लोकमंथन यात्रा का अलवर में भव्य स्वागत, स्वामी विवेकानंद स्मारक पर हुआ कार्यक्रम
राजस्थान की लोकसंस्कृति, लोककला, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही लोकमंथन यात्रा का अलवर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। भारत विकास परिषद् अलवर शाखा की ओर से मंगलवार सुबह नंगली चौराहा स्थित स्वामी विवेकानंद स्मारक पर यात्रा में शामिल सदस्यों और अतिथियों का स्वागत किया गया। यात्रियों को कुमकुम तिलक, अंगवस्त्र और मिश्री प्रसाद देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए और उनके अलवर प्रवास से जुड़ी जानकारी साझा की गई।
स्वामी विवेकानंद स्मारक पर हुआ भव्य स्वागत
लोकमंथन यात्रा के अलवर पहुंचने पर भारत विकास परिषद् अलवर शाखा की ओर से विशेष स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। नंगली चौराहा स्थित स्वामी विवेकानंद स्मारक को रंग-बिरंगी चुनरियों और फूलों से सजाया गया था।यात्रा दल के सदस्यों का कुमकुम तिलक, अंगवस्त्र और मिश्री प्रसाद देकर स्वागत किया गया। परिसर में रामधुन की मधुर स्वर-लहरियों के बीच वातावरण भक्तिमय नजर आया। स्मारक भवन के अंदर ॐ ध्वनि के बीच श्रद्धा और शांति का माहौल बना रहा।
लोकमंथन यात्रा को बताया लोकसंस्कृति का महत्वपूर्ण माध्यम
भारत विकास परिषद् अलवर शाखा के अध्यक्ष गिरीश गुप्ता ने कहा कि लोकमंथन यात्रा राजस्थान की समृद्ध लोकसंस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।उन्होंने कहा कि राजस्थान की लोककला, परंपराएं और इतिहास हमारी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। अलवर की धरती पर यात्रा के सदस्यों का स्वागत करना परिषद के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है।
केशव कृपा से रवाना हुआ यात्रा दल
लोकमंथन यात्रा का दल सुबह करीब 8 बजे केशव कृपा से रवाना हुआ। करीब 8:15 बजे यात्रा स्वामी विवेकानंद स्मारक पहुंची।यात्रा दल के पहुंचने से पहले ही स्वागत की तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। स्मारक के प्रवेश द्वार को फूलों और रंग-बिरंगी चुनरियों से सजाया गया था। यात्रियों के स्वागत के लिए परिषद के पदाधिकारी और सदस्य भी मौजूद रहे।
स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर अर्पित की पुष्पमाला
कार्यक्रम के दौरान लोकमंथन यात्रा के सदस्यों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर गुलाब की माला अर्पित की। इसके बाद यात्रियों को स्मारक परिसर में उस विशेष कक्ष का दर्शन कराया गया, जहां स्वामी विवेकानंद के ठहरने की जानकारी दी जाती है।भारत विकास परिषद् के पूर्व रीजन संरक्षक डॉ. के.के. गुप्ता ने स्वामी विवेकानंद के जीवन, उनके विचारों और अलवर से उनके जुड़ाव के बारे में जानकारी साझा की।
सामूहिक फोटो के साथ कार्यक्रम का समापन
स्वामी विवेकानंद स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम के अंत में यात्रा दल के सदस्यों और भारत विकास परिषद् के पदाधिकारियों ने सामूहिक फोटो खिंचवाया।कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानंद के विचारों और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को लेकर चर्चा हुई। यात्रा के उद्देश्य के अनुरूप अलवर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी सामने रखा गया।
अलवर के ऐतिहासिक स्थलों का किया भ्रमण
लोकमंथन यात्रा के दौरान अलवर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े कई स्थलों का भ्रमण भी किया गया।सुबह करीब 9 बजे स्कीम नंबर-8 स्थित जैन बीएड कॉलेज में यात्रा का स्वागत किया गया और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए। इसके बाद दोपहर करीब 1:30 बजे हसन खां मेवाती पैनोरमा का भ्रमण किया गया।इसके करीब 20 मिनट बाद दोपहर 1:50 बजे बाबा भर्तृहरि पैनोरमा का दौरा किया गया। इसके बाद यात्रा दोपहर करीब 2:30 बजे आदर्श ग्राम बुर्जा के लिए रवाना हुई।
भारत विकास परिषद् के पदाधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में भारत विकास परिषद् अलवर शाखा के सचिव अशोक कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष लोकेश गोयल, जिला समन्वयक राधेश्याम और पूर्व अध्यक्ष सुरेश गोयल मौजूद रहे।इसके अलावा रमेश चंद अग्रवाल, च्यवन भार्गव, शशांक झालानी, कपिल शर्मा सहित परिषद् के अन्य पदाधिकारी और सदस्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सचिव अशोक कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी साझा की।
लोकसंस्कृति और विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास
लोकमंथन यात्रा के जरिए राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों की लोककला, परंपराओं, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को समझने का प्रयास किया जा रहा है।अलवर में यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद स्मारक के साथ हसन खां मेवाती और बाबा भर्तृहरि से जुड़े स्थलों का भ्रमण भी इसी उद्देश्य का हिस्सा रहा। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए स्थानीय इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।