित होने लगा था। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल घरों तक सीमित नहीं थी। सार्वजनिक स्थानों और गलियों में भी बंदरों के झुंड नजर आने लगे थे।
बच्चों को लेकर बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने बंदरों के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि कई बार बंदरों के बच्चों पर हमला करने और काटने की घटनाएं सामने आईं। बंदरों के झुंड को देखकर लोग बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी बचने लगे।ग्रामीणों के मुताबिक, घरों से बाहर निकलने में भी कई लोगों को परेशानी होती थी। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को बंदरों के झुंड से बचकर निकलना पड़ता था। लगातार बनी इस समस्या के कारण गांव में लोगों की चिंता बढ़ती जा रही थी।
ग्रामीणों ने खुद शुरू कराया बंदर पकड़ने का अभियान
बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने अब अपने स्तर पर कार्रवाई करने का फैसला किया। ग्रामीणों ने बंदर पकड़ने वाले दल को काम सौंपा। इसके बाद गांव में बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।दल की ओर से अलग-अलग स्थानों पर पिंजरे लगाए गए। इसके अलावा जाल की मदद से भी बंदरों को पकड़ा गया। पकड़े गए बंदरों को सुरक्षित तरीके से पिंजरों में रखा गया। इसके बाद उन्हें गांव की आबादी से दूर ले जाकर छोड़ा गया।
एक दिन में करीब 50 बंदर पकड़े
शुक्रवार को चलाए गए अभियान में करीब 50 बंदरों को पकड़ा गया। बड़ी संख्या में बंदरों के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों का कहना है कि इससे गांव में बंदरों के उत्पात में कमी आने की उम्मीद है।हालांकि ग्रामीणों के मुताबिक गांव में अभी भी बड़ी संख्या में बंदर मौजूद हैं। ऐसे में केवल एक दिन की कार्रवाई से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसी वजह से बंदर पकड़ने का अभियान आगे भी जारी रखने की बात कही गई है।
प्रशासन से शिकायत के बाद ग्रामीणों ने उठाया कदम
ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की समस्या को लेकर पहले भी जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई थी। ग्रामीणों ने कई बार बंदरों को पकड़ने और समस्या से निजात दिलाने की मांग की। लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद ग्रामीणों ने आपसी स्तर पर अभियान शुरू कराने का निर्णय लिया।ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से भी स्थायी समाधान के लिए सहयोग मिलता है तो समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल ग्रामीण अपने स्तर पर अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
बाकी बंदरों को पकड़ने का अभियान जारी रहेगा
खोह-दरीबा गांव में बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है। ग्रामीणों के अनुसार बाकी बंदरों को पकड़ने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य गांव में बंदरों की संख्या और उनके उत्पात को नियंत्रित करना है।ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि अभियान पूरा होने के बाद लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही बच्चों और बुजुर्गों को भी घर से बाहर निकलने में पहले की तुलना में कम परेशानी होगी।