Rajasthan Nikay Chunav: सियासी रसूख के साथ क्रिमिनल रिकॉर्ड भी चर्चा में, 100 से ज्यादा प्रत्याशियों पर आपराधिक केस
राजस्थान के निकाय चुनाव में इस बार राजनीतिक रसूख के साथ प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रदेश के अलग-अलग नगर निकायों में 100 से ज्यादा प्रत्याशियों ने अपने चुनावी हलफनामों में आपराधिक प्रकरण घोषित किए हैं। इनमें मारपीट, धोखाधड़ी और शांतिभंग जैसे मामलों से लेकर हत्या के प्रयास, महिला संबंधी अपराध, जालसाजी और हथियार अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं के मामले भी शामिल हैं। वहीं कुछ प्रत्याशियों के नामांकन आपराधिक मामलों में सजा या गंभीर धाराओं के चलते खारिज भी हुए हैं।
बीकानेर में 21 प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में कुल 373 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें 21 प्रत्याशियों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। यह संख्या कुल प्रत्याशियों की करीब 5.6 प्रतिशत बैठती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ प्रत्याशियों पर मारपीट और शांतिभंग जैसे मामले हैं, जबकि कुछ के खिलाफ हत्या के प्रयास, जानलेवा हमला, महिला से अभद्रता, धोखाधड़ी और हथियार अधिनियम से जुड़े प्रकरण भी दर्ज हैं।
हालांकि, आपराधिक मामला दर्ज होना अपने आप में अपराध सिद्ध होना नहीं है। जिन मामलों का उल्लेख हलफनामों में किया गया है, उनमें से कई अदालतों में विचाराधीन हैं।
जयपुर में BJP-कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों ने केस घोषित किए
जयपुर के निकाय चुनाव में भाजपा के 8 और कांग्रेस के 9 प्रत्याशियों समेत कुल 17 उम्मीदवारों ने अपने हलफनामों में आपराधिक प्रकरणों की जानकारी दी है।
वहीं किशनपोल विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 111 में कांग्रेस प्रत्याशी ज्वाला प्रसाद का नामांकन आपराधिक प्रकरण से जुड़े मामले में निरस्त किया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनके खिलाफ ऐसी धारा में आरोप तय होने का उल्लेख था, जिसमें पांच साल से अधिक की सजा का प्रावधान है।
अजमेर में मारपीट से लेकर धोखाधड़ी तक के मामले
अजमेर में भी कई प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड सामने आए हैं। वार्ड 18 से भाजपा प्रत्याशी विक्रम तम्बोली के खिलाफ 2016 में सरकारी कर्मचारी से मारपीट का मामला दर्ज होने की जानकारी है, जो अदालत में विचाराधीन है।
वार्ड 20 से कांग्रेस प्रत्याशी ऋषभ पटेल पर रास्ता रोककर मारपीट सहित दो मामलों का उल्लेख है। वार्ड 35 से भाजपा प्रत्याशी दीदार चौहान के खिलाफ 2012 में लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज हुआ था, जिसमें 600 रुपये जुर्माना हुआ था।
वार्ड 48 से कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल बैरवाल के खिलाफ आरपीजीओ की धारा 13 से जुड़े दो मामले विचाराधीन बताए गए हैं। वार्ड 50 से कांग्रेस प्रत्याशी चंदनसिंह के खिलाफ 2019 में IPC की धारा 447 और 427 के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी है।
वहीं वार्ड 63 से कांग्रेस प्रत्याशी मोहसिन खान 2015 के धोखाधड़ी मामले में मई 2026 में अदालत से दोषमुक्त हो चुके हैं।
कोटा में BJP के 6 और कांग्रेस के 4 प्रत्याशी
कोटा में कुल 10 प्रत्याशियों ने आपराधिक मामलों की जानकारी अपने हलफनामों में दी है। इनमें भाजपा के 6 और कांग्रेस के 4 प्रत्याशी शामिल हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन सभी मामलों की सुनवाई अदालत में चल रही है। यानी केवल प्रकरण दर्ज होने के आधार पर किसी प्रत्याशी को दोषी नहीं माना जा सकता।
श्रीगंगानगर में 12 प्रत्याशियों पर केस
श्रीगंगानगर जिले में 12 प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें मारपीट, राजकार्य में बाधा और धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं।
इन मामलों का उल्लेख संबंधित प्रत्याशियों के चुनावी हलफनामों में किया गया है और कई प्रकरण न्यायालय में लंबित बताए गए हैं।
झालावाड़ में एक प्रत्याशी पर चार मामले
झालावाड़ नगर परिषद के वार्ड 26 से भाजपा प्रत्याशी मनोज गुर्जर के खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी है।
वहीं वार्ड 29 के प्रत्याशी बलवीर के खिलाफ बूंदी जिले के हिंडोली में एक मामला दर्ज होने का उल्लेख किया गया है।
डूंगरपुर में दो प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले
डूंगरपुर नगर परिषद चुनाव में दो प्रत्याशियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की जानकारी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार इनमें कोई भी मामला गंभीर प्रकृति का नहीं बताया गया है।
इससे साफ है कि अलग-अलग निकायों में प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज मामलों की प्रकृति भी अलग-अलग है।
सीकर में सजा के चलते दो नामांकन खारिज
सीकर जिले के रींगस और खंडेला में एक-एक प्रत्याशी ने चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था। लेकिन संबंधित मामलों में सजा होने के कारण दोनों प्रत्याशियों के नामांकन खारिज कर दिए गए।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनावी मैदान में किसी उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड केवल राजनीतिक चर्चा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कुछ परिस्थितियों में इसका सीधा असर उसकी चुनावी पात्रता पर भी पड़ सकता है।
आपराधिक केस और दोषसिद्धि में अंतर समझना जरूरी
निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड चर्चा में आने के बीच यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR या आपराधिक मुकदमा दर्ज होना और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना दो अलग-अलग बातें हैं।
कई प्रत्याशियों के खिलाफ मामले अभी अदालतों में विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय अदालत का होगा। वहीं जहां किसी मामले में सजा हो चुकी है, वहां चुनावी पात्रता पर संबंधित कानून और निर्वाचन नियम लागू होते हैं।
इस बार बड़ी संख्या में प्रत्याशियों द्वारा अपने हलफनामों में आपराधिक मामलों की जानकारी घोषित किए जाने से निकाय चुनाव में उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि भी मतदाताओं के बीच चर्चा का मुद्दा बन गई है।