चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार का बड़ा फैसला, इम्पोर्ट नियम बदले
देश में चीनी की खुदरा कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के टैरिफ रेट कोटा (TRQ) आयात के लिए नई समयसीमा तय की है। अब आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर कच्ची चीनी को रिफाइन कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बेचने की शर्त होगी। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एक महीने में चीनी की खुदरा कीमत में करीब 15.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दो महीने के भीतर बेचनी होगी रिफाइंड चीनी
सरकार के नए नियम के अनुसार TRQ के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को आयातक अनिश्चित समय तक अपने पास नहीं रख सकेगा। बिल ऑफ एंट्री दाखिल होने की तारीख से दो महीने के भीतर उसे कच्ची चीनी को रिफाइन कर सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में उतारना होगा। पहले इसके लिए एक समान अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित थी। अब हर खेप के लिए उसकी आयात तिथि के आधार पर अलग समयसीमा लागू होगी। सरकार के इस बदलाव का मकसद आयातित चीनी को घरेलू बाजार में समय पर उपलब्ध कराना बताया जा रहा है।
एक महीने में 7.52 रुपये किलो महंगी हुई चीनी
चीनी की कीमतों में हालिया तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत 48.18 रुपये प्रति किलो थी। 20 अगस्त तक यह बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई। यानी करीब एक महीने में कीमत में 7.52 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई। प्रतिशत के हिसाब से यह लगभग 15.6 फीसदी की बढ़ोतरी है। रोजमर्रा की जरूरत वाली वस्तु होने के कारण चीनी के दाम बढ़ने का सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ सकता है।
सरकार ने 10 लाख MT कच्ची चीनी के आयात की व्यवस्था की
केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के TRQ आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। TRQ व्यवस्था के तहत निर्धारित मात्रा में चीनी का आयात अपेक्षाकृत कम शुल्क पर किया जाता है। नए नियमों में आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचने की समयसीमा को खेप आधारित बनाया गया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब घरेलू बाजार में चीनी के दाम बढ़ रहे हैं और उत्पादन तथा उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
उत्पादन घटने से बढ़ी सरकार की चिंता
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने चीनी उत्पादन में कमी को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक गन्ने की फसल पर मौसम से जुड़ी परिस्थितियों का असर पड़ा है। उन्होंने अल नीनो परिस्थितियों का भी जिक्र किया, जिसका असर भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में कृषि उत्पादन पर पड़ने की बात कही गई है। चीनी उत्पादन में कमी की आशंका के बीच घरेलू मांग को पूरा करने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार को आयात समेत कई विकल्पों पर ध्यान देना पड़ रहा है। आने वाले समय में उत्पादन और बाजार की स्थिति कीमतों की दिशा तय करेगी।
देश में जरूरत से ज्यादा स्टॉक होने का भी दावा
केंद्रीय मंत्री के अनुसार भारत में चीनी की सालाना खपत करीब 280 लाख टन है। वहीं देश में 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध होने की बात कही गई है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौती केवल स्टॉक की उपलब्धता की नहीं, बल्कि उसे उचित समय पर बाजार तक पहुंचाने की भी है। आयातित कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचने का नया नियम इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, चीनी की खुदरा कीमतों पर इसका वास्तविक असर आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
अब कीमतों पर नजर, उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद
चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी के बीच सरकार के नए आयात नियमों से बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। अगर आयातित कच्ची चीनी समय पर रिफाइन होकर घरेलू बाजार में पहुंचती है तो उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है। हालांकि, उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत कब मिलेगी, यह उत्पादन, स्टॉक, आयात और बाजार की मांग समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार के फैसले के बाद चीनी के खुदरा दामों पर बाजार की अगली चाल पर सभी की नजर बनी हुई है।