Rajasthan Nikay Chunav: नतीजों से पहले BJP-कांग्रेस की बाड़ेबंदी, कहीं क्रिकेट-लूडो तो कहीं मंदिरों में पूजा
खबर का सारांश
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों से पहले भाजपा और कांग्रेस ने अपने संभावित विजेता पार्षदों की बाड़ेबंदी शुरू कर दी है। मेयर और सभापति की कुर्सी को लेकर दोनों दल किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते। सेंधमारी और दल-बदल की आशंका के बीच प्रत्याशियों को अलग-अलग होटल और रिसॉर्ट में रखा जा रहा है।
कहीं प्रत्याशी क्रिकेट खेलकर समय काट रहे हैं तो कहीं लूडो खेल रहे हैं। कुछ जगह मंदिरों में पूजा-अर्चना भी की जा रही है। वहीं, कई प्रत्याशियों को परिवार और बच्चों के साथ कैंप में रखा गया है। कुछ स्थानों पर मोबाइल फोन भी जमा कराने की जानकारी सामने आई है।
जयपुर में प्रदेश संगठन संभाल रहा कमान
जयपुर में भाजपा प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी को लेकर पार्टी किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रदेश संगठन स्तर से की जा रही है।
दूसरे चरण के प्रत्याशियों को शनिवार दोपहर प्रदेश कार्यालय बुलाए जाने की जानकारी है। इसके बाद उन्हें एक स्थान पर एकत्रित कर होटल या रिसॉर्ट में रखने की तैयारी है। पार्टी की कोशिश है कि मतगणना और बोर्ड गठन तक प्रत्याशी एकजुट रहें। कांग्रेस भी अपने संभावित विजेताओं को लेकर इसी तरह की रणनीति पर काम कर रही है।
उदयपुर में दो बसों से रवाना हुए प्रत्याशी
उदयपुर में मतदान खत्म होने के बाद भाजपा के नगर निगम प्रत्याशियों की दो बसें शुक्रवार रात करीब 11 बजे रवाना हुईं। इन्हें रणकपुर के एक रिसॉर्ट में ठहराने की योजना बनाई गई है।
इसके बाद प्रत्याशियों को पावापुरी ले जाने की भी योजना बताई जा रही है। चुनाव परिणाम से पहले संभावित विजेता पार्षदों को एक साथ रखने के पीछे दलों की कोशिश सेंधमारी की आशंका को रोकना है। अब 14 सितंबर की मतगणना तक इन प्रत्याशियों की गतिविधियों पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
बूंदी में क्रिकेट और लूडो से कट रहा समय
बूंदी में भाजपा प्रत्याशियों ने बाड़ेबंदी के दौरान अलग अंदाज में समय बिताया। दूसरे दिन प्रत्याशी होटल के गार्डन में क्रिकेट खेलते नजर आए। वहीं, महिला प्रत्याशियों ने सुबह कमरों में मोबाइल पर लूडो खेलकर समय बिताया।
दूसरी ओर, कांग्रेस के प्रत्याशियों को बूंदी से झालावाड़ जिले में ले जाने की जानकारी सामने आई है। दोनों दलों की कोशिश है कि नतीजे आने तक प्रत्याशी एकजुट रहें। बोर्ड गठन के दौरान एक-एक पार्षद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बीकानेर के प्रत्याशी जोधपुर रिसॉर्ट में
बीकानेर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को जोधपुर के एक रिसॉर्ट में ठहराया है। पार्टी की योजना के अनुसार उन्हें मतगणना से एक दिन पहले यानी 13 सितंबर को वापस बीकानेर लाया जाएगा।
इसी तरह मतदान के बाद कई अन्य निकायों में भी संभावित विजेता प्रत्याशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखा जा रहा है। राजनीतिक दलों को आशंका है कि परिणाम सामने आने के बाद निर्दलीय और करीबी मुकाबले में जीतने वाले पार्षदों से संपर्क साधने की कोशिश हो सकती है।
रावतभाटा में प्रत्याशी को लेने जा रही कार पलटी
चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में भाजपा प्रत्याशियों को लेकर भी एक घटना सामने आई। यहां बाड़ेबंदी में रखे गए प्रत्याशियों के मोबाइल फोन जमा कराए जाने की जानकारी है।
शुक्रवार को भाजपा जिला पदाधिकारी उमेश त्रिपाठी सहित चार लोग एक प्रत्याशी को लेने रावतभाटा जा रहे थे। इसी दौरान उनकी कार पलट गई। हादसे में सभी को मामूली चोटें आने की जानकारी है। घटना के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
पाली में परिवार के साथ गईं प्रत्याशी
पाली नगर निगम में मतदान खत्म होते ही प्रत्याशियों की किलाबंदी शुरू कर दी गई। वार्ड 29 से भाजपा प्रत्याशी सुल्ताना बानो भी अपने परिवार के साथ रवाना हुईं।
बाड़ेबंदी के दौरान प्रत्याशियों के साथ परिवार के लोगों के रहने के मामले भी सामने आ रहे हैं। खासकर महिला प्रत्याशी अपने बच्चों और परिवार को साथ लेकर जा रही हैं। इसका उद्देश्य उन्हें लंबे समय तक बाहर रहने के दौरान पारिवारिक परेशानी से बचाना भी बताया जा रहा है।
भरतपुर में संभावित विजेताओं की किलेबंदी
भरतपुर में भी मतदान के बाद संभावित विजेता प्रत्याशियों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बृजनगर के प्रत्याशियों को अलवर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
इसके अलावा कई अन्य निकायों के संभावित जिताऊ प्रत्याशियों को अलवर, हरियाणा और जयपुर में रखा गया है। चुनाव परिणाम आने से पहले राजनीतिक दल अपने संभावित बोर्ड गठन का गणित मजबूत करने में जुटे हैं। खासकर निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका को देखते हुए उनकी निगरानी और संपर्क बढ़ गया है।
अलवर में कुलदीप मीणा की बाड़ेबंदी से वापसी
अलवर में वार्ड 22 के निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप मीणा की बाड़ेबंदी से वापसी ने सियासी माहौल गर्म कर दिया। कुलदीप देर रात करीब ढाई बजे कांग्रेस की बाड़ेबंदी से वापस लौटे।
कुलदीप ने आरोप लगाया कि सीने में दर्द के बावजूद डॉक्टर को नहीं बुलाया गया। उन्होंने बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलने की भी बात कही। इसके बाद उनके परिजन पुलिस के साथ उन्हें वापस ले आए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी इच्छा से बाड़ेबंदी में गए थे। इलाज नहीं मिलने से परेशान होकर उन्होंने वापस लौटने का फैसला किया।
मेयर और सभापति की कुर्सी पर नजर
निकाय चुनाव की मतगणना 14 सितंबर को होगी। इसके बाद अलग-अलग नगर निकायों में बोर्ड गठन और मेयर-सभापति चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। इसी वजह से भाजपा और कांग्रेस दोनों अभी से अपने संभावित समीकरण मजबूत करने में जुटी हैं।
करीबी मुकाबले वाले निकायों में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। ऐसे में चुनाव परिणाम से पहले शुरू हुई बाड़ेबंदी को राजनीतिक दलों की रणनीतिक तैयारी माना जा रहा है। अब देखना होगा कि मतगणना के बाद कौन सा दल कितने पार्षदों को अपने साथ बनाए रख पाता है।