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बारां में AI तकनीक से ब्लैकमेल का सनसनीखेज मामला, कथित एडिटेड तस्वीरों से टूटी सगाई, पुलिस जांच में जुटी

राजस्थान के बारां जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कथित दुरुपयोग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कुछ लोगों ने युवती की तस्वीरों को AI तकनीक से कथित रूप से एडिट कर वर पक्ष को भेज दिया, जिससे सगाई टूट गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पहले 5 लाख रुपये और बाद में 16 लाख रुपये की मांग की गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

शादी रुकवाने की धमकी देकर कथित रूप से मांगे 5 लाख रुपये

पुलिस के अनुसार, मोठपुर थाना क्षेत्र के एक ग्रामीण ने शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी बेटी का रिश्ता तय होने के बाद सगाई की तैयारियां चल रही थीं। परिवार ने 22 जून को बारां शहर के एक होटल में कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी भी कर ली थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सगाई से पहले एक व्यक्ति उनके घर पहुंचा और 5 लाख रुपये की मांग की। कथित तौर पर धमकी दी गई कि रकम नहीं देने पर युवती की तस्वीरों को AI की मदद से एडिट कर बदनाम किया जाएगा और शादी नहीं होने दी जाएगी।

कथित एडिटेड तस्वीरें भेजने से टूटी सगाई

पीड़ित परिवार का आरोप है कि रुपये देने से इनकार करने के बाद आरोपियों ने युवती की कथित रूप से एडिट की गई तस्वीरें वर पक्ष को भेज दीं। शिकायत के अनुसार, इन तस्वीरों में युवती को किसी अन्य युवक के साथ दिखाया गया था, जिससे वर पक्ष में गलतफहमी पैदा हुई और उन्होंने सगाई तोड़ने का फैसला कर लिया। पुलिस का कहना है कि इन आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है और डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल होगी।

पीड़ित का आरोप- अब 16 लाख रुपये की नई मांग

एफआईआर के अनुसार, सगाई टूटने के बाद भी कथित ब्लैकमेलिंग का सिलसिला नहीं रुका। शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने अब शादी दोबारा तय करवाने और परिवार को बदनाम नहीं करने के बदले 16 लाख रुपये की मांग की। पीड़ित परिवार ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद संबंधित आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

AI के दुरुपयोग पर बढ़ी चिंता, डिजिटल जांच होगी अहम

यह मामला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह साइबर अपराध का गंभीर मामला हो सकता है। पुलिस ने बताया कि डिजिटल उपकरणों, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि AI आधारित फर्जी तस्वीरों और वीडियो के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को सोशल मीडिया पर प्राप्त किसी भी सामग्री पर बिना सत्यापन भरोसा नहीं करना चाहिए।

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