Alwar Mayor Election: भाजपा में भूपेंद्र यादव की पसंद, कांग्रेस में जितेंद्र सिंह-टीकाराम जूली की रणनीति
अलवर नगर निगम महापौर चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। भाजपा ने वार्ड 7 की पार्षद सुमनलता अग्रवाल को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने वार्ड 39 की पार्षद कमलेश शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। वहीं रिंकल गर्ग ने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। प्रत्याशियों के चयन के बाद दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और पार्षदों के समर्थन का गणित चर्चा में है।
भाजपा ने सुमनलता अग्रवाल को बनाया प्रत्याशी
भाजपा ने वार्ड 7 की पार्षद सुमनलता अग्रवाल को महापौर पद के लिए अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। वह पूर्व नगर परिषद सभापति अजय अग्रवाल की पत्नी हैं।
पार्टी में प्रत्याशी चयन से पहले कई नामों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई थी। इनमें नेहा मनचंदानी और अपूर्वा शर्मा के नाम भी शामिल बताए गए।
अंतिम दौर में सुमनलता अग्रवाल के नाम पर सहमति बनी। उन्होंने बुधवार को महापौर पद के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया।
भाजपा में भूपेंद्र यादव की भूमिका की चर्चा
सुमनलता अग्रवाल के नाम को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा की बात सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ भी उनके नाम को लेकर विचार-विमर्श हुआ था।
हालांकि, प्रत्याशी चयन में किस नेता की कितनी भूमिका रही, इसे लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने नहीं है। इसलिए भूपेंद्र यादव की भूमिका को फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और उपलब्ध रिपोर्टों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने कमलेश शर्मा पर जताया भरोसा
कांग्रेस ने वार्ड 39 की पार्षद कमलेश शर्मा को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है। वह पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेश मिश्रा की पत्नी हैं।
प्रत्याशी चयन से पहले कांग्रेस में भी कई नामों पर मंथन हुआ था। पार्टी नेतृत्व ने स्थानीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया।
इसके बाद कमलेश शर्मा के नाम पर सहमति बनी। उन्होंने बुधवार को कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया।
जितेंद्र सिंह और टीकाराम जूली की भूमिका पर चर्चा
कांग्रेस प्रत्याशी के चयन को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की भूमिका की भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रत्याशी चयन से पहले दोनों नेताओं सहित स्थानीय कांग्रेस नेताओं से फीडबैक लिया गया था।
हालांकि, कमलेश शर्मा के चयन में किस स्तर पर किस नेता की निर्णायक भूमिका रही, इसकी आधिकारिक पुष्टि अलग से नहीं हुई है। इसलिए इसे राजनीतिक सूत्रों और चर्चाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
रिंकल गर्ग ने निर्दलीय नामांकन दाखिल किया
महापौर चुनाव में तीसरा कोण रिंकल गर्ग ने बनाया है। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है।
रिंकल गर्ग वार्ड 36 से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ चुकी हैं। अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने से चुनाव भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला नहीं रह गया है।
तीनों प्रत्याशियों के मैदान में रहने की स्थिति में पार्षदों के समर्थन का गणित महत्वपूर्ण हो जाएगा।
65 वार्डों में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं
अलवर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं। चुनाव परिणामों में भाजपा को 28, कांग्रेस को 23 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 13 वार्डों में जीत मिली है। एक वार्ड पर अन्य प्रत्याशी विजयी रहा।
महापौर चुनाव में बहुमत के लिए 33 पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों को अपने मौजूदा आंकड़े के अलावा अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।
यही वजह है कि निर्दलीय पार्षदों की भूमिका चुनावी गणित में महत्वपूर्ण हो गई है।
निर्दलीय पार्षदों पर दोनों दलों की नजर
भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने अब पार्षदों को अपने पक्ष में रखने की चुनौती है। खास तौर पर निर्दलीय पार्षद महापौर चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
दोनों दल अपने-अपने समर्थन का दावा कर रहे हैं। लेकिन वास्तविक समर्थन का आंकड़ा मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा।
महापौर चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावना को देखते हुए भी दोनों दल अपने पार्षदों से संपर्क और संवाद बनाए रखने की कोशिश करेंगे।
21 सितंबर को होगा महापौर का चुनाव
अलवर नगर निगम महापौर पद के लिए मतदान 21 सितंबर को होना है। इससे पहले नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब स्क्रूटनी तथा नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद अंतिम तस्वीर स्पष्ट होगी।
महापौर पद के लिए तीन प्रत्याशियों के मैदान में होने से मुकाबले का गणित और दिलचस्प हो गया है। हालांकि अंतिम परिणाम पार्षदों के मतदान के बाद ही सामने आएगा।
सुमनलता और कमलेश ने बताई विकास की प्राथमिकताएं
सुमनलता अग्रवाल और कमलेश शर्मा दोनों ने अजमेर नहीं, बल्कि अलवर शहर के विकास को लेकर अपनी प्राथमिकताओं की बात कही है। प्रत्याशियों के लिए शहर की मूलभूत सुविधाएं और योजनाबद्ध विकास प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
अब महापौर चुनाव में राजनीतिक समीकरणों के साथ पार्षदों का समर्थन और मतदान महत्वपूर्ण होगा। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच मुकाबले का अंतिम फैसला 21 सितंबर को मतदान के बाद स्पष्ट होगा।