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Alwar: ऐतिहासिक जयसमंद बांध का बदलेगा रूप, 4 करोड़ से होगा कायाकल्प; बनेगा पर्यटन स्थल

अलवर के ऐतिहासिक जयसमंद बांध की सूरत अब बदलने वाली है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी योजना के तहत बांध के जीर्णोद्धार के लिए 4 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। योजना के तहत बांध की पाल की पिचिंग दुरुस्त की जाएगी। डाउन स्ट्रीम में ड्रेनेज सिस्टम विकसित होगा। पाल पर बनी छतरियों और गेस्ट हाउस की मरम्मत कराई जाएगी। परिसर में रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण के काम भी होंगे। झाड़ियों और अनावश्यक पेड़ों को हटाया जाएगा। सरकार की योजना इसे बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की है।

4 करोड़ रुपए से होगा जयसमंद बांध का कायाकल्प

जयसमंद बांध के जीर्णोद्धार के लिए कुल 4 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके तहत बांध की पाल, छतरियों, गेस्ट हाउस और आसपास के परिसर को विकसित किया जाएगा।इस परियोजना का उद्देश्य बांध की संरचना को बेहतर करने के साथ पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाना भी है। इसके लिए जल संसाधन विभाग को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया है।

UIT और जिला परिषद देंगी राशि

जयसमंद बांध के विकास के लिए अलवर यूआईटी की ओर से 2 करोड़ 25 लाख रुपए दिए जाएंगे। वहीं जिला परिषद 1 करोड़ 75 लाख रुपए खर्च करेगी।प्रस्तावित कार्यों को मंजूरी मिल चुकी है। अब प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके बाद टेंडर जारी होंगे और काम शुरू कराया जाएगा।

पाल की पिचिंग और ड्रेनेज सिस्टम होगा दुरुस्त

परियोजना में बांध की पाल की पिचिंग को दुरुस्त करने का काम प्रमुख है। इसके अलावा डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा।ड्रेनेज व्यवस्था के साथ मिट्टी से जुड़े जरूरी काम भी कराए जाएंगे। इससे बारिश और पानी की निकासी को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

छतरियों और गेस्ट हाउस का होगा सौंदर्यीकरण

जयसमंद बांध की पाल पर बनी ऐतिहासिक छतरियां यहां आने वाले लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। योजना के तहत इन छतरियों की मरम्मत और रंग-रोगन कराया जाएगा।पाल पर बने गेस्ट हाउस की भी मरम्मत की जाएगी। इसके साथ ही परिसर में रंग-रोगन और अन्य सौंदर्यीकरण के काम प्रस्तावित हैं।

झाड़ियों और अनावश्यक पेड़ों को हटाया जाएगा

बांध की पाल के ऊपर और नीचे उगी झाड़ियों तथा अनावश्यक पेड़ों को हटाने की योजना भी शामिल है।परिसर की सफाई और खुले स्थानों को व्यवस्थित करने से बांध का दृश्य स्वरूप बेहतर होने की उम्मीद है। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए परिसर को अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा।

पहले भी हो चुका है जयसमंद बांध का कायाकल्प

जयसमंद बांध की पाल का पहले भी कायाकल्प कराया जा चुका है। उस समय विकास कार्यों के बाद यहां लोगों की आवाजाही बढ़ी थी।हालांकि, नियमित देखरेख के अभाव में लगाए गए पेड़-पौधे सूख गए। धीरे-धीरे परिसर की सुंदरता भी प्रभावित हुई। अब नए प्रोजेक्ट के साथ नियमित रखरखाव पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।

युवाओं के बीच पहले से लोकप्रिय है बांध

वर्तमान में भी जयसमंद बांध पर स्थानीय लोग पहुंचते हैं। खासकर युवा यहां बनी छतरियों पर बैठकर फोटो और सेल्फी लेते हैं।बांध में पर्याप्त पानी होने पर यहां का प्राकृतिक और ऐतिहासिक वातावरण पर्यटन के लिहाज से और आकर्षक हो सकता है। एक कतार में बनी छतरियां इस स्थान की खास पहचान हैं।

1910 में हुआ था बांध का निर्माण

ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार जयसमंद बांध का निर्माण तत्कालीन महाराजा जयसिंह ने 1910 में कराया था। इसका उद्देश्य आसपास के गांवों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और क्षेत्र के विकास में मदद करना था।बांध वर्ष 1917 में तेज बारिश के बाद टूट गया था। इसके बाद वर्ष 1924 में इसका दोबारा निर्माण कराया गया।

बांध परिसर में बनी हैं करीब 14 छतरियां

जयसमंद बांध परिसर में करीब 14 छतरियां बनी हुई हैं। इनकी वास्तुकला और एक कतार में मौजूद संरचना लोगों को आकर्षित करती है। वर्ष 1977 में यहां गेस्ट हाउस का निर्माण कराया गया था। अब प्रस्तावित जीर्णोद्धार के तहत गेस्ट हाउस समेत पूरे परिसर को व्यवस्थित करने की योजना है।

इस मानसून में नहीं आया पानी

इस मानसून सीजन में जयसमंद बांध में पर्याप्त पानी नहीं आने की जानकारी सामने आई है। इसके कारण बांध फिलहाल सूखा नजर आ रहा है।\हालांकि, जल संसाधन विभाग के विकास कार्यों के साथ भविष्य में बांध में पानी की उपलब्धता और आसपास के क्षेत्र के विकास पर भी नजर रहेगी। पर्यटन स्थल के रूप में इसकी संभावनाएं पानी और प्राकृतिक वातावरण से भी जुड़ी हैं।

काम पूरा होने के बाद पर्यटन को मिल सकती है नई दिशा

चार करोड़ रुपए की परियोजना पूरी होने के बाद जयसमंद बांध का परिसर पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और आकर्षक हो सकता है।हालांकि, सिर्फ निर्माण और सौंदर्यीकरण पर्याप्त नहीं होगा। नियमित रखरखाव, स्वच्छता, सुरक्षा और पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं भी लगातार उपलब्ध करानी होंगी। तभी जयसमंद बांध को एक स्थायी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकेगा।

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Stv News Rajasthan

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