डीजी हिमांशु गुप्ता बने कैदियों के शिक्षक, बिलासपुर जेल में अंग्रेजी पढ़ाकर सुधार मॉडल को दी नई दिशा
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर केंद्रीय जेल में जेल महानिदेशक (डीजी जेल) हिमांशु गुप्ता का निरीक्षण प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कैदियों के बीच बैठकर अंग्रेजी की कक्षा ली, उनकी समस्याएं सुनीं और शिक्षा, कौशल विकास व बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई नई योजनाओं को मंजूरी दी। इस पहल को जेलों को सुधार गृह के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बिलासपुर केंद्रीय जेल पहुंचे डीजी, व्यवस्थाओं का किया व्यापक निरीक्षण
जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बुधवार को बिलासपुर केंद्रीय जेल का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, कैदियों की दैनिक दिनचर्या, शिक्षा, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल अधिकारियों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली और कैदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और सुझावों को भी सुना। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कैदियों से जुड़े जरूरी मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि जेल का वातावरण अधिक सकारात्मक और सुधारात्मक बन सके।
कैदियों के बीच बैठकर पढ़ाई अंग्रेजी, शिक्षा का दिया संदेश
निरीक्षण की सबसे खास बात यह रही कि डीजी हिमांशु गुप्ता ने कैदियों के बीच बैठकर स्वयं अंग्रेजी की कक्षा ली। उन्होंने सरल भाषा में अंग्रेजी सीखने के तरीके समझाए और नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और ज्ञान व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी माध्यम हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि इस तरह की पहल कैदियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनके पुनर्वास और समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में मददगार साबित होगी।
जेल में उद्योग और रोजगारपरक प्रशिक्षण को मिलेगा बढ़ावा
कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जेल में नए उद्योग शुरू करने की मंजूरी दी गई है। इसके तहत कलर ऑफसेट प्रिंटिंग मशीन, एलईडी बल्ब निर्माण मशीन और एलईडी ट्यूबलाइट निर्माण मशीन स्थापित की जाएंगी। इन परियोजनाओं के माध्यम से कैदियों को तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारपरक कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। जेल प्रशासन का मानना है कि रिहाई के बाद ऐसे कौशल कैदियों के लिए आजीविका का बेहतर माध्यम बन सकते हैं।
स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय और आधुनिक सुविधाओं को मिली स्वीकृति
जेल की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट बोर्ड लगाने की मंजूरी दी गई है। साथ ही पुस्तकालय में प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है, ताकि कैदी भाषा ज्ञान के साथ समसामयिक घटनाओं से भी जुड़े रहें। इसके अलावा 20 आरओ वाटर प्यूरीफायर, रसोई के लिए ऑटोमेटिक रोटी मेकर मशीन, 2,000 नए थाली सेट और महिला जेल परिसर में इन्वर्टर लगाने की स्वीकृति भी दी गई। इन सुविधाओं का उद्देश्य कैदियों के जीवन स्तर और दैनिक व्यवस्थाओं में सुधार लाना है।
सुधार गृह की अवधारणा को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में शिक्षा, कौशल विकास और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार सुधारात्मक न्याय प्रणाली को मजबूत करेगा। स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय, रोजगारपरक प्रशिक्षण और बेहतर मूलभूत सुविधाएं कैदियों को सकारात्मक सोच अपनाने और समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए तैयार करेंगी। बिलासपुर केंद्रीय जेल में शुरू की गई यह पहल भविष्य में राज्य की अन्य जेलों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।
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