जैसलमेर में नगर परिषद की बड़ी कार्रवाई: पार्क की आरक्षित भूमि से हटाए अवैध अतिक्रमण
जैसलमेर नगर परिषद ने शहर में सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में बड़ी कार्रवाई करते हुए गफूर भटा क्षेत्र में पार्क और परिषद की आरक्षित जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया। अभियान के दौरान हाल ही में बनाए गए कई कच्चे और पक्के निर्माणों को ध्वस्त किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि पर किसी भी नए अतिक्रमण को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पार्क के लिए आरक्षित भूमि पर चला बुलडोजर
गुरुवार को नगर परिषद ने प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में गफूर भटा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान पार्क के लिए सुरक्षित रखी गई परिषद की भूमि पर बने हालिया अवैध निर्माणों को हटाया गया। पूरे अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा, जिससे कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हुई। परिषद का कहना है कि सार्वजनिक भूमि को मूल उद्देश्य के अनुसार विकसित किया जाएगा।
अवैध निर्माण और कबाड़ कारोबार पर सख्त कार्रवाई
नगर परिषद के राजस्व अधिकारी पवन कुमार के अनुसार संबंधित भूमि पर कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से कबाड़ का कारोबार संचालित किया जा रहा था। इसके अलावा परिषद की जमीन पर कच्चे और पक्के मकान बनाकर उन्हें बेचने की गतिविधियां भी सामने आई थीं। इन शिकायतों के बाद परिषद ने अभियान चलाकर हाल ही में बने पांच से सात अवैध निर्माणों को हटाया। प्रशासन ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध कब्जे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
पुराने निवासियों को दिया गया समय
अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से वहां रह रहे परिवारों के मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया गया है। ऐसे परिवारों को तत्काल हटाने के बजाय पुनर्वास या अन्य स्थान पर स्थानांतरण के लिए समय दिया गया है। परिषद का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक भूमि पर नए और अवैध कब्जों को रोकना है। भविष्य में पार्क के विकास की योजना को ध्यान में रखते हुए भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखा जाएगा।
दोबारा कब्जे के प्रयासों पर परिषद की सख्ती
नगर परिषद ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से आए विस्थापित परिवारों के लिए पहले से भील बस्ती में आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराई जा चुकी है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 1998 और 2004 के सर्वे के आधार पर अधिकांश पात्र लोगों को भूमि के पट्टे जारी किए जा चुके हैं। परिषद का कहना है कि जिन लोगों ने पहले आवंटित भूमि बेच दी है, वे पुराने सर्वे का हवाला देकर दूसरी जगह दोबारा कब्जा नहीं कर सकते। ऐसे मामलों का कोई वैध कानूनी आधार नहीं है और भविष्य में भी नए अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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