अलवर में पार्षदों की बाड़ेबंदी पर बवाल, कांग्रेस कैंप पहुंचे वन अधिकारी; निर्दलीय को ले जाने का आरोप
खबर का सारांश
अलवर नगर निगम में मेयर और बोर्ड गठन को लेकर सियासी खींचतान तेज हो गई है। शुक्रवार को जयपुर के तुंगा गांव स्थित एक रिसॉर्ट में कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान हंगामा हो गया। आरोप है कि भाजपा नेताओं के साथ वन विभाग के अधिकारी रिसॉर्ट पहुंचे। इसके बाद वार्ड 22 के निर्दलीय पार्षद कुलदीप मीणा को अपने साथ ले जाने की बात सामने आई।
घटनाक्रम के दौरान करीब तीन घंटे तक रिसॉर्ट के बाहर हंगामे की स्थिति बनी रही। मौके पर तीन जिलों की पुलिस, वन विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए। हालांकि, वन विभाग ने कार्रवाई को गोपनीय बताते हुए ज्यादा जानकारी देने से इनकार किया।
कांग्रेस के रिसॉर्ट में पहुंचे वन अधिकारी
कांग्रेस ने जयपुर के तुंगा क्षेत्र स्थित रिसॉर्ट में अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी की हुई है। बताया जा रहा है कि यहां कांग्रेस के 64 प्रत्याशियों के साथ आठ निर्दलीय पार्षद भी ठहरे हुए हैं। चुनाव परिणाम से पहले दोनों प्रमुख दल निर्दलीयों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी बीच शुक्रवार को वन विभाग के अधिकारी रिसॉर्ट पहुंच गए। भाजपा नेताओं के साथ अधिकारियों के पहुंचने के बाद वहां राजनीतिक माहौल गरमा गया। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग से जोड़ दिया। वहीं, वन विभाग की ओर से इसे गोपनीय कार्रवाई बताया गया।
निर्दलीय कुलदीप मीणा को साथ ले जाने का आरोप
घटनाक्रम के केंद्र में वार्ड नंबर 22 के निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप मीणा रहे। आरोप है कि उन्हें रिसॉर्ट से वन विभाग के अधिकारी अपने साथ ले गए। इस दौरान रिसॉर्ट के बाहर समर्थकों और अन्य लोगों की भीड़ जमा हो गई।
हालांकि, कुलदीप मीणा का कहना है कि उनके परिवार में कुछ लोग बीमार हैं। इसी वजह से वह रिसॉर्ट से बाहर आए थे। उन्होंने घटनाक्रम को लेकर अपनी अलग बात रखी है। इसलिए उन्हें जबरन ले जाने का दावा फिलहाल आरोप के तौर पर ही सामने आया है।
वन विभाग ने कहा- गोपनीय काम से पहुंचे थे
रिसॉर्ट पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों से कार्रवाई को लेकर सवाल किए गए। बस्सी रेंजर नमोनारायण मीणा ने बताया कि वे एक गोपनीय काम से रिसॉर्ट पहुंचे थे।
उन्होंने इस कार्रवाई से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार किया। ऐसे में वन विभाग की टीम किस मामले में रिसॉर्ट पहुंची थी और कार्रवाई का निर्दलीय पार्षद से क्या संबंध था, इसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।
तीन जिलों की पुलिस और ग्रामीण भी पहुंचे
मामला बढ़ने के बाद रिसॉर्ट के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। मौके पर तीन जिलों की पुलिस के साथ वन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पहुंचने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
करीब तीन घंटे तक रिसॉर्ट के बाहर हंगामे की स्थिति बनी रही। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव परिणाम से पहले ही अलवर की निकाय राजनीति को और गरमा दिया।
टीकाराम जूली ने BJP सरकार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया के जरिए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी राजनीति में पुलिस के इस्तेमाल के बाद अब कांग्रेस के कैंप में वन विभाग की टीम भेजी गई है।
जूली ने इसके लिए अलवर विधायक और वन मंत्री संजय शर्मा को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सरकारी विभागों का इस्तेमाल पार्षदों को प्रभावित करने के लिए कर रही है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मेयर चुनाव से पहले निर्दलीयों पर नजर
अलवर नगर निगम में मेयर और बोर्ड गठन को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर निर्दलीय पार्षदों पर है। चुनाव परिणाम आने के बाद बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
इसी वजह से दोनों दल अपने पार्षदों के साथ संभावित समर्थकों को भी सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। बाड़ेबंदी के बीच कुलदीप मीणा से जुड़ा घटनाक्रम इसी सियासी खींचतान को दिखाता है। अब सभी की नजर चुनाव परिणाम और उसके बाद होने वाले मेयर चुनाव पर है।