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एशियन गेम्स 2026: नितेश सिवाच ने जीता सिल्वर मेडल, ग्रीको-रोमन कुश्ती में रचा इतिहास

एशियन गेम्स 2026 में भारत को ग्रीको-रोमन कुश्ती में रजत पदक मिला है। पुरुषों के 97 किलोग्राम वर्ग में नितेश सिवाच ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। फाइनल में उनका सामना जापान के यूरी नकाजातो से हुआ। कड़े मुकाबले में नितेश को 0-4 से हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही जापानी पहलवान ने गोल्ड मेडल जीता। नितेश का यह सफर भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती के लिए खास रहा। वह एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले भारत के दूसरे ग्रीको-रोमन पहलवान बने हैं।

फाइनल में जापानी पहलवान से मुकाबला

नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में खेले गए फाइनल में नितेश और यूरी नकाजातो आमने-सामने थे। मुकाबले की शुरुआत से जापानी पहलवान ने दबाव बनाए रखा। पहले दौर में निष्क्रियता के कारण नितेश को पेनल्टी मिली। इसका फायदा नकाजातो को मिला और उन्होंने दो अंक हासिल किए।ब्रेक तक जापानी पहलवान 2-0 से आगे थे। दूसरे हिस्से में नितेश को वापसी के लिए तेजी से अंक हासिल करने थे। लेकिन नकाजातो ने मुकाबले की गति पर नियंत्रण बनाए रखा। उन्होंने नितेश को लगातार दबाव में रखा।

नकाजातो ने बनाई चार अंकों की बढ़त

मुकाबले के दूसरे हिस्से में जापानी पहलवान ने अपनी बढ़त बढ़ा दी। नकाजातो ने स्कोर 4-0 कर दिया। उन्होंने नितेश को जमीन पर गिराकर चित करने की कोशिश भी की। हालांकि भारतीय पहलवान ने हार नहीं मानी।नितेश ने आखिरी समय तक मुकाबले में वापसी की कोशिश की। लेकिन जापानी पहलवान ने उन्हें अंक हासिल करने का मौका नहीं दिया। अंत में नकाजातो ने 4-0 से मुकाबला जीतकर गोल्ड मेडल हासिल किया।

क्वार्टर फाइनल में शानदार जीत

नितेश का एशियन गेम्स अभियान शानदार रहा। फाइनल से पहले उन्होंने लगातार दो मुकाबलों में दमदार प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में उनका सामना तुर्कमेनिस्तान के अमनबेर्दी अगामम्मेदोव से हुआ।नितेश ने इस मुकाबले में 7-1 के अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने सेमीफाइनल में मंगोलिया के गनबातारिन गनखुयाग को चुनौती दी। यहां भी नितेश ने आक्रामक खेल दिखाया और 9-0 से मुकाबला अपने नाम किया।

1962 के बाद भारत को मिला बड़ा मौका

नितेश का सिल्वर मेडल भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती के लिए अहम उपलब्धि है। वह एशियाई खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले भारत के दूसरे ग्रीको-रोमन पहलवान बने हैं।उनसे पहले 1962 के एशियाई खेलों में मारुति माने ने इसी 97 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। इस तरह नितेश ने करीब छह दशक बाद इस वर्ग में भारत के लिए एशियाई खेलों का रजत पदक हासिल किया है।

गोल्ड से चूके, लेकिन इतिहास रचा

नितेश सिवाच फाइनल में गोल्ड मेडल हासिल नहीं कर सके। हालांकि उनका प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिए महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में बड़ी जीत दर्ज करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया।एशियन गेम्स 2026 में उनका सिल्वर मेडल भारत के पदक अभियान में एक और उपलब्धि के रूप में जुड़ा है।

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