#राज्य-शहर

RPSC में बाबूलाल कटारा की बर्खास्तगी साढ़े तीन साल से अटकी, 14 अक्टूबर को खत्म होगा कार्यकाल

राजस्थान लोक सेवा आयोग यानी RPSC के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा की बर्खास्तगी का मामला लंबे समय से लंबित है। पेपर लीक मामले में गिरफ्तारी के बाद से वह निलंबित हैं। इसके बावजूद अब तक उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। कटारा का कार्यकाल 14 अक्टूबर को समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में उनके कार्यकाल खत्म होने के बाद आयोग में सदस्यों के चार पद खाली हो जाएंगे। इससे आयोग के कामकाज और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठ रहे हैं।

पेपर लीक मामले में हुई थी गिरफ्तारी

बाबूलाल कटारा का नाम वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक प्रकरण में सामने आया था। एसओजी ने 18 अप्रैल 2023 को उन्हें गिरफ्तार किया था। उनके साथ आयोग के तत्कालीन ड्राइवर गोपाल सिंह और विजय कटारा को भी गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद कटारा को निलंबित कर दिया गया।पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने जनवरी 2024 में उनके निलंबन से जुड़ी कार्रवाई की थी। जांच आगे बढ़ने पर उनका नाम सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा-2021 के पेपर लीक मामले से भी जोड़ा गया।

संपत्ति को लेकर भी जांच

मामले की जांच के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने बाबूलाल कटारा की संपत्तियों का विवरण भी जुटाया था। जांच में उनकी घोषित आय और संपत्तियों के बीच अंतर की बात सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार उनकी संपत्ति निर्धारित आय से करीब 60 प्रतिशत अधिक पाई गई। हालांकि संपत्ति से जुड़े आरोपों पर अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

कैसे होती है आयोग सदस्य की बर्खास्तगी

लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 317 में निर्धारित है। इसके तहत गंभीर परिस्थितियों में अध्यक्ष या सदस्य को हटाने के लिए विशेष संवैधानिक प्रक्रिया अपनाई जाती है।किसी सदस्य को हटाने के मामले में राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट को जांच के लिए संदर्भ भेजा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्ट के आधार पर आगे की संवैधानिक कार्रवाई होती है। इसी प्रक्रिया के कारण आयोग के किसी सदस्य को केवल प्रशासनिक आदेश से तत्काल बर्खास्त नहीं किया जा सकता।

कटारा के बाद चार पद होंगे खाली

RPSC में जून से स्थायी अध्यक्ष का पद भी खाली है। फिलहाल सदस्य लेफ्टिनेंट कर्नल केसरीसिंह के पास कार्यवाहक अध्यक्ष का दायित्व है। आयोग में उनके अलावा प्रो. अयूब खान, हेमंत प्रियदर्शी, प्रो. दीपक शर्मा, प्रो. सुशील बिस्सू और प्रो. संतोष आनंद सदस्य हैं।कटारा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद आयोग में चार सदस्य पद रिक्त हो जाएंगे। इससे आयोग के सामने रिक्त पदों को भरने की जरूरत और बढ़ जाएगी।

आयोग में अध्यक्ष समेत 10 सदस्य का प्रावधान

राजस्थान लोक सेवा आयोग की संरचना में एक स्थायी अध्यक्ष और 10 सदस्यों का प्रावधान है। इसके अलावा आयोग के कामकाज में सचिव, मुख्य परीक्षा नियंत्रक, संयुक्त सचिव और विधि परामर्शी जैसे महत्वपूर्ण पद भी होते हैं।

77 साल में सात महिलाएं ही सदस्य बनीं

राजस्थान लोक सेवा आयोग के गठन के करीब 77 साल के इतिहास में अब तक केवल सात महिलाएं सदस्य पद तक पहुंची हैं। इनमें कांता कथूरिया, कमला भील, डॉ. प्रकाशवती शर्मा, दिव्या सिंह, राजकुमारी गुर्जर, डॉ. मंजु शर्मा और डॉ. संगीता आर्य के नाम शामिल हैं।वर्तमान फुल कमीशन में कोई महिला सदस्य नहीं है। मौजूदा व्यवस्था में सभी सदस्य पुरुष हैं। ऐसे में आयोग में महिला प्रतिनिधित्व भी चर्चा का एक विषय बना हुआ है।

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *