डूंगरपुर के दो वार्डों में नहीं हुई वोटिंग, नए वोटरों का सेल्फी का सपना अधूरा; निर्विरोध चुने गए प्रत्याशी
राजस्थान निकाय चुनाव के दौरान डूंगरपुर में चुनावी माहौल के बीच दो वार्ड ऐसे रहे, जहां मतदाताओं को वोट डालने का मौका ही नहीं मिला। नगर निकाय के वार्ड 23 और 28 में प्रत्याशियों के निर्विरोध चयन के कारण मतदान नहीं कराया गया। खास तौर पर पहली बार मतदाता बने युवाओं में इसे लेकर मायूसी देखने को मिली। नए वोटरों को बूथ पर जाकर EVM से मतदान करने, उंगली पर चुनावी स्याही लगवाने और स्याही लगी उंगली के साथ सेल्फी लेने के लिए अब आगामी विधानसभा चुनाव तक इंतजार करना होगा।
वार्ड 23 में निर्विरोध चुने गए मनन कलासुआ
डूंगरपुर के वार्ड नंबर 23 में भोईवाड़ा, कोतवाली, जामा मस्जिद, खटीकवाड़ा और कलालों का मंदिर क्षेत्र शामिल है। यहां करीब 1,084 मतदाता पंजीकृत हैं।
नामांकन के दौरान भाजपा की ओर से मनन कलासुआ और कांग्रेस की ओर से गणेश कटारा ने दावेदारी की थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन आपराधिक मामले से संबंधित जानकारी छिपाने के कारण रद्द कर दिया गया।
इसके बाद मैदान में मनन कलासुआ अकेले रह गए और उनका निर्विरोध चयन हो गया। ऐसे में वार्ड 23 में मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ी।
वार्ड 28 में भी मतदाताओं को नहीं मिला वोटिंग का मौका
वार्ड 28 में भी प्रत्याशी के निर्विरोध चयन के चलते मतदान नहीं हुआ। इस कारण यहां भी मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशी के पक्ष में वोट नहीं डाल सके।
चुनावी प्रक्रिया में मतदान का दिन जहां अधिकांश वार्डों में उत्सव जैसा माहौल लेकर आया, वहीं वार्ड 23 और 28 में इसका अभाव नजर आया। दोनों इलाकों में चुनावी सरगर्मी मतदान से पहले ही समाप्त हो गई।
मोहल्लों में नहीं दिखी चुनावी चहल-पहल
निर्विरोध चयन के बाद वार्ड 23 के भोईवाड़ा और वार्ड 28 के विजयगंज कॉलोनी क्षेत्र में चुनावी माहौल नजर नहीं आया। आमतौर पर चुनाव के दौरान दिखाई देने वाले झंडे-बैनर, प्रत्याशियों के कार्यालय और जनसंपर्क अभियान यहां नहीं दिखे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मतदान नहीं होने के कारण चुनाव को लेकर होने वाली बैठकों और प्रचार गतिविधियों का भी माहौल नहीं बन पाया। ज्यादातर लोग अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त नजर आए।
पहली बार वोटर बने युवाओं में मायूसी
इन दोनों वार्डों में सबसे ज्यादा मायूसी उन युवाओं में दिखाई दी, जो इस बार पहली बार मतदान करने वाले थे। भोईवाड़ा निवासी मोनित भोई भी इसी साल 18 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद पहली बार मतदाता बने थे।
उन्होंने बीएलओ के माध्यम से अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाया था। निकाय चुनाव की तारीख घोषित होने के बाद वह पहली बार मतदान केंद्र जाने को लेकर उत्साहित थे।
EVM, स्याही और सेल्फी का इंतजार अब विधानसभा चुनाव तक
पहली बार मतदाता बने मोनित के लिए चुनाव सिर्फ वोट डालने तक सीमित नहीं था। वह मतदान केंद्र जाकर EVM पर वोट देने और मतदान के बाद उंगली पर लगने वाली स्याही को लेकर भी उत्साहित थे।
उनकी इच्छा थी कि स्याही लगी उंगली के साथ सेल्फी लेकर इस खास पल को यादगार बनाया जाए। लेकिन वार्ड में निर्विरोध चयन के कारण मतदान नहीं हुआ और उनका यह अनुभव अधूरा रह गया।
अब उन्हें पहली बार मतदान करने, उंगली पर चुनावी स्याही लगवाने और वोटिंग का अनुभव लेने के लिए आगामी विधानसभा चुनाव का इंतजार करना होगा।
निर्विरोध चुनाव ने बदल दिया चुनावी माहौल
डूंगरपुर के वार्ड 23 और 28 की तस्वीर दूसरे वार्डों से बिल्कुल अलग रही। जहां अन्य वार्डों में प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए प्रचार और जनसंपर्क में जुटे रहे, वहीं इन दोनों वार्डों में निर्विरोध चयन के कारण चुनावी प्रतिस्पर्धा ही खत्म हो गई।
पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए यह स्थिति भले ही मायूसी वाली रही हो, लेकिन निर्विरोध निर्वाचन के कारण मतदान की आवश्यकता नहीं रहने से यहां चुनावी गतिविधियां भी सीमित रहीं।