सोशल मीडिया देखकर बच्चे के लिए सेरेलेक बना रहे हैं तो पहले जान लें UNICEF और NHS की ये जरूरी बातें
बच्चे के लिए घर पर बेबी फूड या सेरेलेक तैयार करने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लेकिन हर वायरल रेसिपी छोटे बच्चे के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। करीब 6 महीने की उम्र के बाद जब बच्चा ठोस आहार के लिए तैयार हो, तब उसकी डाइट में धीरे-धीरे अलग-अलग खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। NHS, UNICEF, CDC और American Academy of Pediatrics के अनुसार इस दौरान खाने की बनावट, पोषण, मात्रा और चोकिंग के खतरे का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
करीब 6 महीने के बाद क्या खिलाएं?
NHS के अनुसार, जब बच्चा करीब 6 महीने का हो और ठोस आहार के लिए तैयार हो, तब धीरे-धीरे अलग-अलग खाद्य पदार्थ उसकी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।अच्छी तरह पकाई और नरम सब्जियां, फल, अनाज और दाल जैसे खाद्य पदार्थ दिए जा सकते हैं। इसके अलावा अंडा, मांस, मछली, बीन्स और दूसरे प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ भी उम्र और बच्चे की क्षमता के अनुसार शामिल किए जा सकते हैं।शुरुआत में कम मात्रा से शुरुआत करके धीरे-धीरे भोजन की विविधता बढ़ाई जा सकती है।
खाने की बनावट भी उतनी ही जरूरी
UNICEF के अनुसार, करीब 6 महीने की उम्र में बच्चा चबाने और निगलने की प्रक्रिया सीख रहा होता है। इसलिए शुरुआत में खाना नरम और आसानी से निगलने योग्य होना चाहिए।मैश किए हुए फल-सब्जियां और गाढ़ा दलिया जैसे विकल्प दिए जा सकते हैं। भोजन बहुत पतला करने के बजाय ऐसी बनावट रखना जरूरी है, जिससे बच्चे को पोषण भी मिले और वह आसानी से खा सके।बच्चे को जबरदस्ती खिलाने के बजाय उसकी भूख और पेट भरने के संकेतों पर भी ध्यान देना चाहिए।
सोशल मीडिया की हर बेबी फूड रेसिपी सही नहीं
सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली किसी भी बेबी फूड रेसिपी को सीधे कॉपी करना जरूरी नहीं है। बच्चे की उम्र, विकास और खाने की क्षमता अलग-अलग हो सकती है।किसी रेसिपी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भले ही सामान्य रूप से पौष्टिक हो, लेकिन उसकी बनावट या मात्रा छोटे बच्चे के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती।इसलिए वायरल वीडियो को फॉलो करने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसमें इस्तेमाल सामग्री और तरीका बच्चे की उम्र के लिए सुरक्षित है या नहीं।
सिर्फ एक तरह के अनाज पर निर्भर न रहें
American Academy of Pediatrics के अनुसार, बच्चे को अलग-अलग पौष्टिक खाद्य पदार्थ देना बेहतर है। सिर्फ एक तरह के अनाज या पैकेज्ड बेबी फूड पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है।खासकर केवल चावल वाले सीरियल को बार-बार देने के बजाय ओट्स, जौ, क्विनोआ और अन्य अनाजों को भी डाइट में शामिल किया जा सकता है।डाइट में विविधता रखने से बच्चे को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं और एक ही खाद्य पदार्थ के लगातार सेवन से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
नमक और चीनी अलग से डालने की जरूरत नहीं
NHS के अनुसार, छोटे बच्चों के भोजन में अलग से नमक या चीनी डालने की जरूरत नहीं होती।इसलिए घर पर बेबी फूड तैयार करते समय सोशल मीडिया की किसी रेसिपी में नमक, चीनी या अनावश्यक मीठी सामग्री शामिल है तो उसे बच्चे को देने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।फल, सब्जियां, अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों का प्राकृतिक स्वाद बच्चे को अलग-अलग स्वादों से परिचित कराने में मदद कर सकता है।
चोकिंग से बचाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें
CDC के अनुसार, छोटे बच्चों में कुछ खाद्य पदार्थों से गले में खाना अटकने का खतरा हो सकता है। इसलिए खाने का आकार और बनावट बच्चे की उम्र तथा विकास के अनुसार होना चाहिए।कठोर, छोटे, चिपचिपे या बड़े टुकड़ों वाले खाद्य पदार्थों से सावधानी जरूरी है। साबुत मेवे, कच्ची गाजर, कठोर सेब के टुकड़े और कुछ अन्य खाद्य पदार्थ छोटे बच्चों के लिए चोकिंग का खतरा बढ़ा सकते हैं।खाना खाते समय बच्चे को सीधा बैठाकर रखें और उसे अकेला न छोड़ें।
राइस सीरियल बार-बार देने से बचें
American Academy of Pediatrics के अनुसार, चावल में कुछ अन्य अनाजों की तुलना में आर्सेनिक का स्तर अधिक हो सकता है। इसलिए बच्चे की डाइट में केवल राइस सीरियल को ही लगातार शामिल करने के बजाय अलग-अलग अनाज देना बेहतर है।ओट्स, जौ और क्विनोआ जैसे विकल्प डाइट में विविधता ला सकते हैं। घर पर चावल बनाते समय उसे अच्छी तरह धोकर ज्यादा पानी में पकाने और अतिरिक्त पानी निकालने से आर्सेनिक का संपर्क कम करने में मदद मिल सकती है।
बच्चे की भूख और संकेतों को समझना जरूरी
ठोस आहार शुरू करने के दौरान बच्चे की भूख हर दिन समान नहीं हो सकती। UNICEF के अनुसार, बच्चे के भूख और पेट भरने के संकेतों को समझना महत्वपूर्ण है।इसलिए केवल तय मात्रा पूरी कराने के लिए बच्चे को जबरदस्ती खिलाना उचित नहीं है। धीरे-धीरे अलग-अलग स्वाद और बनावट से परिचित कराना इस चरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।अगर बच्चे को किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी, निगलने में परेशानी या कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है, तो उसके आहार को लेकर बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
वायरल रेसिपी से ज्यादा जरूरी है सुरक्षित पोषण
सोशल मीडिया पर कोई रेसिपी कितनी भी लोकप्रिय क्यों न हो, बच्चे के लिए उसकी सुरक्षा और पोषण सबसे महत्वपूर्ण हैं। करीब 6 महीने के बाद ठोस आहार शुरू करते समय उम्र के अनुरूप बनावट, विविध खाद्य पदार्थ और सुरक्षित तरीके पर ध्यान देना चाहिए।
ध्यान रखें: हर बच्चे की जरूरत अलग हो सकती है। किसी वायरल रेसिपी को अपनाने से पहले बच्चे की उम्र, विकास और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।