Hanumangarh: विधायक गणेशराज बंसल के खिलाफ नया मामला, प्लॉट में घुसने-तोड़फोड़ और धमकी के आरोप
हनुमानगढ़ के निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल के खिलाफ एक और मामला दर्ज हुआ है। जंक्शन थाने में दर्ज इस केस में प्लॉट में जबरन घुसने, तोड़फोड़ करने और धमकाने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता अधिवक्ता हरबंश सिंह चंदी ने विधायक समेत कई लोगों के खिलाफ शिकायत दी थी। पुलिस ने जांच के बाद मामला दर्ज किया है। विधायक के मौजूदा पद को देखते हुए मामले की जांच सीआईडी-सीबी जयपुर से कराए जाने की बात सामने आई है। यह मामला विधायक से जुड़े पहले के 2003 के कथित फर्जी पट्टा प्रकरण से अलग बताया जा रहा है।
प्लॉट में घुसने और तोड़फोड़ का आरोप
शिकायतकर्ता हरबंश सिंह चंदी के अनुसार जंक्शन के मिनी सचिवालय क्षेत्र में उनके और उनकी पत्नी के नाम पर तीन प्लॉट हैं। इनमें H-39 प्लॉट उनके नाम और H-40 व H-41 उनकी पत्नी सरणपाल कौर के नाम बताए गए हैं।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन प्लॉटों को नीलामी के जरिए खरीदा गया था। बाद में नगर परिषद ने इन भूखंडों पर अपना कब्जा बताते हुए वर्ष 2022 में बोर्ड लगा दिए थे।
नगर परिषद के कब्जे को लेकर कोर्ट में चल रहा विवाद
प्लॉटों पर नगर परिषद की ओर से कब्जा बताए जाने के बाद शिकायतकर्ता ने न्यायालय का रुख किया। उपलब्ध पुलिस जांच रिपोर्ट के अनुसार H-39, H-40 और H-41 को लेकर न्यायालय के अंतरिम आदेश भी प्रभावी हैं।रिपोर्ट में 22 अक्टूबर 2022 और 29 मार्च 2023 के अंतरिम आदेशों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में जमीन और कब्जे से जुड़ा विवाद पहले से न्यायिक प्रक्रिया में होने की बात सामने आती है।
10 लाख रुपए मांगने का भी आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2022 में तत्कालीन नगर परिषद सभापति गणेशराज बंसल ने प्लॉटों से जुड़े विवाद के दौरान बोर्ड हटाने के बदले कथित तौर पर दो विकल्प दिए थे।आरोप के मुताबिक प्लॉट किसी अन्य व्यक्ति के नाम करवाने या 10 लाख रुपए देने की मांग की गई थी। ये शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
2024 में प्लॉट में घुसने का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक 13 जनवरी 2024 की रात गणेशराज बंसल और 8-10 अन्य लोग कथित तौर पर लाठी-डंडों के साथ प्लॉट में घुसे।आरोप है कि इस दौरान चारदीवारी और कमरे का ताला तोड़ा गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।पुलिस ने शिकायत और जांच के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस के अनुसार मामले में BNS की धाराएं 308(2), 329(4), 331(6), 324(4), 324(5), 191(2), 191(3) और 190 लगाई गई हैं।मामले की जांच अब संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जाएगी। जांच के दौरान शिकायतकर्ता के बयान, दस्तावेज, न्यायालय के आदेश और घटनाक्रम से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच की जा सकती है।
विधायक होने के कारण CID-सीबी करेगी जांच
मामले में आरोपी विधायक होने के कारण पुलिस विभागीय प्रावधानों के तहत जांच सीआईडी-सीबी जयपुर से कराएगा।इसका उद्देश्य मामले की जांच को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाना है। जांच एजेंसी आरोपों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों के दावों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी।
गणेशराज बंसल पहले भी 2003 के पट्टा मामले में घिरे
गणेशराज बंसल हाल में वर्ष 2003 से जुड़े कथित फर्जी पट्टा मामले में भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। सितंबर 2026 में सीआईडी-सीबी ने उन्हें इस प्रकरण में गिरफ्तार किया था।चार दिन की पुलिस रिमांड के बाद 25 सितंबर को सीजेएम कोर्ट ने उनकी आगे की पुलिस रिमांड की मांग खारिज कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था। बाद में 26 सितंबर को जिला एवं सत्र न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई।
हाईकोर्ट से मिली राहत वाला मामला अलग
गणेशराज बंसल, उनकी पत्नी संतोष बंसल और बेटी वंदना जैन ने एक अलग एफआईआर को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हाईकोर्ट ने उस प्रकरण में गिरफ्तारी और दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी।इसलिए हाईकोर्ट की यह अंतरिम राहत और मौजूदा प्लॉट में घुसने-तोड़फोड़ से जुड़ा मामला अलग-अलग कानूनी प्रकरण हैं। दोनों मामलों को एक ही कार्रवाई मानना सही नहीं होगा।
अब जांच में क्या होगा?
नए मामले में पुलिस और जांच एजेंसी के सामने प्लॉट के स्वामित्व, कब्जे, न्यायालय के अंतरिम आदेश और कथित घटना से जुड़े तथ्यों की जांच अहम होगी।इसके अलावा 2022 में कथित मांग और जनवरी 2024 की घटना से जुड़े आरोपों की भी जांच की जाएगी। शिकायतकर्ता और अन्य संबंधित लोगों के बयान तथा दस्तावेज मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।फिलहाल विधायक गणेशराज बंसल के खिलाफ दर्ज यह मामला आरोपों और पुलिस जांच के चरण में है। आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।