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कोटा में BJP का बोर्ड तय, अब किसे मिलेगी मेयर की कुर्सी? बड़े दावेदार हारे, नए चेहरे पर दांव

कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। 100 वार्डों में भाजपा को 55 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस को 39 से 40 सीटों पर जीत मिली है। निर्दलीयों के खाते में 3 से 4 सीटें गई हैं। बहुमत के लिए जरूरी 51 सीटों से भाजपा चार सीट आगे है। ऐसे में कोटा में भाजपा का बोर्ड बनना तय माना जा रहा है। हालांकि मेयर पद को लेकर सस्पेंस बरकरार है। कोटा मेयर की सीट ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है। इस बार कई बड़े दावेदार चुनाव हार गए हैं। अब भाजपा नए जीते हुए पार्षदों में से किसी महिला चेहरे पर दांव खेल सकती है।

55 सीटों के साथ BJP को पूर्ण बहुमत

कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में भाजपा ने 55 वार्डों में जीत हासिल की है। इसके साथ ही पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है।

कांग्रेस को 39 से 40 सीटें मिलने की जानकारी है। वहीं निर्दलीयों को करीब 3 से 4 सीटें मिली हैं। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण बोर्ड गठन के लिए उसे किसी दूसरे दल या निर्दलीय के समर्थन की जरूरत नहीं होगी।

अब पार्टी का पूरा फोकस मेयर के चेहरे पर है।

OBC महिला के लिए आरक्षित है मेयर की सीट

कोटा नगर निगम के मेयर पद का आरक्षण इस बार ओबीसी महिला के लिए किया गया है। इसलिए भाजपा के पास जीती हुई महिला पार्षदों में से ही मेयर चुनने का विकल्प रहेगा।

यही आरक्षण इस चुनाव में राजनीतिक समीकरण का सबसे बड़ा आधार बन गया है। पार्टी सामाजिक समीकरण के साथ संगठन में सक्रियता और स्थानीय स्वीकार्यता को भी ध्यान में रख सकती है।

भाजपा के स्पष्ट बहुमत के कारण मेयर का चुनाव विपक्ष के समर्थन पर निर्भर नहीं होगा।

मेयर पद के कई बड़े चेहरे चुनाव हारे

कोटा में मेयर पद को लेकर जिन नामों की पहले चर्चा थी, उनमें इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। कांग्रेस की प्रमुख दावेदार मानी जा रही देव बाई गुर्जर रामगंजमंडी वार्ड 2 से चुनाव हार गईं।

कांग्रेस की एक अन्य चर्चित दावेदार सविता सुवालका भी वार्ड 71 से जीत हासिल नहीं कर सकीं। भाजपा की वरिष्ठ नेता और पूर्व डिप्टी मेयर योगेंद्र खींची की भी चुनाव में हार हुई है।

बड़े चेहरों की हार के बाद मेयर पद की रेस का पूरा समीकरण बदल गया है।

भाजपा अब नए और चौंकाने वाले चेहरे पर लगा सकती है दांव

मेयर पद के लिए बड़े नामों के चुनाव हारने के बाद भाजपा के सामने अब नए चेहरे को आगे लाने का विकल्प है। पार्टी जीते हुए पार्षदों में किसी अनुभवी या संगठन से जुड़े OBC महिला चेहरे को चुन सकती है।

ऐसे में मेयर पद का नाम अंतिम समय तक सस्पेंस में रहने की संभावना है। भाजपा नेतृत्व के लिए चुनौती यह होगी कि सामाजिक समीकरण के साथ पार्टी संगठन और स्थानीय राजनीति में संतुलन भी बना रहे।

ओम बिरला की पसंद की भी चर्चा

कोटा की स्थानीय राजनीति में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि मेयर के नाम के चयन में उनकी पसंद को महत्व मिल सकता है।

हालांकि मेयर पद के लिए अंतिम फैसला भाजपा संगठन और पार्टी नेतृत्व की प्रक्रिया के तहत ही होगा। फिलहाल किसी एक नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

नए जीते हुए पार्षदों में तलाशा जा रहा चेहरा

भाजपा के पास 55 पार्षदों का स्पष्ट संख्याबल है। अब पार्टी के भीतर नए जीते हुए पार्षदों के नामों पर मंथन होने की चर्चा है।

मेयर के लिए OBC महिला आरक्षण होने के कारण महिला पार्षदों में से ही संभावित चेहरे पर विचार होगा। संगठन में सक्रियता, राजनीतिक अनुभव, सामाजिक स्वीकार्यता और पार्टी नेतृत्व के साथ तालमेल जैसे पहलू अहम हो सकते हैं।

EVM खराबी के कारण मेयर चुनाव स्थगित

कोटा में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल रुक गई है। वार्ड 11, 44 और 87 में EVM से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण परिणाम प्रभावित हुए हैं।

इसी वजह से राज्य निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर को होने वाले मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। प्रभावित बूथों पर दोबारा मतदान और उसके बाद मतगणना पूरी होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

Re-polling के बाद साफ होगा अंतिम गणित

वार्ड 11, 44 और 87 में दोबारा मतदान होना है। इसके बाद इन वार्डों की मतगणना होगी। अंतिम परिणाम आने के बाद ही इन वार्डों की सीटों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

इसी कारण मेयर चुनाव की नई तारीख भी फिलहाल तय नहीं हुई है। निर्वाचन आयोग की अगली प्रक्रिया और आदेश के बाद मेयर चुनाव का कार्यक्रम सामने आएगा।

कोटा में BJP बोर्ड तय, मेयर के नाम पर सस्पेंस

कोटा नगर निगम में भाजपा 55 सीटों के साथ बहुमत में है। इसलिए बोर्ड गठन को लेकर पार्टी की स्थिति मजबूत है। लेकिन मेयर पद का चेहरा अभी तय नहीं हुआ है।

देव बाई गुर्जर, सविता सुवालका और योगेंद्र खींची जैसे चर्चित नामों की हार ने मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है। अब भाजपा किसी नए OBC महिला पार्षद को मेयर की जिम्मेदारी दे सकती है।

फिलहाल कोटा की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा के 55 पार्षदों में से किस महिला चेहरे को मेयर की कुर्सी मिलती है। अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के मंथन और चुनाव आयोग की अगली प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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Stv News Rajasthan

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