‘मां को छोड़कर नहीं जाऊंगा’… जलती बस में मां को बचाते-बचाते 28 साल के शशांक ने गंवाई जान
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण बस अग्निकांड में एक मां-बेटे की दर्दनाक कहानी सामने आई है। 28 वर्षीय शशांक गुप्ता अपनी मां सुनीता को बचाने के लिए आखिरी समय तक कोशिश करते रहे। आग लगने के बाद दूसरे यात्री बस से बाहर निकलने लगे, लेकिन घुटने की समस्या के कारण सुनीता तेजी से बाहर नहीं निकल पा रही थीं। शशांक ने मां को अकेला छोड़कर बाहर निकलने से इनकार कर दिया। धुआं बढ़ने के बाद दोनों बेहोश हो गए और आग की चपेट में आकर उनकी मौत हो गई।
जेवर के पास चलती बस में लगी भीषण आग
राज कल्पना ट्रैवल्स की एसी स्लीपर बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही थी। जेवर के पास अचानक बस में आग लग गई।हादसे के समय बस में कुल 35 यात्री सवार थे। आग तेजी से फैलने के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए बस से बाहर निकलने लगे।हादसे में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 26 यात्री, ड्राइवर और कंडक्टर सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे।
मां को बचाने के लिए बाहर नहीं निकले शशांक
शशांक गुप्ता अपनी मां सुनीता के साथ महोबा जा रहे थे। उनकी मां करीब एक महीने से उनके साथ गुरुग्राम में रह रही थीं और घुटने के दर्द का इलाज करा रही थीं।बस में आग लगने के बाद सुनीता के लिए तेजी से बाहर निकलना मुश्किल था। ऐसे में शशांक उन्हें बस से बाहर निकालने की कोशिश करते रहे।बताया जा रहा है कि ड्राइवर और कंडक्टर ने शशांक से बाहर निकलने को कहा, लेकिन उन्होंने मां को अकेला छोड़ने से इनकार कर दिया।
‘मां को छोड़कर नहीं जाऊंगा’
परिजनों के अनुसार, जब बस में आग फैल रही थी, तब शशांक ने मां को बचाने को प्राथमिकता दी। उनका कहना था कि वह अपनी मां को छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे।शशांक लगातार सुनीता को बस के दरवाजे की ओर ले जाने की कोशिश करते रहे। इस दौरान बस के अंदर धुआं तेजी से भरता गया।कुछ ही देर में दोनों बेहोश हो गए और आग की चपेट में आ गए।
चाचा को हार्ट अटैक के बाद घर लौट रहे थे मां-बेटे
परिजनों के मुताबिक शशांक गुरुग्राम में इंडिगो एयरलाइंस में इंजीनियर थे। उनकी मां सुनीता करीब एक महीने से उनके साथ रह रही थीं।तीन दिन पहले महोबा के चरखारी में शशांक के चाचा को हार्ट अटैक आया था। इसके बाद शशांक अपनी मां के साथ घर लौट रहे थे।लेकिन घर पहुंचने से पहले ही यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे ने परिवार की जिंदगी बदल दी।
बेहद मुश्किल हालात में हुई मां-बेटे की पहचान
हादसे के बाद मृतकों की पहचान करना भी बेहद मुश्किल था। आग में शवों की स्थिति खराब होने के कारण सामान्य तरीके से पहचान नहीं हो सकी।परिजनों के मुताबिक सुनीता की पहचान उनकी लंबाई के आधार पर की गई। वहीं शशांक की पहचान उनकी अंगूठी से हुई।पहचान की प्रक्रिया के बाद परिवार को हादसे की भयावहता का पता चला।
पिता बोले- मेरा बेटा मां को छोड़कर नहीं जा सकता था
शशांक के पिता नीरज गुप्ता ने बेटे की मौत के बाद कहा कि उनका बेटा अपनी मां को छोड़कर बाहर नहीं निकल सकता था।परिवार के मुताबिक शशांक ने आखिरी दम तक अपनी मां को बचाने की कोशिश की। मां को बचाने की कोशिश में बेटे की भी जान चली गई।
मां-बेटे के रिश्ते की दर्दनाक कहानी
यमुना एक्सप्रेसवे का यह हादसा अपने पीछे कई परिवारों के लिए गहरा दुख छोड़ गया है। शशांक और उनकी मां सुनीता की कहानी इस हादसे के सबसे दर्दनाक पहलुओं में से एक बन गई है।एक ओर बस में आग लगने के बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकल रहे थे, वहीं शशांक अपनी मां को बचाने में जुटे रहे। आखिरकार वह अपनी मां के साथ ही आग की चपेट में आ गए।हादसे की जांच और आग लगने के कारणों को लेकर संबंधित एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर रही हैं।