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मुंबई के सरकारी अस्पताल में बुर्के को लेकर विवाद, महिला ने लगाए गंभीर आरोप


मुंबई के एक सरकारी अस्पताल में बुर्का पहनकर पहुंची महिला को कथित तौर पर प्रवेश से रोकने का मामला सामने आया है। महिला का आरोप है कि अस्पताल के सुरक्षा कर्मचारियों ने बुर्के में अंदर जाने की अनुमति नहीं दी और इसके लिए बच्चा चोरी होने की आशंका का हवाला दिया। घटना के बाद महिला ने अस्पताल की व्यवस्था और सुरक्षा नियमों पर सवाल उठाते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही है। महिला के मुताबिक, उन्होंने अपनी पहचान भी बताई, इसके बावजूद उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। वहीं, मामले पर अस्पताल प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मैटरनिटी वार्ड के बाहर रोके जाने का आरोप

महिला की पहचान जहां आरा के रूप में बताई गई है, जो पेशे से अधिवक्ता हैं। उनके अनुसार, वह मुंबई के कूपर अस्पताल गई थीं और मैटरनिटी वार्ड के बाहर उन्हें सुरक्षा कर्मचारियों ने रोक दिया। जहां आरा का आरोप है कि उन्हें बुर्का पहनने की वजह से अंदर जाने से मना किया गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने सुरक्षा कर्मचारियों को अपना परिचय भी दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई। महिला ने इस घटना को लेकर आपत्ति जताई और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

सुरक्षा गार्ड के कथित बयान से बढ़ा विवाद

जहां आरा के मुताबिक, जब उन्होंने सुरक्षा कर्मचारी से बुर्के में प्रवेश रोकने की वजह पूछी तो उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि बुर्का पहनकर महिलाएं अस्पताल में आती हैं और बच्चियां चोरी हो जाती हैं। इस कथित टिप्पणी के बाद विवाद और गहरा गया। महिला ने सवाल उठाया कि बच्चे चोरी होने की घटनाओं को किसी विशेष पहनावे से जोड़ना कितना उचित है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में चोरी की घटनाओं की जांच व्यक्ति के अपराध के आधार पर होनी चाहिए, न कि उसके पहनावे के आधार पर।

महिला ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

जहां आरा ने कहा कि अस्पताल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त नियम होना जरूरी है, लेकिन किसी एक समुदाय के पहनावे को आधार बनाकर रोकना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अस्पतालों में बच्चे चोरी होने की घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों में सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति पर चोरी का संदेह है तो सुरक्षा कर्मचारियों को नियमानुसार जांच करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी विशेष पहनावे या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कथित भेदभाव पर सवाल उठाना है।

कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

घटना से नाराज जहां आरा ने मामले में कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि उनके साथ जो व्यवहार हुआ, उसे लेकर वह कानून के तहत उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल करेंगी। उनका आरोप है कि अपनी पहचान बताने के बावजूद उन्हें बुर्का हटाने के बाद ही अंदर जाने की बात कही गई। महिला ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि वह इस तरह की घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह मुंबई के अन्य बीएमसी अस्पतालों में जाकर वहां लागू प्रवेश और सुरक्षा नियमों की जानकारी लेंगी।

अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि अस्पताल में बुर्का या अन्य परिधान को लेकर कोई लिखित प्रवेश नियम लागू है या संबंधित सुरक्षा कर्मचारी ने अपने स्तर पर महिला को रोका था। ऐसे में पूरे मामले की स्थिति अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक जांच या प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल घटना को लेकर महिला के आरोप सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में हैं।

सुरक्षा और सम्मान के बीच संतुलन जरूरी

अस्पतालों में नवजात बच्चों और मरीजों की सुरक्षा के लिए पहचान सत्यापन और प्रवेश संबंधी नियम लागू किए जाते हैं। हालांकि, ऐसे नियम सभी आगंतुकों पर समान रूप से लागू होना महत्वपूर्ण है। इस मामले में भी मुख्य सवाल यही है कि क्या महिला को रोकने का फैसला अस्पताल की आधिकारिक नीति के तहत था या सुरक्षा कर्मचारी ने अपने स्तर पर कार्रवाई की। अस्पताल की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि घटना में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।

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Stv News Rajasthan

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