Ashok Gehlot: ‘राजस्थान में लोकतंत्र की सरेआम लूट’, UPI-MDR पर भी गहलोत ने सरकार को घेरा
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बाद मेयर और चेयरमैन के चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भाजपा और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहलोत ने दावा किया कि अधिकारियों पर भाजपा के बोर्ड बनाने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने निर्दलीय और दूसरे दलों के पार्षदों को कथित तौर पर धन का लालच देने और विरोध करने वालों पर दबाव बनाने का आरोप भी लगाया। इसके अलावा गहलोत ने UPI पर MDR चार्ज के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
गहलोत का आरोप- अधिकारियों पर बनाया जा रहा दबाव
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया X पर आरोप लगाया कि राजस्थान में नगर निकायों के बोर्ड गठन को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है।
गहलोत के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक IAS अधिकारी कलेक्टरों और SDMs पर भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मेयर और चेयरमैन पद हासिल करने के लिए निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षदों को कथित तौर पर करोड़ों रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की जा रही है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में नहीं है। संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या भाजपा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया का उल्लेख भी उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
‘नहीं मानने वालों को पुलिस से धमकाया जा रहा’
गहलोत ने अपने बयान में आरोप लगाया कि जो पार्षद कथित तौर पर इस तरह के दबाव में नहीं आ रहे हैं, उनके खिलाफ पुलिस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को जबरन उठाने और धमकाने जैसी कार्रवाई की जा रही है। गहलोत ने इन आरोपों को राजस्थान में लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए इसे ‘लोकतंत्र की सरेआम लूट’ बताया।
हालांकि, ये अशोक गहलोत की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। इनकी पुष्टि के लिए संबंधित मामलों में आधिकारिक शिकायत, पुलिस रिकॉर्ड या प्रशासन का पक्ष सामने आना जरूरी होगा।
‘करोड़ों खर्च कर मेयर बनेगा तो वसूली करेगा’
अशोक गहलोत ने मेयर और चेयरमैन के चुनाव में कथित धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति करोड़ों रुपए खर्च करके पद हासिल करता है तो उसके सामने उस रकम की भरपाई का सवाल खड़ा होगा।
गहलोत ने दावा किया कि इसका असर आम लोगों पर पड़ सकता है। उन्होंने सड़क, पट्टे, नाली और दूसरे स्थानीय विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता को इन कामों के लिए भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ सकता है।
यह भविष्य को लेकर गहलोत का राजनीतिक तर्क है। किसी निर्वाचित प्रतिनिधि द्वारा भ्रष्टाचार करने की बात को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता, जब तक उसके समर्थन में प्रमाण सामने न हों।
गहलोत ने जनता से ‘जागने’ की अपील की
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में आम लोगों को इस मुद्दे पर सचेत रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव के बाद होने वाले बोर्ड गठन का सीधा संबंध स्थानीय प्रशासन और शहर के विकास कार्यों से है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक खरीद-फरोख्त का असर आने वाले वर्षों में आम नागरिकों की जेब पर पड़ सकता है। उन्होंने इसे सिर्फ राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि जनता से जुड़ा विषय बताया।
UPI पर MDR को लेकर भी केंद्र पर निशाना
अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में UPI पर MDR यानी Merchant Discount Rate के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने इसे भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था और अमेरिकी कंपनियों के हितों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए।
गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों से अमेरिकी कंपनियों को फायदा और भारतीय जनता को नुकसान हो सकता है। उन्होंने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीति से जोड़कर सवाल उठाया।
2025 में वित्त मंत्रालय ने MDR दावे को बताया था गलत
UPI पर MDR को लेकर गहलोत ने अपने पोस्ट में घटनाक्रम का जिक्र किया। उनके मुताबिक, 11 जून 2025 को केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर UPI पर MDR लगाए जाने के दावों को गलत और भ्रामक बताया था।
वित्त मंत्रालय ने उस समय मुफ्त डिजिटल भुगतान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की बात कही थी। इस बयान को UPI पर MDR से जुड़े उस समय के दावों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
USTR रिपोर्ट का गहलोत ने किया जिक्र
गहलोत ने मार्च 2026 में जारी अमेरिकी संस्था USTR की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार रिपोर्ट में भारत की UPI नीति और Visa-Mastercard जैसी कंपनियों के कारोबार पर इसके प्रभाव को लेकर टिप्पणी की गई थी।
गहलोत ने इस रिपोर्ट को केंद्र सरकार की UPI नीति पर अमेरिकी दबाव के अपने दावे से जोड़ा। हालांकि किसी रिपोर्ट में किसी नीति पर टिप्पणी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि भारत सरकार ने बाद में कोई फैसला किसी विदेशी सरकार या कंपनी के दबाव में लिया।
UPI-MDR के दावे पर तथ्य जांचना जरूरी
गहलोत के पोस्ट में सितंबर 2026 में 2,000 रुपए से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने के फैसले का दावा किया गया है।
इस दावे के संदर्भ में आधिकारिक सरकारी अधिसूचना और RBI के नियम देखना महत्वपूर्ण होगा। खासकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि कोई शुल्क किस प्रकार के UPI लेनदेन पर लागू है, इसे कौन वहन करेगा और क्या यह सामान्य ग्राहकों के व्यक्तिगत UPI भुगतान पर भी लागू होगा।
निकाय बोर्ड गठन पर अब सबकी नजर
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बाद अब मेयर और चेयरमैन के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के बीच पार्षदों के समर्थन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
अशोक गहलोत के आरोपों के बाद बोर्ड गठन की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस और बढ़ सकती है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम तस्वीर संबंधित अधिकारियों, राजनीतिक दलों और आधिकारिक दस्तावेजों के पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।