जयपुर अग्निकांड के बाद फायर बाइक पर सवाल, 1.50 करोड़ की 20 बाइक में नहीं रहीं पानी की टंकियां
जयपुर के पुरोहित जी का कटला अग्निकांड सामने आने के बाद नगर निगम की फायर व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। दावा है कि संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए साल 2018 में करीब 1.50 करोड़ रुपए की लागत से 20 फायर फाइटिंग बाइक खरीदी गई थीं। इन बाइकों में 40 लीटर पानी की टंकी और वॉटर मिस्ट सिस्टम लगाया गया था। आरोप है कि बाद में इनसे फायर फाइटिंग उपकरण हटा दिए गए और इनका इस्तेमाल सामान्य कामों में होने लगा। वहीं नगर निगम की फायर शाखा ने कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी।
पुरोहित जी का कटला आग ने खोली व्यवस्था की पोल
जयपुर के परकोटे में स्थित पुरोहित जी का कटला में हाल ही में भीषण आग लग गई थी। संकरी गलियों के कारण बड़ी दमकल गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में परेशानी हुई।बताया गया कि दमकल की बड़ी गाड़ियां मुख्य सड़क पर करीब 300 मीटर दूर रुक गईं। इसके बाद कर्मचारियों ने दुकानों की छतों से पाइप बिछाकर आग तक पानी पहुंचाने की कोशिश की। इस घटना के बाद संकरी गलियों के लिए बनाए गए फायर सिस्टम की उपयोगिता पर सवाल उठे हैं।
2018 में 1.50 करोड़ में खरीदी गई थीं 20 फायर बाइक
संकरी गलियों और घने बाजारों में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम ने वर्ष 2018 में 20 विशेष फायर फाइटिंग बाइक खरीदी थीं।इनकी कुल लागत करीब 1.50 करोड़ रुपए बताई गई। यानी प्रत्येक बाइक पर करीब 7.5 लाख रुपए खर्च हुए थे। इन्हें शहर के अलग-अलग फायर स्टेशनों पर तैनात किया गया था।
40 लीटर पानी और वॉटर मिस्ट सिस्टम था
इन विशेष बाइकों को इस तरह तैयार किया गया था कि दमकल की बड़ी गाड़ी नहीं पहुंच पाने वाले इलाकों में इन्हें आसानी से ले जाया जा सके।इनमें करीब 40 लीटर पानी की क्षमता वाली टंकी और हाई-प्रेशर वॉटर मिस्ट सिस्टम लगाया गया था। उद्देश्य था कि आग लगने के शुरुआती मिनटों में बाइक के जरिए पानी की बौछार कर आग को फैलने से रोका जा सके।
बाइकों से टंकियां हटाने का आरोप
मामले में आरोप लगाया गया है कि फायर शाखा के स्तर पर इन बाइकों से पानी की टंकियां और अग्निशमन उपकरण हटवा दिए गए।इसके बाद इनका इस्तेमाल सामान्य मोटरसाइकिल की तरह किए जाने का दावा है। आरोपों के मुताबिक, कुछ बाइक अफसरों के आने-जाने, फायर एनओसी की जांच और नगर निगम मुख्यालय तक डाक पहुंचाने जैसे कामों में इस्तेमाल हो रही हैं।हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
‘फायर बाइक होती तो आग को शुरुआती स्तर पर रोका जा सकता था’
फायर व्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि संकरी गलियों में छोटी फायर बाइक उपयोगी साबित हो सकती हैं। ऐसी बाइक बड़ी दमकल की तुलना में कम समय में घटनास्थल तक पहुंच सकती है।पुरोहित जी का कटला जैसे घने बाजार में शुरुआती स्तर पर पानी की बौछार मिलने से आग के फैलाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती थी। हालांकि, यह कहना कि बाइक उपलब्ध होने से आग निश्चित रूप से रुक जाती, जांच के बिना संभव नहीं है।
एक बाइक पर 7.5 लाख रुपए हुए थे खर्च
नगर निगम ने प्रत्येक फायर बाइक पर करीब 7.5 लाख रुपए खर्च किए थे। इनका उद्देश्य सामान्य परिवहन नहीं बल्कि आपातकालीन अग्निशमन व्यवस्था को मजबूत करना था।ऐसे में यदि बाइकों का इस्तेमाल मूल उद्देश्य से अलग कार्यों में किया जा रहा है तो यह प्रशासनिक जांच का विषय बनता है। खासकर पुराने शहर के संकरे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ऐसी व्यवस्था की उपयोगिता महत्वपूर्ण हो सकती है।
दो दर्जन से ज्यादा दुकानें आग की चपेट में आईं
पुरोहित जी का कटला में गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे आग लगने की जानकारी सामने आई थी। आग ने देखते ही देखते दो दर्जन से अधिक दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया।हादसे में व्यापारियों को करोड़ों रुपए के नुकसान का दावा किया गया है। घटना के बाद प्रशासन ने परकोटे के पुराने और व्यावसायिक भवनों का सर्वे शुरू किया है।
फायर NOC और सुरक्षा मानकों की जांच शुरू
अग्निकांड के बाद प्रशासन की ओर से पुराने व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जा रही है।इस दौरान फायर NOC, अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा मानकों को देखा जा रहा है। उद्देश्य यह पता लगाना है कि व्यावसायिक परिसरों में निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है या नहीं।
बिल्डिंग मालिक को दूसरा नोटिस, पुलिस कर रही तलाश
अग्निकांड के मामले में बिल्डिंग मालिक आनंद सेठी के पुलिस के सामने पेश नहीं होने की बात सामने आई है। पुलिस ने पूछताछ के लिए दूसरा नोटिस जारी किया है।बताया गया है कि आग लगने के बाद उनका मोबाइल बंद मिला और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पुलिस आसपास के CCTV फुटेज की भी जांच कर रही है। वहीं पीड़ित व्यापारियों को थाने बुलाकर उनके बयान दर्ज किए गए हैं।
फायर शाखा ने जांच का दिया भरोसा
नगर निगम की उपायुक्त फायर शाखा दुर्गा कुमारी ने कहा कि यदि फायर स्टेशनों पर इन बाइकों को दूसरे कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।उन्होंने कहा कि फायर बाइक आपातकालीन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। हालांकि, उनके अनुसार इन बाइकों की क्षमता सीमित है और इनसे पहली मंजिल तक ही आग बुझाने में मदद मिल सकती है।अब अग्निकांड के बाद फायर बाइक की वास्तविक स्थिति और उनके इस्तेमाल को लेकर होने वाली जांच पर नजर रहेगी।