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जयपुर में महिला की गिरफ्तारी के बाद सतर्क हुईं एजेंसियां, कथित आतंकी नेटवर्क की नई रणनीति की जांच तेज

राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंधों के आरोप में एक महिला की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि वे सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित संदिग्ध नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। इसी क्रम में हरियाणा की एक यूट्यूबर समेत कुछ अन्य लोगों के कथित संपर्क भी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। हालांकि, एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

जयपुर में महिला की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी जांच

राजस्थान एटीएस ने जून 2026 में जयपुर निवासी बबीता को गिरफ्तार किया था। एजेंसी के अनुसार, उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनके संपर्क किन लोगों और नेटवर्क से जुड़े थे। अधिकारियों के अनुसार, जांच का उद्देश्य संभावित आतंकी गतिविधियों और डिजिटल संचार के पैटर्न को समझना है।

अन्य राज्यों के मामलों को भी जोड़कर देख रही हैं एजेंसियां

सुरक्षा एजेंसियां पश्चिम बंगाल में हुई एक अन्य कार्रवाई और उससे जुड़े संदिग्ध संपर्कों की भी जांच कर रही हैं। इसी क्रम में हरियाणा की एक यूट्यूबर और उत्तर प्रदेश की एक महिला का नाम भी कथित रूप से जांच के दायरे में होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि जांच के दायरे में होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित एजेंसियां सभी तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगी।

सोशल मीडिया के जरिए नेटवर्क बनाने की आशंका

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, जांच में यह पहलू भी शामिल है कि कहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप और फर्जी डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर लोगों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश तो नहीं की गई। जांच एजेंसियां फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सऐप जैसे माध्यमों पर संदिग्ध गतिविधियों, विदेशी नंबरों से संपर्क और डिजिटल संवाद का विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है।

जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर होगी साफ

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों की वैज्ञानिक एवं कानूनी तरीके से पड़ताल की जा रही है। फिलहाल किसी भी नए संदिग्ध या कथित नेटवर्क को लेकर आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए नागरिकों को भी अनजान लोगों से ऑनलाइन संपर्क, संदिग्ध संदेशों और फर्जी प्रोफाइल से सतर्क रहना चाहिए तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को देनी चाहिए।

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