Alwar: सिलीसेढ़ झील में मरी मछलियों से बदबू, 27 फीट पानी के बावजूद पर्यटन पर असर
अलवर की प्रसिद्ध सिलीसेढ़ झील में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने का मामला सामने आया है। इन दिनों झील में करीब 27 फीट पानी बताया जा रहा है। इसके बावजूद पानी की सतह पर मरी हुई मछलियां तैरती दिखाई दे रही हैं। झील के आसपास तेज दुर्गंध भी महसूस हो रही है। इससे स्थानीय लोगों और यहां आने वाले पर्यटकों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि समय रहते पानी की गुणवत्ता की जांच नहीं हुई तो इसका असर पर्यटन के साथ जलीय जीवन पर भी पड़ सकता है।
झील की सतह पर तैरती दिखीं मरी मछलियां
सिलीसेढ़ झील में इन दिनों पानी का स्तर करीब 27 फीट बताया जा रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मछलियों की मौत ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।झील की पानी की सतह पर कई जगह मरी हुई मछलियां तैरती नजर आ रही हैं। इससे झील के आसपास आने वाले लोगों को परेशानी हो रही है।मछलियों की मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए पानी की वैज्ञानिक जांच जरूरी मानी जा रही है।
तेज दुर्गंध से झील किनारे रुकना मुश्किल
मरी हुई मछलियों के कारण झील के आसपास तेज दुर्गंध फैलने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार पानी के किनारे कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा है।दुर्गंध के कारण पर्यटक झील के नजदीक जाने से बच रहे हैं। इससे पर्यटन स्थल की मौजूदा स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।लोगों का कहना है कि सिलीसेढ़ की प्राकृतिक सुंदरता के बीच ऐसी स्थिति पर्यटकों के अनुभव को प्रभावित कर सकती है।
दिल्ली-गुरुग्राम से पहुंचे पर्यटक हुए निराश
सिलीसेढ़ झील पर अलवर शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं। यहां लोग मछलियों को दाना डालने और धार्मिक आस्था के चलते भी आते हैं।दिल्ली, गुरुग्राम और हरियाणा से पहुंचे कुछ पर्यटकों ने बताया कि उन्होंने सिलीसेढ़ की तस्वीरें और जानकारी ऑनलाइन देखी थीं।इसी आकर्षण के चलते वे यहां पहुंचे। लेकिन झील में तैरती मरी मछलियां और पानी से आती दुर्गंध देखकर उन्हें निराशा हुई।
धार्मिक आस्था से भी जुड़ी है झील
सिलीसेढ़ झील केवल पर्यटन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है। स्थानीय लोगों के लिए इसका धार्मिक महत्व भी है।कई लोग यहां मछलियों को दाना डालने पहुंचते हैं। इसे धार्मिक आस्था और पुण्य से जोड़कर देखा जाता है।ऐसे में मछलियों की बड़ी संख्या में मौत स्थानीय लोगों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।
होटल के गंदे पानी को लेकर स्थानीय लोगों के आरोप
स्थानीय लोगों ने झील के आसपास संचालित होटलों से निकलने वाले गंदे पानी को लेकर भी सवाल उठाए हैं।लोगों का आरोप है कि कुछ जगहों से गंदा पानी झील तक पहुंच रहा है। इसके कारण झील का पानी दूषित होने की आशंका जताई जा रही है।हालांकि, होटल से निकलने वाले पानी और मछलियों की मौत के बीच संबंध की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसका पता वैज्ञानिक जांच के बाद ही चलेगा।
पानी की जांच से साफ होगा मछलियों की मौत का कारण
मछलियों की मौत के कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें पानी में ऑक्सीजन की कमी, प्रदूषण या किसी अन्य रासायनिक बदलाव की स्थिति शामिल हो सकती है।लेकिन बिना वैज्ञानिक जांच के किसी एक कारण को जिम्मेदार मानना उचित नहीं होगा।इसलिए स्थानीय लोगों ने झील के पानी की तत्काल जांच कराने की मांग की है। जांच रिपोर्ट से पानी की गुणवत्ता और मछलियों की मौत का वास्तविक कारण सामने आ सकेगा।
मरी मछलियों को हटाने की भी मांग
स्थानीय लोगों ने झील से मरी हुई मछलियों को तत्काल हटाने की मांग की है। लंबे समय तक मरी मछलियां पानी में रहने से दुर्गंध और अन्य पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ सकती हैं।इसके साथ ही झील में गंदे पानी की संभावित आवक की जांच कराने की मांग भी की गई है।लोगों का कहना है कि समस्या का तत्काल समाधान करने के साथ भविष्य के लिए निगरानी व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।
सिलीसेढ़ के पर्यटन पर पड़ सकता है असर
सिलीसेढ़ झील अलवर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां प्राकृतिक वातावरण के साथ झील और आसपास का क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित करता है।यदि मरी मछलियों और दुर्गंध की समस्या बनी रहती है तो इसका असर पर्यटकों की संख्या और उनके अनुभव पर पड़ सकता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन स्थल की साफ-सफाई और पर्यावरणीय स्थिति को प्राथमिकता देना जरूरी है।
विभागीय निगरानी पर भी उठे सवाल
मछलियों की मौत के बाद सिंचाई विभाग और संबंधित प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि झील की नियमित पानी जांच और आसपास से आने वाले पानी की निगरानी होनी चाहिए।इसके अलावा झील क्षेत्र में कचरा और गंदे पानी की समस्या पर भी नियमित कार्रवाई जरूरी है।
तत्काल पानी की जांच और सफाई की मांग
स्थानीय लोगों ने सिंचाई विभाग और प्रशासन से झील के पानी की तत्काल वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है।इसके अलावा मरी हुई मछलियों को हटाने, गंदे पानी की आवक रोकने और झील की स्थिति की नियमित निगरानी की मांग की गई है।फिलहाल मछलियों की मौत का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। अब प्रशासन की कार्रवाई और पानी की जांच रिपोर्ट पर सभी की नजर है।