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उदयपुर की बेटियों ने मलेशिया में रचा इतिहास, भारत को दिलाया कांस्य

उदयपुर: मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय लेक्रोज प्रतियोगिता में भारतीय महिला टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि में उदयपुर की 9 बेटियों की अहम भूमिका रही। कप्तान डाली गमेती के नेतृत्व में भारतीय टीम ने लीग मुकाबलों में मलेशिया और फिलीपींस को बड़े अंतर से हराया। इसके बाद कांस्य पदक के रोमांचक मुकाबले में सिंगापुर को 10-9 से शिकस्त देकर भारत की झोली में पदक डाला। राजस्थान की इन बेटियों के प्रदर्शन ने न सिर्फ उदयपुर, बल्कि पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

लीग मुकाबलों से ही दिखा भारतीय टीम का दम

भारतीय महिला टीम ने प्रतियोगिता की शुरुआत शानदार अंदाज में की। पहले लीग मुकाबले में भारत ने मेजबान मलेशिया की टीम को 27-3 के बड़े अंतर से मात दी। इसके बाद फिलीपींस के खिलाफ भी भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल जारी रखा और मुकाबला 20-2 से अपने नाम किया। लगातार दो बड़ी जीत के बाद टीम का आत्मविश्वास बढ़ा। खिलाड़ियों के बेहतरीन तालमेल, तेज आक्रमण और मजबूत डिफेंस ने भारत को पदक की दौड़ में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। शुरुआती मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन के बाद टीम की नजर कांस्य पदक पर टिक गई।

सिंगापुर के खिलाफ रोमांचक मुकाबले में जीता कांस्य

कांस्य पदक के लिए भारत और सिंगापुर के बीच बेहद रोमांचक मुकाबला हुआ। दोनों टीमों के बीच मुकाबला लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा और अंतिम क्षणों तक नतीजे को लेकर असमंजस बना रहा। भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बावजूद धैर्य बनाए रखा और अहम मौकों पर शानदार खेल दिखाया। आखिरकार भारत ने सिंगापुर को 10-9 से हराकर कांस्य पदक पर कब्जा कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय महिला टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। टीम की इस उपलब्धि को भारतीय लेक्रोज के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

उदयपुर की 9 बेटियों ने बढ़ाया राजस्थान का मान

भारतीय महिला टीम की इस ऐतिहासिक सफलता में उदयपुर की 9 खिलाड़ियों का योगदान रहा। टीम की कप्तानी डाली गमेती ने संभाली। उनके साथ सुनीता मीणा, यशिष्ठा बत्रा, जुला कुमारी गुर्जर, मीरा दौजा, विशाखा मेघवाल, यशोदा गमेती, रोशनी बोस और जानवी राठौड़ ने भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। इन खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने खेल और जज्बे से पहचान बनाई। खास बात यह है कि उदयपुर की इतनी बड़ी संख्या में खिलाड़ियों का एक साथ भारतीय टीम का हिस्सा बनना क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है।

कोच और मैनेजमेंट की मेहनत भी रंग लाई

इस सफलता के पीछे खिलाड़ियों के साथ कोचिंग और मैनेजमेंट टीम की मेहनत भी अहम रही। कोच नीरज बत्रा और शकील खान के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता के लिए तैयारी की, जबकि मैनेजर शहजाद खान ने टीम के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के दौरान खिलाड़ियों को रणनीति, फिटनेस और टीमवर्क पर विशेष ध्यान देना पड़ा। मैदान पर खिलाड़ियों के बीच बेहतर तालमेल ने टीम को लगातार मजबूत प्रदर्शन करने में मदद की। आखिरकार मेहनत का नतीजा कांस्य पदक के रूप में सामने आया।

जनजाति अंचल की बेटियों ने पेश की मिसाल

उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने भारतीय टीम की इस उपलब्धि को राजस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि जनजाति अंचल की बेटियों ने साबित किया है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर छोटे क्षेत्रों से निकलने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने और उन्हें हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराने की बात कही। लक्ष्य ओलंपिक योजना के तहत भी खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने का भरोसा जताया गया है।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका उदयपुर का नाम

कुआलालंपुर में भारतीय महिला टीम की कांस्य पदक जीत ने उदयपुर की खेल प्रतिभाओं को नई पहचान दी है। एक तरफ भारतीय टीम ने मलेशिया और फिलीपींस के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज की, तो दूसरी ओर सिंगापुर के खिलाफ दबाव भरे मुकाबले में जीत हासिल कर पदक सुनिश्चित किया। उदयपुर की 9 खिलाड़ियों की मौजूदगी इस सफलता को और खास बनाती है। इन बेटियों की उपलब्धि क्षेत्र के दूसरे युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है और अंतरराष्ट्रीय खेलों में राजस्थान की भागीदारी को नई मजबूती दे सकती है।

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Stv News Rajasthan

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