डिप्टी CM के नाम पर ट्रांसफर का दबाव पड़ा भारी, नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेंद्र पारीक निलंबित
राजस्थान में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के नाम का कथित दुरुपयोग कर अधिकारियों पर तबादले का दबाव बनाने के आरोप में जवाहरलाल नेहरू (JLN) अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेंद्र पारीक को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर दिया है। विभाग ने इसे संवैधानिक पद की गरिमा के प्रतिकूल आचरण बताते हुए कार्रवाई की है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय जैसलमेर निर्धारित किया गया है।
संवैधानिक पद के नाम के कथित दुरुपयोग पर विभाग की कार्रवाई
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, जेएलएन अस्पताल के नर्सिंग ऑफिसर पुष्पेंद्र पारीक पर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के नाम का कथित दुरुपयोग कर अधिकारियों पर अपने तबादले के लिए दबाव बनाने का आरोप है। विभाग ने माना कि ऐसा कृत्य संवैधानिक पद की गरिमा को प्रभावित करने वाला है। इसी आधार पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशक राकेश कुमार शर्मा ने उनके निलंबन के आदेश जारी किए। आदेश के मुताबिक, निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जैसलमेर रहेगा।
बिना अनुमति अनुपस्थित रहने का भी आरोप
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, पुष्पेंद्र पारीक 20 जून को स्थानांतरण के बाद जेएलएन अस्पताल में कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे थे, लेकिन अगले ही दिन से बिना पूर्व अनुमति और सूचना के अनुपस्थित हो गए। बाद में 18 जुलाई को दोबारा कार्यभार संभालने के दौरान भी उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर या संबंधित घटनाक्रम की जानकारी विभाग को नहीं दी। विभाग ने इस आचरण को भी सेवा नियमों के विपरीत मानते हुए कार्रवाई का हिस्सा बनाया है।
शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला
मामला सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को शिकायत भेजी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने अपने मोबाइल की कॉलर आईडी इस प्रकार सेट की थी कि कॉल प्राप्त करने वालों के फोन पर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा का नाम दिखाई देता था। आरोप है कि इसके जरिए उन्होंने स्वयं को उपमुख्यमंत्री बताकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय के अधिकारियों और जेएलएन अस्पताल प्रशासन पर अपने स्थानांतरण और मनचाहा कार्य आवंटित करने का दबाव बनाया। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था।
जांच के बाद अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू
पुलिस जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी नर्सिंग ऑफिसर की भूमिका की जांच की गई। पुलिस के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद अभियोजन स्वीकृति के लिए संबंधित पत्रावली अदालत में भेजी गई है। वहीं, विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबन आदेश जारी कर दिया गया है। अब आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई जांच और अभियोजन की प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी।
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