सिरोही के पिंडवाड़ा में भूजल प्रदूषण का आरोप, केमिकल फैक्ट्रियों पर उठे सवाल
सिरोही जिले के पिंडवाड़ा तहसील क्षेत्र में भूजल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। भुजेला गांव में नायरा पेट्रोल पंप के आसपास पानी मटमैला होने का दावा किया गया है। स्थानीय लोगों ने इसके लिए आसपास संचालित केमिकल फैक्ट्रियों को जिम्मेदार बताया है। हालांकि, प्रदूषण के वास्तविक कारण की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसकी पुष्टि पानी और भूजल के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। पिंडवाड़ा उपखंड प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
बोरिंग और कुओं के पानी पर उठे सवाल
भुजेला क्षेत्र में पड़ताल के दौरान बोरिंग से निकलता पानी मटमैला दिखाई दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के कुओं और बोरिंग के पानी की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के कारण भूजल प्रभावित हो सकता है।हालांकि, केवल पानी का रंग देखकर उसके प्रदूषित होने की पुष्टि नहीं की जा सकती। पानी में मौजूद रासायनिक तत्वों का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला जांच जरूरी है।
किसानों और होटल कारोबारियों की बढ़ी चिंता
भुजेला क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास स्थित है। यहां होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां भी संचालित होती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पानी की गुणवत्ता को लेकर किसानों और होटल संचालकों में चिंता है।वहीं पशुपालक परिवार भी मवेशियों के लिए पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि भूजल प्रदूषण की पुष्टि होती है, तो इसका असर खेती और दैनिक जरूरतों पर पड़ सकता है।
पेट्रोल पंप संचालक ने लगाए गंभीर आरोप
नायरा पेट्रोल पंप संचालक चिमनलाल जणवा ने आसपास की एक केमिकल फैक्ट्री को लेकर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फैक्ट्री से निकलने वाले रासायनिक अवशेष जमीन में पहुंच रहे हैं।उनके मुताबिक इससे आसपास के भूजल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि पेट्रोल पंप के अलावा आसपास के होटल भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वैज्ञानिक जांच से सामने आएगी असली वजह
भूजल प्रदूषण के आरोपों के बीच पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराना महत्वपूर्ण होगा। संबंधित विभाग पानी में रासायनिक तत्वों और अन्य प्रदूषकों की मौजूदगी की जांच कर सकते हैं।यदि जांच में किसी औद्योगिक इकाई से प्रदूषण की पुष्टि होती है, तो उसके स्रोत और जिम्मेदारी का भी निर्धारण किया जा सकेगा। इसके बाद संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।
प्रशासन ने जांच का दिया भरोसा
मामले को लेकर पिंडवाड़ा उपखंड अधिकारी नरेंद्र जांगिड़ ने जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि भुजेला क्षेत्र में पानी प्रदूषण से जुड़े पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी।प्रशासन के अनुसार जांच में यदि किसी व्यक्ति या उद्योग की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब स्थानीय लोगों की नजर जांच और पानी के नमूनों की रिपोर्ट पर है।