छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग पर शुभम रेवाड़ का अनशन 14वें दिन, स्वास्थ्य नाजुक; सरकार से वार्ता का इंतजार
राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने और राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना की मांग को लेकर छात्र नेता शुभम रेवाड़ का आमरण अनशन 14वें दिन भी जारी है। सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में भर्ती रेवाड़ के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। समर्थकों का दावा है कि उन्होंने भोजन, पानी और चिकित्सकीय उपचार लेने से भी इनकार कर दिया है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अब तक किसी औपचारिक वार्ता की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।
14वें दिन भी जारी आमरण अनशन, स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता
23 जुलाई से शुरू हुआ छात्र नेता शुभम रेवाड़ का आमरण अनशन अब 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें 31 जुलाई को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा है। समर्थकों के अनुसार, रेवाड़ ने अस्पताल में भी भोजन, पानी, ड्रिप और अन्य चिकित्सकीय उपचार लेने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन की ओर से उनकी वर्तमान चिकित्सकीय स्थिति को लेकर विस्तृत आधिकारिक मेडिकल बुलेटिन सार्वजनिक नहीं किया गया है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।
दो प्रमुख मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन
शुभम रेवाड़ ने राजस्थान विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर दो प्रमुख मांगों को लेकर सत्याग्रह शुरू किया था। पहली मांग प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों की बहाली है, जबकि दूसरी मांग राजस्थान विश्वविद्यालय में नियमित राजस्थानी भाषा विभाग की स्थापना से जुड़ी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इन मुद्दों पर लंबे समय से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते आमरण अनशन का रास्ता अपनाया गया। छात्र संगठनों का दावा है कि यह आंदोलन छात्र हितों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ है।
सरकार से वार्ता नहीं होने का दावा, विपक्ष ने उठाए सवाल
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिनिधि बातचीत के लिए नहीं पहुंचा है। इसी बीच कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर सहित कई विपक्षी नेताओं और छात्र प्रतिनिधियों ने अस्पताल पहुंचकर शुभम रेवाड़ से मुलाकात की। विपक्ष ने राज्य सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। वहीं, सरकार की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित होने का इंतजार किया जा रहा है।
स्वास्थ्य और आंदोलन, दोनों पर बनी हुई है नजर
लंबे समय से जारी आमरण अनशन के कारण शुभम रेवाड़ की सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों की निगरानी के बीच प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यदि जल्द बातचीत का रास्ता नहीं निकलता है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल छात्र संगठन अपनी मांगों पर कायम हैं, जबकि सरकार की ओर से किसी संभावित वार्ता या समाधान को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और छात्र संगठनों की भी नजर बनी हुई है।
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