JPSC-JSSC भर्ती विवाद पर उबाल, छात्र सत्याग्रह का 12वां दिन; देवेंद्र महतो बने आंदोलन का प्रमुख चेहरा
झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में छात्रों का सत्याग्रह लगातार 12वें दिन भी जारी है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के आंदोलन को उस समय नई ऊर्जा मिली, जब प्रसिद्ध इनोवेटर सोनम वांगचुक ने उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत कर आंदोलन जारी रखने का हौसला बढ़ाया। छात्रों की मांग है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कर पारदर्शी भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सत्याग्रह के 12वें दिन भी जारी रहा छात्रों का आंदोलन
रांची में चल रहा छात्रों का सत्याग्रह लगातार बारहवें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और JPSC व JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित किए बिना युवाओं के भविष्य के साथ न्याय नहीं हो सकता। आंदोलनकारी ओएमआर शीट और मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक करने के साथ-साथ भर्ती आयोगों में व्यापक सुधार की मांग भी कर रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र लगातार धरना देकर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद बढ़ा आंदोलनकारियों का मनोबल
आंदोलन को उस समय नई चर्चा मिली जब देश के प्रसिद्ध इनोवेटर सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से वीडियो कॉल पर बातचीत की। बातचीत के दौरान वांगचुक ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की सलाह देते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। देवेंद्र महतो ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि वांगचुक के आग्रह पर उन्होंने चार दिन बाद पानी ग्रहण किया। साथ ही उन्होंने वांगचुक से रांची आकर आंदोलनरत छात्रों का मनोबल बढ़ाने का अनुरोध भी किया। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन को सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिलने लगा।
क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
धरने पर बैठे छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वे JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने, OMR शीट और मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक करने तथा भर्ती आयोगों में पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू करने की मांग उठा रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो 6 अगस्त को झारखंड विधानसभा का घेराव किया जाएगा। छात्रों का दावा है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संविधान सम्मत तरीके से चलाया जा रहा है।
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो, जिनकी हो रही है चर्चा?
33 वर्षीय देवेंद्र नाथ महतो रांची जिले के राहे प्रखंड के कापीडीह गांव के निवासी हैं और लंबे समय से छात्र एवं सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची से संस्कृत विषय में स्नातकोत्तर, जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा में उच्च शिक्षा तथा बी.एड. की डिग्री प्राप्त की है। वर्ष 2015 से वे छात्रवृत्ति, परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। हाल के वर्षों में वे झारखंड के छात्र आंदोलनों के प्रमुख चेहरों में शामिल हुए हैं और वर्तमान सत्याग्रह का नेतृत्व भी कर रहे हैं।
‘रांची के सोनम वांगचुक’ कहे जाने के पीछे क्या वजह है?
देवेंद्र नाथ महतो की तुलना सोशल मीडिया और आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों द्वारा सोनम वांगचुक से की जा रही है। इसकी वजह उनका अहिंसक सत्याग्रह, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और युवाओं के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करना बताया जा रहा है। हालांकि यह तुलना किसी आधिकारिक संस्था द्वारा नहीं की गई है, बल्कि आंदोलन के समर्थकों के बीच प्रचलित है। महतो ने वर्ष 2024 में रांची लोकसभा और सिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा था। वर्तमान में वे भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के हितों की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।