अजमेर में सुनीता रावत की मौत पर बवाल, पति की गिरफ्तारी की मांग पर सात घंटे धरना
अजमेर के जेएलएन अस्पताल में उपचार के दौरान ब्यावर की विवाहिता सुनीता रावत की मौत हो गई। मौत के बाद पीहर पक्ष ने पति पर प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाया। परिजनों ने पति की गिरफ्तारी होने तक शव लेने से इनकार कर दिया। बुधवार को जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी के बाहर करीब सात घंटे तक धरना चला। पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए। मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस ने मामले में दहेज प्रताड़ना के साथ गैरइरादतन हत्या की धारा भी जोड़ी है।
उपचार के दौरान हुई सुनीता की मौत
पुलिस के अनुसार नूंद्री मेन्द्रातान निवासी सुनीता रावत की तबीयत बिगड़ने के बाद 26 सितंबर की रात उसे अस्पताल ले जाया गया था। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत को देखते हुए अजमेर के जेएलएन अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने के बाद पुलिस ने भी मामले की जानकारी जुटाई। हालांकि उस समय सुनीता बयान देने की स्थिति में नहीं थी। 28 सितंबर की शाम उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पति की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े परिजन
सुनीता की मौत की जानकारी मिलने के बाद पीहर पक्ष के लोग जेएलएन अस्पताल पहुंचे। परिजनों ने पति पर मारपीट और प्रताड़ना के आरोप लगाए। उनका कहना था कि मामले में पहले पति को गिरफ्तार किया जाए। इसके बाद ही वे शव लेने पर सहमत होंगे। इसी मांग को लेकर परिजन मोर्चरी के बाहर बैठ गए। करीब सात घंटे तक पुलिस और परिवार के बीच बातचीत चलती रही।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
सुनीता के भाई भगवान सिंह की शिकायत पर 27 सितंबर को पुलिस ने दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया था। मौत के बाद पुलिस ने प्रकरण में गैरइरादतन हत्या की धारा भी शामिल की है। मामले की जांच ब्यावर सीओ के स्तर पर की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मृतका के परिजन लालसिंह ने आरोप लगाया कि सुनीता के सिर और हाथ पर चोट के निशान थे। उनका कहना है कि ससुराल घर से करीब तीन किलोमीटर दूर था। इसके बावजूद उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई। परिवार के अनुसार सुनीता की तबीयत खराब होने की जानकारी पहले उसके जेठ ने भाई भगवान सिंह को दी। जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तब तक उसे अजमेर रेफर किया जा चुका था। परिवार ने मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है।
डाकघर में नौकरी करती थी सुनीता
सुनीता के पिता सेन्दड़ा, मोतीनगर निवासी सेवानिवृत्त सैनिक लालसिंह रावत ने बताया कि वह चार भाई-बहनों में मंझली थी। सुनीता सेन्दड़ा डाकघर में जेडीएस पद पर कार्यरत थी। इसके साथ ही वह आरएएस परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उसने आरएएस प्री परीक्षा पास की थी। इसके बाद उसने मुख्य परीक्षा भी दी थी। वर्ष 2023 में उसकी शादी हरिसिंह रावत से हुई थी।
पति पर लगाए गए नशे और बेरोजगारी के आरोप
पीहर पक्ष का आरोप है कि सुनीता का पति बेरोजगार था और नशे का आदी था। परिवार के अनुसार करीब डेढ़ साल से सुनीता को परेशान किया जा रहा था। करीब दो महीने पहले विवाद के बाद वह पीहर आ गई थी। परिजनों के मुताबिक बाद में ससुराल पक्ष ने माफी मांगी। इसके करीब 15 दिन पहले सुनीता को वापस ससुराल भेजा गया था। अब उसकी मौत के बाद परिवार ने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।