राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाली को लेकर प्रदर्शन तेज, 5 छात्र नेता पुलिस हिरासत में
राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को प्रदर्शनकारियों ने संविधान स्तंभ के सामने लेटकर विरोध जताया और मुख्य गेट की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ने की आशंका के बीच पुलिस ने पांच छात्र नेताओं को हिरासत में लेकर प्रदर्शन समाप्त कराया। दूसरी ओर, छात्र नेता शुभम रेवाड़ का आमरण अनशन भी आंदोलन का केंद्र बना हुआ है।
संविधान स्तंभ के सामने लेटकर जताया विरोध
बुधवार को राजस्थान यूनिवर्सिटी परिसर में बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए और छात्र नेता नीरज खीचड़ के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। छात्र पहले संविधान पार्क पहुंचे, जहां संविधान स्तंभ के सामने जमीन पर लेटकर उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन्हें जल्द बहाल किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय में राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना की मांग भी दोहराई। छात्रों ने सरकार से वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की।
मुख्य गेट की ओर मार्च, पुलिस ने पांच छात्रों को लिया हिरासत में
प्रदर्शन के बाद छात्र विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान जेएलएन मार्ग पर यातायात बाधित होने की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे आगे बढ़ने पर अड़े रहे तो पुलिस ने नीरज खीचड़ समेत पांच छात्र नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और यातायात सुचारु कराया गया। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई।
शुभम रेवाड़ का अनशन आंदोलन का केंद्र बना
छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर छात्र नेता शुभम रेवाड़ का आमरण अनशन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। आंदोलन के दौरान उन्होंने अन्न, जल और चिकित्सकीय उपचार तक का त्याग कर दिया था। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अस्पताल पहुंचकर आग्रह करने के बाद उन्होंने 48 घंटे बाद पानी ग्रहण किया, लेकिन उनकी अन्य मांगों को लेकर अनशन अभी भी जारी है।
आंदोलन का दायरा बढ़ा, सरकार से फैसले की मांग
छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार छात्रसंघ चुनाव बहाल करने और राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले भी आंदोलन के दौरान कुछ छात्र पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध दर्ज करा चुके हैं। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि छात्रों से लगातार संवाद किया जा रहा है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा अब राजस्थान की छात्र राजनीति का प्रमुख विषय बन चुका है।