अलवर निकाय चुनाव: टिकट के लिए दावेदारों में होड़, सर्वे रिपोर्ट तय करेगी ‘जिताऊ’ चेहरा
अलवर नगर निगम के 65 वार्डों में निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया है। वार्डों की लॉटरी प्रक्रिया पूरी होते ही कांग्रेस और भाजपा के संभावित उम्मीदवार टिकट हासिल करने के लिए सक्रिय हो गए हैं। दोनों ही प्रमुख दलों ने स्पष्ट किया है कि इस बार टिकट वितरण में सिफारिशों के बजाय ‘जीत की संभावना’ को प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी स्तर पर किए जा रहे सर्वे के आधार ही अंतिम प्रत्याशियों का चयन होगा, जिससे दावेदारों के बीच प्रतिस्पर्धा और तीव्र हो गई है।
बायोडेटा जमा और नेताओं से संपर्क साधने की होड़ नगर निगम चुनावों की आहट के साथ ही दोनों प्रमुख दलों के कार्यालयों में दावेदारों की भीड़ जुटना शुरू हो गया है। पार्षद पद के इच्छुक उम्मीदवारों ने अपने बायोडेटा पार्टी कार्यालयों में जमा करा दिए हैं। अब टिकट फाइनल कराने के लिए वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों से लगातार संपर्क साध रहे हैं। यह दौर केवल कागजी कार्रवाई का नहीं, बल्कि अपनी पैठ और लोकप्रियता साबित करने का है, ताकि चयन समिति की नजरों में वे सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में उभर सकें।
कांग्रेस का रणनीति: विकास कार्य और भाजपा की खामियों पर हमला कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मोती डूंगरी स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों को जनता के सामने रखकर चुनाव लड़ेगी। जूली ने कहा कि भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में शहर में कोई ठोस विकास कार्य नहीं हुआ है, इसे मुद्दा बनाया जाएगा। उनका मानना है कि जनता वर्तमान सरकार की उपलब्धियों से असंतुष्ट है और कांग्रेस को फिर से मौका देना चाहेगी।
भाजपा का दावा: सर्वे आधारित पैनल और बोर्ड बनाने का लक्ष्य भाजपा कार्यालय में भी टिकटार्थियों का जमावड़ा रहा। दावेदारों ने वन मंत्री संजय शर्मा के समक्ष अपनी दावेदारी पेश की। भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने स्पष्ट किया कि पार्टी आगामी चुनाव में निगम पर अपना बोर्ड बनाने के लिए कृतसंकल्पित है। उन्होंने बताया कि टिकट वितरण से पहले वैज्ञानिक सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे के आधार पर हर वार्ड के लिए तीन संभावित उम्मीदवारों का एक पैनल तैयार किया जाएगा, जिसमें से अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पारदर्शिता और जीत का समीकरण दोनों दलों ने टिकट वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का दावा किया है। भाजपा की चयन समिति और वरिष्ठ नेता सर्वे रिपोर्ट और स्थानीय समीकरणों का विश्लेषण करके अंतिम प्रत्याशी का नाम तय करेंगे। इसका उद्देश्य ऐसे उम्मीदवारों को मौका देना है जिनकी जीत की संभावना सबसे अधिक हो। इस रणनीति से पुराने दिग्गजों के साथ-साथ नए चेहरों को भी मौका मिलने की उम्मीद है, जो स्थानीय स्तर पर अधिक सक्रिय और लोकप्रिय हैं।
स्थानीय समीकरण और आगामी चुनौतियां अलवर नगर निगम चुनाव केवल टिकट वितरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह स्थानीय मुद्दों जैसे सफाई, पेयजल और रोशनी की व्यवस्था पर भी केंद्रित होंगे। दावेदारों को अब केवल पार्टी हाईकमान को ही नहीं, बल्कि अपने वार्ड की जनता को भी यह विश्वास दिलाना होगा कि वे उनकी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। सर्वे रिपोर्ट आएगी तो स्पष्ट होगा कि किस वार्ड में किस दल की पकड़ मजबूत है, लेकिन अंतिम फैसला जनता के मतदान वाले दिन ही होगा।